सबसे बड़ी डिफेंस हड़ताल करने वाली हथियार फैक्ट्रियों की कुंडली

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Updated: August 28, 2019, 2:15 PM IST
सबसे बड़ी डिफेंस हड़ताल करने वाली हथियार फैक्ट्रियों की कुंडली
हज़ारों करोड़ का है आयुध फैक्ट्रियों का सालाना कारोबार.

देश की कुल 41 ऑर्डनैन्स फैक्ट्रियों (Ordnance Factories) का कुल कारोबार कितना है? ये भी जानें कि यहां बनने वाले हथियार, गोला बारूद और उपकरण (Arms & Ammunition) खरीदता कौन है और इन फैक्ट्रियों का लंबा इतिहास क्या रहा है.

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  • Last Updated: August 28, 2019, 2:15 PM IST
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आयुध निर्माणी बोर्ड (Ordnance Factory Board) यानी ऑर्डनैन्स फैक्टरी बोर्ड (OFB) के ​कर्मचारी हज़ारों की तादाद में बीते 20 अगस्त को एक महीने की हड़ताल (Strike) पर चले गए थे. रक्षा मंत्रालय (Ministry of Defense) के आश्वासन के बाद 26 अगस्त को टाल दी गई ये हड़ताल महीने भर न सही, कुछ ही दिन को हुई लेकिन दुनिया की सबसे बड़ी डिफेंस हड़ताल मानी गई. इसमें देश की 41 हथियार फैक्ट्रियों की ट्रेड यूनियनों (Trade Unions) ने सम्मिलित रूप से सरकार की नीतियों का विरोध किया. हड़ताल के कारणों के साथ ही देश की इन आयुध निर्माणी इकाइयों के बारे में भी जानें कि इनका क्या इतिहास (History of Arms) रहा है और इस समय क्या और कितना बड़ा कारोबार है.

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ये थी हड़ताल की वजह
अब तक सरकारी सेक्टर में आने वाली देश की कुल 41 हथियार फैक्ट्रियों के कारपोरेटीकरण (Corporate Sector) को लेकर सरकार नीतियों पर विचार कर रही थी और इसी तरह की नीतियों (Central Policy) से कर्मचारी सहमत नहीं थे. ट्रेड यूनियनों का कहना रहा कि इस फैसले से जहां उनके वेतन (Pay Scale) में भारी कमी आएगी, पेंशन की सुविधा खत्म होगी, वहीं बड़ी संख्या में रोज़गार जाने का खतरा भी होगा.

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ट्रेड यूनियनों के साथ केंद्र सरकार की तरफ से डिफेंस उत्पादन सचिव अजय कुमार ने कई राउंड की बातचीत कर आश्वासन दिया कि ऐसा फैसला सरकार ने अब तक नहीं किया है और कर्मचारियों की मांगों पर गंभीरता से विचार किया जाएगा. इस आश्वासन के बाद फिलहाल सबसे बड़ी डिफेंस हड़ताल टाल दी गई, जिसमें एक रिपोर्ट के मुताबिक करीब 80 हज़ार कर्मचारी शामिल थे.

कितना बड़ा है ऑर्डनैन्स फैक्ट्रियों का कारोबार?
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कारगिल युद्ध के पहले ऑर्डनैन्स फैक्ट्रियां 700 से 800 करोड़ रुपये सालाना का कारोबार कर रही थीं यानी इस कीमत के हथियारों व गोला बारूद का उत्पादन हो रहा था. कारगिल युद्ध के फौरन बाद ये उत्पादन 2200 करोड़ रुपये सालाना तक पहुंचा और रक्षा मंत्रालय के अनुसार इस समय 14 से 15 हज़ार करोड़ रुपये तक इन ऑर्डनैन्स फैक्ट्रियों का सालाना कारोबार है. सरकार ने दलील दी थी कि इनके कारपोरेटीकरण से 204-25 तक ये कारोबार 30 से 35 हज़ार करोड़ तक का हो सकता है.

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20 अगस्त से ओएफबी के हज़ारों कर्मचारी हड़ताल पर गए थे, लेकिन हड़ताल स्थगित होने के बाद बीते सोमवार से कर्मचारी काम पर लौटे.


लेकिन, ट्रेड यूनियनों का कहना है कि सालाना टर्नओवर उनके हाथ में होता ही नहीं है क्योंकि सब कुछ मांग पर निर्भर करता है. सेना अगर ज़्यादा ऑर्डर देगी ही नहीं तो उत्पादन ज़्यादा होगा कैसे? यूनियनों के मुताबिक अगर सेना का बजट बढ़ेगा तो अपने आप ये उत्पादन भी बढ़ेगा.

क्या है ऑर्डनैन्स फैक्ट्रियों का इतिहास और सफर?
अंग्रेज़ों ने अपनी सेना और अर्थव्यवस्था को मज़बूत करने के लिहाज़ से भारत में हथियारों के उत्पादन के कारखाने शुरू करवाए थे. 1775 के आसपास कोलकाता में पहली बार आर्मी ऑर्डनैन्स की शुरूआत हुई थी. इसके बाद धीरे धीरे ये उत्पादन बढ़ा और 1947 में आज़ादी मिलने तक भारत में कुल 18 ऑर्डनैन्स फैक्ट्रियां थीं. आज़ादी के 70 साल बाद देश में कुल 41 आयुध निर्माणी फैक्ट्रियां हैं, जिनमें से महाराष्ट्र में 10, उत्तर प्रदेश में 9 और मध्य प्रदेश व तमिनाडु में 6-6 फैक्ट्रियां हैं.

कौन हैं इन ऑर्डनैन्स फैक्ट्रियों के खरीदार?
भारतीय सेना प्रमुख रूप से हथियारों की खरीदार रही है और इन फैक्ट्रियों का उद्देश्य भी यही रहा था. समय के साथ साथ इन फैक्ट्रियों के उत्पादन ने और भी खरीदार जुटाए जिनमें राज्यों की पुलिस और बॉर्डर आर्मी के अलावा दूसरे सशस्त्र बलों के लिए बंदूकों, गोला बारूद, सुरक्षा यंत्रों और उपकरणों आदि का उत्पादन किया जाता है. हथियारों के साथ ही कैमिकल्स, विस्फोटक और पैराशूट व लेदर जैसे आइटम ये फैक्ट्रियां जर्मनी, मलेशिया, श्रीलंका, थाईलैंड, अमेरिका, इज़रायल, बेल्जियम जैसे करीब 30 देशों में एक्सपोर्ट भी करती हैं.

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First published: August 28, 2019, 2:15 PM IST
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