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    US Elections 2020: आसान तरीके से समझिए अमेरिका में राष्ट्रपति चुनने की पूरी प्रक्रिया

    03 नवंबर को अमेरिका में वोटर वोट डालेंगे, हालांकि उनका ये वोट सीधे राष्ट्रपति चुनने के लिए नहीं होगा बल्कि वो इलेक्टर चुनेंगे, जो फिर ये तय करेंगे कि किसकी जीत होगी.
    03 नवंबर को अमेरिका में वोटर वोट डालेंगे, हालांकि उनका ये वोट सीधे राष्ट्रपति चुनने के लिए नहीं होगा बल्कि वो इलेक्टर चुनेंगे, जो फिर ये तय करेंगे कि किसकी जीत होगी.

    03 नवंबर (03 November) को अमेरिका के लोग राष्ट्रपति को चुनने के लिए मतदान करेंगे (US Presidential election). अमेरिका का चुनाव कुछ अलग तरह से होता है. क्या है इसकी चुनाव प्रक्रिया, सवाल-जवाब के रूप में इसे समझते हैं

    • News18Hindi
    • Last Updated: October 6, 2020, 2:32 PM IST
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    करीब एक महीने बाद 03 नवंबर को अमेरिका में लोग राष्ट्रपति पद के लिए वोट डालेंगे. इसके आधार पर इस चुनाव में खड़े प्रत्याशियों की स्थिति तय होगी. हालांकि ये चुनाव प्रक्रिया अभी करीब तीन महीने तक चलती रहेगी. इस प्रक्रिया में क्या कैसे होगा. ये हम आपको बताते हैं.

    अमेरिका में लंबे समय से राष्ट्रपति पद के लिए चुनाव दो मुख्य राजनीतिक पार्टियों के बीच होता है. ये दो पार्टियां हैं डेमोक्रेटिक पार्टी और रिपब्लिकन पार्टी. डेमोक्रेट्स का चुनाव चिह्न गधा है और रिपब्लिकन का हाथी. पिछली बार डेमोक्रेट्स की राष्ट्रपति पद की उम्मीदवार हिलरी क्लिंटन थीं जो राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से हार गई थीं. इस बार डेमोक्रेटिक उम्मीदवार जो बाइडन हैं, जो पहले अमेरिका के उप राष्ट्रपति भी रह चुके हैं.

    सवाल - डेमोक्रेटिक पार्टी की विचारधारा क्या है?
    - डेमोक्रेटिक पार्टी आधुनिक उदारवाद का समर्थन करती है. यह शासन के हस्तक्षेप, सार्वभौमिक स्वास्थ्य देखभाल, सस्ती शिक्षा, सामाजिक कार्यक्रमों, पर्यावरण संरक्षण नीतियों और श्रमिकों संघों में विश्वास करती है.
    सवाल - रिपब्लिकन किस सोच पर चलती है?


    - रिपब्लिकन पार्टी एक तरह से अमेरिकी राष्ट्रवाद को बढ़ावा देती है, जैसे सरकार के दायरे को सीमित करना, कम करों और मुक्त बाजार पूंजीवाद को, हथियार रखने के अधिकार, श्रमिक संघों के अविनियमन को बढ़ावा देना और आव्रजन तथा गर्भपात जैसे मामलों में प्रतिबंध लगाना शामिल है.

    सवाल - क्या अमेरिका के चुनाव में अन्य पार्टियां भी हिस्सा लेती हैं ?
    - हां, अमेरिकी चुना्व में अन्य पार्टियां भी हिस्सा लेती हैं, जिसमें लिब्रेटेरियन, ग्रीन और स्वतंत्र पार्टियां शामिल हैं. एक जमाने में मौजूदा अमेरिका राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप भी अपनी एक पार्टी बनाकर चुनाव लड़ चुके हैं. ये सभी पार्टियां अपने उम्मीदवार खड़ा करती हैं लेकिन अभी उनका कोई बहुत ज्यादा असर नहीं दिखता. अमेरिका के लोग मुख्य तौर पर रिपब्लिकन और डेमोक्रेट्स के बीच से ही राष्ट्रपति का चुनाव करते हैं.

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    सवाल - कौन अमेरिका में राष्ट्रपति पद का चुनाव लड़ सकता है ?
    - अगर कोई 35 साल का है, अमेरिका का 'नेचुरल सिटीजन' है, या अमेरिका में कम से कम 14 साल से रह रहा है, तो वह राष्ट्रपति पद की दावेदारी पेश कर सकता है.

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    अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप रिपब्लिकन पार्टी के उम्मीदवार हैं, इस बार उनकी स्थिति को लेकर कुछ भी कहना मुश्किल है.


    सवाल - अमेरिकी चुनाव की पहली सीढ़ी को प्राइमरीज क्यों कहते हैं ?
    - प्राइमरी चुनाव अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव की पहली सीढ़ी है. इस प्रक्रिया के बारे में अमेरिकी संविधान में कोई लिखित निर्देश मौजूद नहीं है, ये प्रक्रिया पार्टी और राज्य पर निर्भर करती है.इसे पार्टियां नहीं बल्कि राज्य सरकारें आयोजित करती हैं.इन्हें अमेरिका के अलग अलग राज्य अपने कानूनों के अनुसार ही कराते हैं. वो खुद अपने कानूनों के आधार पर ही तय करते हैं कि ये प्राइमरीज के चुनाव बंद होंगे या खुले.

    बंद चुनाव में पार्टी के सदस्य ही मतदान कर सकते हैं. खुले चुनाव में वो लोग भी मतदान कर सकते हैं जो पार्टी से जुड़े नहीं हैं. वो डेलीगेट्स चुनकर भेजते हैं, जो कि कन्वेंशन में उम्‍मीदवार को नॉमिनेट करते हैं.

    सवाल - कॉकस क्या है? 
    - आयोवा जैसे कुछ राज्य प्राइमरी तरीके की जगह कॉकस का तरीका अपनाते हैं. ये चुनाव पार्टियां आयोजित करती हैं.क्योंकि ये चुनाव राज्य सरकार नहीं कराती तो इससे पार्टियों को नियम तय करने में आसानी हो जाती है. ये भी पार्टियां ही तय करती हैं कि मतदान कौन करेगा. डेमोक्रेट्स के कॉकस में मतपत्र से वोट नहीं होते. एक जगह पर पार्टी के सदस्य इकट्ठा होते हैं और उम्मीदवार के नाम पर चर्चा की जाती है. इसके बाद वहां मौजूद लोग हाथ उठाकर उम्मीदवार चुनते हैं.

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    सवाल - ये कब से कब तक होता है? 
    - चुनावी साल में अमेरिका में प्राइमरी और कॉकस चुनावों की प्रक्रिया फरवरी से शुरू होगी और जून तक चलेगी.

    सवाल - इसके बाद क्या होता है ?
    - इसके बाद डेमोक्रेटिक और रिपब्लिक पार्टी अपने कन्वेंशन आयोजित करके आधिकारिक तौर पर राष्ट्रपति और उप राष्ट्रपति पद के लिए उम्मीदवार की घोषणा करती हैं. डेमोक्रेटिक पार्टी का राष्ट्रीय कन्वेंशन इस बार 13 से 16 जुलाई के बीच हुआ जबकि रिपब्लिकन पार्टी का राष्ट्रीय कन्वेंशन 24 से 27 अगस्त के बीच.

    सवाल - इसके बाद दोनों पार्टियों के आधिकारिक प्रत्याशियों के बीच कितनी डिबेट होती हैं ?
    - इसके बाद राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और उप-राष्ट्रपति माइक पेंस अपने डेमोक्रेटिक प्रतिद्वंद्वियों के साथ चार डिबेट में हिस्सा लेंगे. इसमें एक डिबेट हो चुकी है.

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    डेमोक्रेटिक पार्टी के उम्मीदवार जो बाइडन के बारे में कहा जा रहा है कि अमेरिकी चुनावों में उन्हें कहीं ज्यादा फंड मिल रहा है, इससे उनके चुनाव प्रचार का काम आसान हो रहा है


    सवाल - क्या चुनाव में मुख्य वोटिंग के पहले चुनाव प्रचार भी होता है ?
    - हां, प्राइमरी और कन्वेंसन के बाद अमेरिका में जबरदस्त चुनाव प्रचार देखने को मिलता है. इसके जरिए मतदाताओं के बीच समर्थन जुटाया जाता है. उम्मीदवारों के बीच टेलीविजन पर कई मुद्दों को लेकर बहस होती है. आखिरी हफ्ते में उम्मीदवार अपनी पूरी ताकत लगा कर ‘स्विंग स्टेट्स’ को लुभाने में झोंक देते हैं. 'स्विंग स्टेट्स' वह राज्य होते हैं जहां का मतदाता किसी के भी पक्ष में मतदान कर सकता है.

    सवाल - क्या अमेरिकी चुनाव में हर वोटर सीधे वोट करता है ?
    - अमेरिका में वोटिंग प्रक्रिया कुछ अलग तरह से है. पहले राज्यों के मतदाता इलेक्टर का चुनाव करते हैं. ये इलेक्टर राष्ट्रपति पद के किसी न किसी उम्मीदवार का समर्थक होता है. ये इलेक्टर एक इलेक्टोरल कॉलेज बनाते हैं. इसमें कुल 538 सदस्य होते हैं. इलेक्टर चुनने के बाद ही आम जनता की चुनाव में भागीदारी खत्म हो जाती है. आखिर में इलेक्टोरल कॉलेज के सदस्य मतदान के जरिए राष्ट्रपति का चुनाव करते हैं. राष्ट्रपति बनने के लिए कम से कम 270 इलेक्टोरल मत जरूरी होते हैं.

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    सवाल - 03 नवंबर को कौन वोटिंग करेगा ?
    - आम अमेरिकी वोटर 03 नवंबर को इलेक्टर्स को चुनने के लिए वोट करेगा ना कि प्रेसीडेंट पद के उम्मीदवारों के लिए सीधे. लेकिन ये इलेक्टर्स जैसा कि पहले ही कहा जा चुका है कि डेमोरक्रेटिक पार्टी या फिर रिपब्लिकन पार्टी के समर्थक होंगे. जिस पार्टी के इलेक्टर जितनी बड़ी संख्या में जीतेंगे, उसी के आधार पर करीब करीब तय हो जाएगा कि हवा किस प्रत्याशी की ओर बहेगी. ये जो इलेक्टर्स होते हैं वो पार्टी के सीनियर नेता होते हैं लेकिन उनका नाम बैलेट पर नहीं होता.

    सवाल - इसके बाद इलेक्टर्स क्या करते हैं ? 
    - ये भी ऊपर बताया जा चुका है लेकिन दोबारा इसे स्पष्ट कर देना चाहिए कि इलेक्टर्स राष्ट्रपति पद के लिए खड़े प्रत्याशियों में किसी एक को वोट देंगे. हर राज्य में इन वोटों की गिनती के बाद ये तय हो जाएगा कि कौन अमेरिका का नया राष्ट्रपति और उपराष्ट्रपति बन रहा है. वो 20 जनवरी 2021 को पद की शपथ लेगा.

    अमेरिका से ही मिलते-जुलते चुनाव ऑस्ट्रेलिया और इजरायल में भी होते हैं जिनमें कई उम्मीदवारों में से एक उम्मीदवार चुना जाता है.

    सवाल - जीत के लिए कितने वोट चाहिए, राज्यों और इलैक्टोरल वोटों का क्या अनुपात होता है ?
    - व्हाइट हाउस में पहुंचने के लिए 538 में से 270 वोट की ज़रूरत होती है. इससे कुछ राज्य उम्मीदवारों के लिए काफ़ी महत्वपूर्ण हो जाते हैं. सबसे ज़्यादा आबादी वाले राज्यों से ज़्यादा संख्या में इलेक्टोरल वोट्स आते हैं.

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    सवाल - स्विंग, रेड और ब्लू राज्य क्या हैं? 
    - रिपब्लिकन पार्टी के प्रभाव वाले दक्षिणी राज्यों को रेड स्टेट्स कहा जाता है. डेमोक्रेट्स के प्रभाव वाले राज्यों को ब्लू स्टेट्स कहा जाता है. कुछ राज्यों में स्थिति हमेशा अनिश्चितता रहती है कि वो किधर की ओर जाएंगे. उन्हें स्विंग स्टेट कहा जाता है.

    सवाल - अगर किसी उम्मीदवार को चुनावों में बहुमत नहीं मिलता तो फिर क्या होता है ?
    - अगर किसी भी उम्मीदवार को इलेक्टोरल वोट में बहुमत नहीं मिलता तो संसद का निचला सदन (हाउस ऑफ़ रिप्रेज़ेन्टेटिव्स) शीर्ष तीन उम्मीदवारों में से राष्ट्रपति का चुनाव करता है. बचे हुए दो उम्मीदवारों में से सीनेट उप-राष्ट्रपति को चुनती है. ऐसी स्थितियां बहुत कम बनती हैं लेकिन साल 1824 में ऐसा हो चुका है.
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