तेजस नहीं, ये था पहला देसी फाइटर जेट जिसने छुड़ाए थे पाक के छक्के

भारत का लड़ाकू विमान HF-24 मारूत. (तस्वीर विकिमीडिया कॉमन्स से साभार)
भारत का लड़ाकू विमान HF-24 मारूत. (तस्वीर विकिमीडिया कॉमन्स से साभार)

एक तरफ, राफेल (Rafale Jets) का आना, दूसरी तरफ, रक्षा क्षेत्र (Defense of India) में भारत के 'आत्मनिर्भर' होने की चर्चा तो भारत और चीन के बीच सीमा पर तनाव (India-China Border Tension). ऐसे में जानिए लड़ाकू विमानों के क्षेत्र में भारत पहली बार कैसे बना था आत्मनिर्भर.

  • News18India
  • Last Updated: October 25, 2020, 4:44 PM IST
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रक्षा क्षेत्र (Defense Sector) में आत्मनिर्भर भारत (Atmanirbhar India) को लेकर सुर्खियां भले ही अब हों, लेकिन करीब 60 साल पहले से ही न सिर्फ इस पहलू को समझा गया था, बल्कि इस दिशा में पुख्ता कदम उठाए गए थे. जी हां, पहले प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू (Jawahar Lal Nehru) ने जर्मनी के विशेषज्ञों की मदद से भारत का पहला देसी लड़ाकू विमान (First Indian Fighter jet) बनवाया था, जिसकी पूरी रिसर्च और निर्माण के लिए डेवलपमेंट भारत में ही हुआ था. लोगों के बीच गलतफहमी यह भी रही कि भारत का पहला देसी लड़ाकू विमान तेजस (Fighter Jet Tejas) रहा, लेकिन ऐसा नहीं है.

जर्मन इंजीनियर कुर्त टैंक से डिज़ाइन करवाए गए फाइटर जेट HF-24 मारूत के बारे में शायद आपने पहले कहीं सुना हो. बेशक, यही भारत का पहला देसी ​फाइटर था और उस समय हिंदुस्तान एयरक्राफ्ट लिमिटेड के लिए बहुत बड़ी उपलब्धि भी. 1 अप्रैल 1967 को भारतीय वायु सेना को मिले मारूत के बहाने भारत के देसी फाइटर जेट डेवलपमेंट की कहानी काफी दिलचस्प है.

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क्या थीं मारूत की खूबियां?
देश के लिए वाकई बहुत अहम उपलब्धि के रूप में डेवलप हुआ मारूत अपने डिज़ाइन में बेहद सक्षम और कारगर था. पेंसिल जैसा स्लिम, आकर्षक, स्वेप्ट विंग और टेल का फ्यूज़लेज के साथ जुड़ा होना इसे खास बनाता था. हवा से ज़मीन पर मार कर सकने वाला यह फाइटर जेट सेल्फ डिफेंस के लिहाज़ से भी बेहद कारगर था. अब मारूत की लड़ाइयों के बारे में भी जानिए.

बहुत ज़्यादा तो युद्ध में मारूत ने हिस्सा नहीं लिया, लेकिन इस मायने में इसका प्रदर्शन लाजवाब रहा कि एक भी मारूत जेट को कभी भी दुश्मन मारकर गिरा नहीं सका. ये भी कि मारूत ने पाकिस्तान के काफी एडवांस्ड लड़ाकों पर हमला भी किया था. दिसंबर 6 मिशन के तहत मारूत ने पाकिस्तान के दो लड़ाकों को ध्वस्त कर दिया था, यह मारूत की पहली बड़ी जीत थी.

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भारतीय वायुसेना में शामिल हुआ राफेल. (File Photo)


मारूत ने समुद्र तल से 1112 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार और हाई अल्टिट्यूड पर 1086 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार का प्रदर्शन कर खासा नाम कमाया था. यही नहीं, बेहद नियंत्रित लैंडिंग और कम अल्टिट्यूड पर स्थिरता को लेकर भी यह बेमिसाल माना गया था.

कैसे खत्म हुई मारूत की कहानी?
कुल 147 मारूत बनाए गए थे, लेकिन 1980 के दशक में इन्हें रिटायर कर दिया गया था क्योंकि पायलटों की मौतों की घटनाओं के बाद माना गया था कि यह इंटरसेप्टर का रोल अदा नहीं कर पा रहा था. दूसरी वजह यह भी थी कि उपयुक्त पावर प्लांट न होने के चलते मारूत सुपरसोनिक जेट की भूमिका अदा नहीं कर पाया था. इन खामियों के बावजूद मारूत ने 1971 के भारत पाक युद्ध में अपने आप को सशक्त लड़ाका साबित किया था.



देसी लड़ाकू विमानों की कहानी में तेजस
डीआरडीओ और हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड यानी HAL ने सालों की मेहनत के बाद एक और नामवर देसी फाइटर जेट तेजस डेवलप किया था. तेजस की कहानी काफी सुनी और कही गई और एक समय में यह वायु सेना की रीढ़ की हड्डी तक कहा गया. एंटी शिप हमलों की बात रही हो या टोह लेने वाली तकनीक की, तेजस ने अपनी अहमियत कई मोर्चों पर साबित की.

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और ये है अपडेट
देश की प्रमुख संस्थाएं HAL और डीआडीओ कई तरह के एंडवांस्ड विमानों के डेवलपमेंट में जुटी हुई हैं. एक तरफ BVR तकनीक की मिसाइलों का निर्माण हो रहा है, तो दूसरी तरफ, वायु सेना के लिए जेट्स और कई तरह के हथियार भी बनाए जा रहे हैं. पांचवी जनरेशन के लड़ाकों के डेवलपमेंट कार्यक्रम के तहत एडवांस्ड मीडियम कॉम्बैट एयरक्राफ्ट पर भी काम जारी है. हो सकता है कि ये बेहद एडवांस्ड विमान 2023-24 तक उड़ान भर सकें.

गौरतलब है कि फ्रांस से राफेल विमानों की खेप आने के बाद से माना जा रहा है कि भारतीय वायु सेना की ताकत बढ़ रही है. दूसरी तरफ, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और केंद्र सरकार यह घोषित भी कर चुकी है कि भारतीय सेना को आत्मनिर्भर बनाए जाने के लिए एक क्रमबद्ध योजना बनाई गई है और रक्षा क्षेत्र में देसी स्तर पर निर्माण व डेवलपमेंट के काम युद्धस्तर पर होने वाले हैं.
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