जादूगर तो नहीं बने, लेकिन क्या कांग्रेस के लिए 'जादू की छड़ी' बनेंगे गहलोत?

गांधी परिवार के करीबी और विश्वासपात्र रहे राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के बारे में कहा जा रहा है कि अब कांग्रेस पार्टी की कमान उन्हें मिल सकती है. जानें क्या रही हैं गहलोत की उपलब्धियां और क्यों हैं वो इतने खास.

News18Hindi
Updated: June 24, 2019, 12:58 PM IST
जादूगर तो नहीं बने, लेकिन क्या कांग्रेस के लिए 'जादू की छड़ी' बनेंगे गहलोत?
अशोक गहलोत
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Updated: June 24, 2019, 12:58 PM IST
कांग्रेस पार्टी में पुराने, कद्दावर और स्थापित नेताओं की सूची में अशोक गहलोत का नाम शामिल है. राहुल गांधी कांग्रेस अध्यक्ष पद से इस्तीफा देने को लेकर अड़ चुके हैं. ऐसे में खबरें कह रही हैं कि अशोक गहलोत कांग्रेस अध्यक्ष के पद पर आसीन हो सकते हैं. अगर ऐसा होता है, तो इसमें हैरत की कोई बात नहीं होगी क्योंकि गहलोत गांधी परिवार के करीबी, खास और बेहद वफादार नेता रहे हैं. राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के बारे में कुछ ऐसी बातें जानिए, जो आपने नहीं सुनीं या जिन्हें आप याद करना चाहेंगे.

कांग्रेस पार्टी की बात रही हो या राज्य और केंद्र में कांग्रेस सरकार की, अशोक गहलोत को हमेशा तवज्जो मिलती रही है. इसकी वजह उनका गांधी परिवार से पुराना और गहरा नाता है. इंदिरा गांधी की सरकार में युवा गहलोत पर्यटन और नागरिक उड्डयन मंत्रालयों में उप मंत्री बनाए गए थे और उसके बाद खेल मंत्रालय में भी उप मंत्री रहे. इसके बाद गहलोत राजीव गांधी और पीवी न​रसिम्हा राव की सरकार में भी मंत्रिमंडल में शामिल रहे.

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ज़मीन से जुड़े नेता रहे गहलोत
छात्र जीवन से ही राजनीति में उतर चुके गहलोत ने पार्टी के लिए ज़मीनी स्तर पर काम किया. उन्होंने संगठन की मज़बूती के लिए कई ज़िम्मेदारियां निभाईं. राजस्थान एनएसयूआई के प्रमुख रह चुके गहलोत पहली बार 1980 में जोधपुर संसदीय क्षेत्र से सांसद चुने गए थे और तब उन्हें इंदिरा मंत्रिमंडल में जगह मिली थी. गहलोत चार बार सांसद रह चुके हैं और तीन बार राजस्थान के सीएम बन चुके हैं.

गहलोत के बारे में कहा जाता है कि वो चाय के इतने शौकीन हैं कि सीएम रहते हुए भी कभी कभार सड़क किनारे चाय पी लेते हैं. अपनी कार में बिस्किट का पैकेट रखते हैं. इसके अलावा ये भी कि वो हाई प्रोफाइल अफसरों की बजाय लो प्रोफाइल अफसरों को अपनी टीम में रखना पसंद करते हैं. लोगों के पास जाकर मिलने जुलने में उनका विश्वास है.
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एक कार्यक्रम में खुद चाय लेते अशोक गहलोत (फाइल फोटो)


नेता नहीं होते तो जादूगर होते
खुद गहलोत कुछ मौकों पर कह चुके हैं कि अगर वो राजनीति में नहीं आए होते, तो प्रोफेशनल जादूगर होते. इस बात के पीछे एक पूरी कहानी रही है. गहलोत के पिता लक्ष्मण सिंह गहलोत एक पेशेवर जादूगर थे. गहलोत ने अपने पिता से ही जादू की पेशेवराना ट्रेनिंग ली थी और वह हाथ की सफाई में माहिर हैं. लेकिन राजनीति में एंट्री करने के बाद उन्होंने जादूगरी को बतौर पेशा नहीं अपनाया. हालांकि राजनीति में पूरी तरह सक्रिय होने से पहले के दौर में वो कुछ कार्यक्रमों में जादू कला का प्रदर्शन कर चुके थे.

कांग्रेस के चहेते रहे गहलोत
गांधी परिवार से करीबी वजह रही हो या अशोक गहलोत की प्रतिभा, उन्हें हमेशा पार्टी ने ट्रंप कार्ड की तरह इस्तेमाल करने की रणनीति अपनाई. गुजरात में चुनाव की कमान गहलोत को सौंपा जाना इसका सबूत था. भाजपा के गढ़ कहे जाने वाले गुजरात में विधानसभा चुनावों के दौरान गहलोत को कमान सौंपी गई. हालांकि कांग्रेस जीत दर्ज नहीं कर सकी लेकिन कांग्रेस ने बेहतर मुकाबला किया.

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इसी तरह गहलोत को कर्नाटक में विधानसभा चुनाव के लिए रणनीति के लिहाज़ से पार्टी ने कमान सौंपी थी. चुनावों के दौरान संगठन में रणनीति के लिहाज़ से गहलोत को अहम ज़िम्मेदारियां दी जाती रही हैं, जिससे गहलोत पर पार्टी का भरोसा ज़ाहिर होता है.

क्या जादू की छड़ी बनेंगे गहलोत?
फिलहाल देश भर के राजनीतिक माहौल को देखा जाए तो कांग्रेस अपने सबसे खराब दौर से गुज़र रही है. हालिया लोकसभा चुनावों के बाद पार्टी में नेतृत्व का संकट साफ ज़ाहिर हुआ है. लोकसभा चुनाव में बमुश्किल 52 सीटें हासिल कर सकी कांग्रेस पार्टी की स्थिति राज्यों में भी अच्छी कहे जाने लायक नहीं है. मध्य प्रदेश और राजस्थान, दो बड़े राज्यों में कांग्रेस की सरकारें हैं ज़रूर, लेकिन विधायकों की संख्या के लिहाज़ से कांग्रेस का पलड़ा बहुत भारी नहीं है. पंजाब और छत्तीसगढ़ में कांग्रेस सरकारें वर्तमान कार्यकाल तक स्थिर कही जा सकती हैं.

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वापसी की कोशिश में जुटी कांग्रेस
गुजरात, उत्तर प्रदेश, बिहार, महाराष्ट्र जैसे बड़े राज्यों में कांग्रेस का सूपड़ा साफ हो चुका है. ज़्यादातर छोटे राज्यों में भी कांग्रेस का दखल न के बराबर हो चुका है. ऐसे दौर में राहुल गांधी ने साफ कह दिया है कि पार्टी अध्यक्ष के पद पर गांधी परिवार के कब्ज़े का सिलसिला खत्म होना चाहिए. राहुल के इस बयान के बाद कांग्रेस में नेतृत्व और स्थापित चेहरों का संकट भी किसी से छुपा नहीं. ऐसे हालात में पार्टी अध्यक्ष पद के लिए गहलोत का नाम सामने आ रहा है. क्या कांग्रेस के लिए गहलोत जादू की छड़ी साबित होंगे? इस सवाल का जवाब तो समय देगा लेकिन पार्टी की उम्मीद तो यही होगी.

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First published: June 24, 2019, 12:40 PM IST
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