अयोध्या मस्जिद के म्यूज़ियम, लाइब्रेरी और किचन की थीम क्या होगी?

अयोध्या मस्जिद के म्यूज़ियम, लाइब्रेरी और किचन की थीम क्या होगी?
अयोध्या मस्जिद के लिए प्रतीकात्मक तस्वीर.

अयोध्या में 'धन्नीपुर मस्जिद' (Dhannipur Masjid) के नाम से जो मस्जिद बनने जा रही है, वो बाबरी मस्जिद (Babri Masjid) के आकार के बराबर ही होगी. इस मस्जिद कॉम्प्लेक्स के निर्माण में प्रमुख ज़िम्मेदारी पाने वाले प्रतिष्ठित लेखक और इतिहासकार पुष्पेश पंत (Pushpesh Pant) ने अब बताया कि यह पूरा परिसर किस तरह से सभी के लिए रोचकता और जानकारियों से भरा होगा.

  • News18India
  • Last Updated: September 7, 2020, 6:49 AM IST
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अयोध्या में प्रस्तावित मस्जिद कॉम्प्लेक्स (Ayodhya Masjid Complex) के लिए विस्तृत योजनाओं पर काम शुरू हो चुका है. इस कॉम्प्लेक्स में मस्जिद करीब 15 हज़ार स्क्वायर फीट के क्षेत्र में बनेगी, जबकि पूरा कॉम्प्लेक्स करीब 5 एकड़ के दायरे में फैला होगा, जहां म्यूज़ियम (Museum), कम्युनिटी किचन (Community Kitchen), लाइब्रेरी (Library) भी होगी. अब दिलचस्प बात यह है कि अयोध्या में बनने वाले इस कॉम्प्लेक्स की थीम क्या होने वाली है.

News18 ने आपको हाल में प्रोफेसर एसएम अख्तर के बारे में विस्तार से बताया था, जो इस मस्जिद कॉम्प्लेक्स के लिए आर्किटेक्ट चुने गए हैं. अब हम आपको बताते हैं कि जेएनयू के रिटायर्ड प्रोफेसर पुष्पेश पंत को पूरे कॉम्प्लेक्स के क्यूरेटर के तौर पर नियुक्त किया गया है और वही थीम के ​बारे में विचार कर रहे हैं. पद्मश्री से नवाज़े जा चुके पंत के मुताबिक मस्जिद कॉम्प्लेक्स 'अवधि संस्कृति' की थीम पर तैयार होगा.

अवधि कल्चर को सिर्फ लखनऊ तक सीमित नहीं समझा जाना चाहिए बल्कि पंत के मुताबिक म्यूज़ियम और लाइब्रेरी निर्माण में फैज़ाबाद, बलरामपुर और बाराबंकी क्षेत्रों की कहानियों और इतिहास को तरजीह दी जाएगी. उत्तर प्रदेश सुन्नी सेंट्रल वक्फ बोर्ड के बनाए ट्रस्ट इंडो इस्लामिक कल्चरल फाउंडेशन ने पंत को बतौर क्यूरेटर नियुक्त किया है, जो मस्जिद कॉम्प्लेक्स के निर्माण से जुड़े रहेंगे.



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सांप्रदायिकता से ऊपर होगा ये निर्माण
पंत ने साफ तौर पर कहा है चूंकि इस मस्जिद कॉम्प्लेक्स की लाइब्रेरी, म्यूज़ियम आदि सभी धर्म, जाति और वर्गों के लोगों के लिए होगा इसलिए यहां सबके लिए कुछ न कुछ खास होगा. इससे पहले आर्किटेक्ट प्रोफेसर अख्तर भी कह चुके हैं मस्जिद और कॉम्प्लेक्स के डिज़ाइन में इंडो इस्लामिक कल्चर और साझा संस्कृति की झलक होगी. अख्तर के मुताबिक यह निर्माण न तो पुरानी शैली का होगा और न ही पुरानी तकनीक का.

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पद्मश्री से सम्मानित रिटायर्ड प्रोफेसर पुष्पेश पंत.


चप्पे चप्पे पर होंगी 'अवध' की यादें
तकरीबन 418 वर्गमीटर के दायरे में बनने के लिए प्रस्तावित म्यूज़ियम और लाइब्रेरी में 'अवध' पूरी तरह दिखेगा. पंत के मुताबिक म्यूज़ियम में इंडो इस्लामी संस्कृति के बेहतरीन निर्माणों जैसे रूमी दरवाज़ा, इमामबाड़ा, मज़ारों और मंदिरों के मॉडल्स बतौर यादगार रखे जाएंगे. लाइब्रेरी में उर्दू ​की अहम किताबों के हिंदी अनुवाद होंगे. पंत इस प्रोजेक्ट पर काम शुरू कर चुके हैं और उन्हें उम्मीद है कि अगले 2 सालों में काम पूरा हो जाएगा.

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कम्युनिटी किचन होगा बेहद खास
मस्जिद परिसर में जो कम्युनिटी किचन बनाया जाएगा, वो अवधि खानपान की किसी जीती जागती प्रदर्शनी से कम नहीं होगा. यहां अवध के मशहूर कबाब, बिरयानी के साथ ही कुछ शाकाहारी रेसिपीज़ खास तौर से होंगी. इसके अलावा, लाइब्रेरी में अवध के खानपान से जुड़े इतिहास और रोचक किस्सों का एक अलग कॉर्नर होगा. गौरतलब है कि भारत के खानपान के इतिहास पर पंत काफी अहम रिसर्च कर चुके हैं.

मुर्ग शिकस्ता हरि पसंद क्या है?
किस तरह से इस कॉम्प्लेक्स में यादगार किस्सों और दिलचस्प यादों की भरमार आपको लुभाएगी, उसका एक नमूना इस तरह है. जैसे यहां आपको पता चलेगा कि दशकों पुरानी 'मुर्ग शिकस्ता हरि पसंद' डिश क्या थी! द प्रिंट की रिपोर्ट के मुताबिक यह वो डिश थी, जिसे फैज़ाबाद में मशहूर ग़ज़ल गायिका बेग़म अख़्तर ने अपने हाथों से तब बनाया था, तब कश्मीर के राजा हरि सिंह फैज़ाबाद आए थे. तभी इसे यह नाम दिया गया था.
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