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जानिए कैसे 'सरदार पटेल' ने सोमनाथ मंदिर का कराया था निर्माण

News18Hindi
Updated: November 11, 2019, 2:51 PM IST
जानिए कैसे 'सरदार पटेल' ने सोमनाथ मंदिर का कराया था निर्माण
सोमनाथ मंदिर का पुनर्निर्माण देश के पहले गृह मंत्री सरदार वल्लभ भाई पटेल ने करवाया था.

सोमनाथ मंदिर Somnath temple) का पुनर्निर्माण स्वतंत्रता के बाद लौहपुरुष सरदार वल्लभ भाई पटेल ने 1951 में करवाया और पहली दिसंबर 1995 को भारत के राष्ट्रपति शंकर दयाल शर्मा ने इसे राष्ट्र को समर्पित किया था.

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सोमनाथ मंदिर (Somnath temple) का पुनर्निर्माण (reconstruction) स्वतंत्र भारत की एक प्रमुख परियोजना रही है. सोमनाथ जी के मंदिर की व्यवस्था और संचालन का कार्य सोमनाथ ट्रस्ट के अधीन किया जाता है. यह मंदिर गुजरात पर्यटन का एक विश्वविख्यात केंद्र है. सोमनाथ मंदिर के प्रांगड़ में रात साढ़े सात से साढ़े आठ बजे तक एक घंटे का साउंड एंड लाइट शो चलता है. इस शो में सोमनाथ मंदिर के इतिहास का सचित्र वर्णन किया जाता है. सोमनाथ मंदिर को इतिहास में कई बार तोड़ा तथा पुनर्निर्मित किया गया है.

वर्तमान मंदिर का पुनर्निर्माण स्वतंत्रता के बाद लौहपुरुष सरदार वल्लभ भाई पटेल ने 1951 में करवाया और पहली दिसंबर 1995 को भारत के राष्ट्रपति शंकर दयाल शर्मा ने इसे राष्ट्र को समर्पित किया था. बता दें कि जूनागढ़ रियासत को भारत का हिस्सा बनाने के बाद तत्कालीन भारत के गृहमंत्री सरदार पटेल ने जुलाई 1947 में सोमनाथ मंदिर के पुनर्निर्माण का आदेश दिया था.

1869 में पुनर्निमाण से पहले का सोमनाथ मंदिर.


गांधी जी के सुझाव पर जनता से धन एकत्रित करके बना मंदिर

सोमनाथ मंदिर के पुनर्निर्माण का प्रस्ताव लेकर सरदार पटेल महात्मा गांधी के पास गए थे. गांधी जी ने प्रस्ताव पर न केवल अपना आशीर्वाद दिया, बल्कि जनता से धन एकत्रित कर मंदिर निर्माण का सुझाव दिया था. बाद में सरदार पटेल की मृत्यु के बाद मंदिर पुनर्निर्माण का कार्य के एम मुंशी के निर्देशन में पूरा किया गया. मुंशी उस समय भारत सरकार के खाद्य और नागरिक आपूर्ति मंत्री थे.

सोमनाथ मंदिर का पुनर्निर्माण, स्वतंत्र भारत की सबसे प्रतिष्ठित और सम्मानित परियोजना के रूप में जाना जाता है. जिसे सोमनाथ महा मेरू प्रसाद के नाम से जाना जाता है, के काम को पारंपरिक भारतीय नागर शैली के मंदिरों के डिजाइन बनाने में महारत हासिल सोमपुरा परिवार ने ही अंजाम दिया था.

गांधी जी ने जनता से धन एकत्रित कर मंदिर निर्माण का सुझाव दिया था
सोमनाथ मंदिर के आर्किटेक्ट पद्म श्री प्रभाशंकर सोमपुरा थे. उत्तर भारत में सोमपुरा परिवार नागर शैली के मंदिरों के निर्माण और डिजाइन से पिछले चार पीढ़ियों से जुडा हुआ है. अयोध्या राम मंदिर मॉडल का भी निर्माण इन्हीं के पोते चंद्रकांत भाई सोमपुरा ने ही किया है.

सोमनाथ मंदिर शिव के बारह ज्योतिर्लिंग में पहला
गौरतलब है कि गुजरात के सौराष्ट्र में पश्चिमी समुद्र तटीय प्रभास पाटन में विश्व विख्यात सोमनाथ मंदिर स्थित है. हिंदू धर्म की मान्यताओं के अनुसार इस मंदिर को शिव के बारह ज्योतिर्लिंग मंदिरों में से पहला माना जाता है. सोमनाथ मंदिर को विदेशी आक्रांताओं द्वारा कई बार छति पहुंचाया गया और हर बार इसका पुनर्निमाण किया गया.

वर्तमान सोमनाथ मंदिर का निर्माण गुजरात की चालुक्य वास्तुकला शैली में 1951 में किया गया है. दरअसल चालुक्य वास्तुकला शैली उत्तर भारत की मंदिर निर्माण नागर शैली का ही एक प्रकार है. प्राचीन एतिहासिक तख्तियों के अनुसार सोमनाथ में पहले शिव मंदिर के स्थान के बारे में अब जानकारी नहीं है.

सोमनाथ मंदिर को शिव के बारह ज्योतिर्लिंग मंदिरों में से पहला माना जाता है.


सोमनाथ शिव मंदिर के निर्माण का इतिहास
सोमनाथ में दूसरा शिव मंदिर वल्लभी के यादव राजाओं के द्वारा 649 ई. वी. में बनाया गया था. जिसे 725 ई. वी. में सिंध के गवर्नर अल- जुनैद द्वारा नष्ट कर दिया गया था. बाद में गुर्जर प्रतिहार वंश के राजा नागभट्ट द्वितीय द्वारा 815 ई. वी. में तीसरी बार शिव मंदिर का निर्माण किया गया. इस मंदिर का निर्माण लाल बलुआ पत्थरों के द्वारा किया गया था. नागभट्ट द्वारा सौराष्ट्र में सोमनाथ मंदिर के दर्शन का ऐतिहासिक प्रमाण भी मिलता है.

बाद में चालुक्य राजा मुलराज द्वारा 997 में इस मंदिर का जीर्णोद्धार कराया गया. 1024 ई. वी. में सोमनाथ मंदिर को तुर्क शासक महमूद गजनवी ने तोड़ दिया. महमूद ने मंदिर से करीब 20 मिलियन दीनार लूट कर ज्योतिर्लिंग को तोड़ दिया था. इसके साथ ही करीब 50000 हजार लोगों की मंदिर की रक्षा करने के दौरान हत्या कर दी गई थी.

50000 हजार लोगों की मंदिर की रक्षा करने के दौरान हत्या कर दी गई थी.


महमूद के हमले के बाद कुमारपाल ने कराया पुनर्निर्माण
महमूद के हमले के बाद राजा कुमारपाल ने 1169 ई. वी. में उत्कृष्ट पत्थरों द्वारा इस मंदिर का पुनर्निर्माण किया गया था. जिसे अलाउद्दीन खिलजी ने गुजरात विजय के दौरान 1299 ई. वी. में नष्ट कर दिया था. इस मंदिर का पुनर्निर्माण सौराष्ट्र के राजा महीपाल द्वारा 1308 ई. वी. में किया गया था. 1395 में इस मंदिर को एक बार फिर गुजरात के गवर्नर जफर खान द्वार नष्ट कर दिया गया. साथ ही गुजरात के शासक महमूद बेगड़ा द्वारा इसे अपवित्र भी किया गया.

सोमनाथ मंदिर को अंतिम बार 1665 ई.वी. में मुगल सम्राट औरंगजेब द्वारा इस तरह नष्ट कर दिया गया कि इसे फिर से पुनर्निर्माण नहीं किया जा सके. बाद में सोमनाथ मंदिर के स्थान पर 1706 में एक मस्जिद बना दी गई थी. 1950 में मंदिर पुनर्निर्माण के दौरान इस मस्जिद को यहां से हटा दिया गया था.

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First published: November 11, 2019, 2:43 PM IST
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