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जानिए, Corona के मरीजों के इलाज के समय कौन सा खास सूट पहनते हैं डॉक्टर

Vikas Sharma | News18Hindi
Updated: March 29, 2020, 5:41 PM IST
जानिए, Corona के मरीजों के इलाज के समय कौन सा खास सूट पहनते हैं डॉक्टर
कोरोना वायरस केमरीजों को देखते समय डॉक्टर्स को खास तरह का सूट पहनना पड़ता है.

दुनिया में कोरोना वायरस (Corona Virus) तेजी से फैल रहा है. ऐसे में डॉक्टरों की मरीजों का इलाज करते समय अपने बचाव के लिए खास सूट पहनना पड़ता है.

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  • Last Updated: March 29, 2020, 5:41 PM IST
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नई दिल्ली: कोरोना वायरस (Corona Virus) का प्रकोप दुनिया में तेजी से बढ़ रहा है. अब तक दुनिया में साढ़े छह लाख लोग से ज्यादा इससे संक्रमित हो चुके हैं और और 30 हजार से ज्यादा की मौत हो चुकी है.  ऐसे में दुनिया के कई देशों के अस्पतालों पर भारी दबाव है तो वहीं डॉक्टरों के पास भी मरीजों का इलाज करने के साथ-साथ खुद को बचाने की कठिन चुनौती है. ऐसा करने के लिए डॉक्टर और उनके साथी खुद को कैसे बचाते हैं यह एक कम चुनौती नहीं है जिसके लिए वे खास तरह का सूट पहन कर काम कर रहे हैं.

डॉक्टरों और उनके सहयोगियों को खास जरूरत
डॉक्टरों के सामने जब संक्रमण वाले मरीज आते हैं तो उन्हें इस बात का खास ध्यान रखना पड़ता है कि वे खुद संक्रमित न हो जाएं. यह तब और चुनौतीपूर्ण होता है जब संक्रमण जानलेवा हो और कोरोना वायरस की तरह लाइलाज हो. ऐसे में उन्हें एक खास तरह का प्रोटेक्टिव बॉडी सूट (protective body suits) पहनना पड़ता है जिससे उन्हें संक्रमण की कोई संभावना न हो.

कोरोना मरीज के इलाज के समय डॉक्टरों को खुद कोसंक्रमित होने से बचाने का भी ध्यान रखना पड़ता है.
कोरोना मरीज के इलाज के समय डॉक्टरों को खुद कोसंक्रमित होने से बचाने का भी ध्यान रखना पड़ता है.




क्या होता है यह सूट


प्रोटेक्टिव बॉडी सूट (protective body suits) एक खास तरह का सूट होता है जिसे पहनने के बाद शरीर तक वायरस से छोटे कण किसी भी हालत में नहीं पहुंच सकते. इसके साथ ही इसे तैयार करते समय इस बात का ध्यान रखा जाता है कि पहनने वाले को सांसे लेने में भी कोई तकलीफ नहीं हो. इस तरह का सूट पहने देख कर आम लोगों को किसी फिल्मी सीन की याद आ जाती है. लेकिन कोरोना वायरस के प्रसार की वजह से इसकी तस्वीरें अब आम हो गई हैं.

इन नामों से भी जाना जाता है इस सूट को
इस बॉडी सूट को  हैजमैट सूट (Hazmat) कहा जाता है. इसे डिकंटैमिनेशन सूट भी कहते हैं. हैजमैट  शब्द अंग्रेजी के  दो शब्दों हजार्डस मटेरियल (Hazardous Materials) से बना है. इसमें सेल्फ कंटेंड ब्रीदिंग ऐपेरेटस भी होता है जिससे यह सुनिश्चित हो सके कि सूट पहनने वाला आसानी से सांस ले सके. इस तरह के सूट डॉक्टरों के अलावा अग्निशामक दल के सदस्य, संवेदनशील मामलों के शोधकर्ता, और जहरीले वातावरण में काम करने वाले कर्मचारी भी पहनते हैं.

किससे बचाव करता है यह सूट
यह सूट आमतौर पर चार चीजों से बचाव करता है. इनमें खतरनाक जैविक पदार्थों से (जैसे कि कोरोना वायरस), खतरनाक रसायन, (ज्वलनशील एसिड जैसे रसायन शामिल होते हैं), अणविक पदार्थों (जिसमें रेडियोएक्टिव पदार्थ और किरणें शामिल होती हैं), और आग शामिल हैं. आमतौर पर ये सूट सीमित समय के उपयोग केलिए होते हैं, भारत में भी इन सूट की जरूरत बहुत ज्यादा बढ़ी है. आमतौर पर बायो टेक लैब में इस्तेमाल किए जाने वाले इन सूटों को आयातित किया जाता था, लेकिन अब इस तरह के सूट बड़े पैमाने पर देश में ही बनाने की तैयारी सरकार ने कर ली है.

देश में कोरोना वायरस से अब तक 26 लोगों की मौत हो गई है.
देश में कोरोना वायरस से अब तक 26 लोगों की मौत हो गई है.


कैसे सूट का उपयोग हो रहा है भारत में
यूरोपीय मानकों के मुताबिक लेवल चार के ये सूट अमरीकी मानकों के लेवल सी के सूट के समकक्ष होते हैं. इनमें सांस लेने के लिए अलग से एक यंत्र होता है जो सूट के साथ उपयोग किया जा सकता है. लेकिन अभी तक भारत में सर्जिकल मास्क का ही उपयोग हो रहा है. सरकार ने इन मास्क को बड़े पैमाने पर बनवाने का आदेश भी दिया है. इसमें खास तरह के रबर के ग्लब्स और बड़े बूट होते हैं इन सूट को पहन कर काम करना सहज नहीं होता है.

फिलहाल भारत में ऐसे मामले नहीं आए हैं कि कोरोना मरीजों को देखने वाले डॉक्टरों और उनके स्टाफ को भी कोरोना संक्रमण हुआ है. देश के डॉक्टर ऐहतियात तो बरत ही रहे हैं, सरकार भी इस आपात स्थिति में पूरी तरह से उनकी मदद करने केलिए काम कर रही है.

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First published: March 29, 2020, 4:27 PM IST
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