क्या है 'चीनी ड्रैगन का पंजा'? जो भारत पर शिकंजा कसने के लिए है बेताब

क्या है 'चीनी ड्रैगन का पंजा'? जो भारत पर शिकंजा कसने के लिए है बेताब
न्यूज़18 क्रिएटिव. (इलस्ट्रेशन : कुमार गौरव)

जब चीन ने तिब्बत को हथिया लिया, तब माओ ने कहा था 'हथेली पर कब्ज़े के बाद अब पांच उंगलियों का शिकंजा कसना होगा'. इनमें से पहली उंगली उत्तर भारत (Northern India) और चीन के पश्चिमी हिस्से (West of China) की तरफ इशारा करती है. 'चीनी पंजे' के शिकंजे की पूरी चाल भारत चीन के बीच बिछी शतरंज की बिसात में सबसे ज़्यादा अहम है.

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पीपल्स रिपब्लिक ऑफ चाइना (PRC) के पहले अध्यक्ष माओ त्से तुंग (Mao Tse Tung) ने चीन के पश्चिमी हिस्से की तरफ फैलाव के लिए इलाकों पर कब्ज़ा करने की एक नीति तैयार की थी, इसे 'चीनी पंजे' (Chinese Hand) के नाम से समझा जाता है. इस पंजे की तीन उंगलियां सीधे भारत की तरफ उठती हैं और बाकी दो अप्रत्यक्ष रूप से भारत को परेशान करती हैं. गलवान वैली (Galwan Valley) में हुई झड़प (Stand-Off) और उसके बाद बने तनाव के पीछे भी यही 'चीनी पंजे' की रणनीति ही है.

क्या है चीन का पंजा?
आधिपत्य के विस्तार के लिए चीन विदेशी सीमाओं के लिए लार टपकाता रहा है. जब वो अपने पश्चिमी हिस्से में इस फैलाव के लिए चालबाज़ी करता है तो तिब्बत को हथेली के रूप में समझता है और उसकी पांच उंगलियां क्रमश: लद्दाख, नेपाल, भूटान, सिक्किम और अरुणाचल प्रदेश (NEFA) के रूप में समझी जाती हैं. यानी इतने इलाके पर चीन झपट्टा मारने के लिए हमेशा कोशिश करता रहा है.

एक महीने पहले लद्दाख में भारतीय सैन्य दल पर हमले के बाद से भारत चीन सीमा पर जो तनाव के हालात बने हैं, उनके चलते यह थ्योरी एक बार फिर चर्चा में आ गई है. इस थ्योरी को तिब्बत की चेतावनी के साथ ठीक से समझना चाहिए.
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नक्शे में समझें तिब्बत के साथ ही नेपाल, भूटान और भारतीय सीमाओं की स्थिति.


चीन की 'पहली उंगली' के रणनीतिक मायने
पाकिस्तान के कब्ज़े वाले कश्मीर में गिलगिट-बाल्टिस्तान से सटे लद्दाख की सीमाओं की तरफ चीन के इस पंजे की 'पहली उंगली' उठती है. यहां अक्साई चिन पर चीन जबरन कब्ज़ा कर चुका है, जबकि दौलत बेग ओल्डी और पैंगोंग त्सो तक भारत रणनीतिक अहमियत वाली सड़क और दूसरे निर्माण कर रहा है. पैंगोंग त्सो के उत्तरी हिस्से के पास ही वह लोकेशन थी, जहां बीते 15 जून को LAC के पास भारतीय आर्मी पर पीएलए ने हमला किया था.

लद्दाख के बड़े हिस्से को हथियाना चीन की अहम रणनीति है क्योंकि इसके ज़रिये वह पाकिस्तानी सीमाओं से जुड़ता हुआ एक आसान रूट तैयार कर सकता है, जिसके ज़रिये अरब देशों से तेल चीन तक आसानी से पहुंच सके.

क्या है झपट्टा मारने की चाल?
इस पंजे के शिकंजे को कसने के लिए एक खास रणनीति का इस्तेमाल करता है, जो मोदी-जिनपिंग के बीच दिखावे की मिलनसारिता और हकीकत में छल को ज़ाहिर करता है. इस थ्योरी का ज़िक्र करते हुए मेजर जनरल S.G. VOMBATKERE ने एक लेख में लिखा है कि चीन की चाल यही है कि 'दो कदम आगे बढ़ाओ, बात करो, एक कदम पीछे लो और घुसपैठ कर लो.'

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लद्दाख और उत्तर पूर्व में LAC की स्थिति दर्शाते मानचित्र.


लगातार LAC को भारत की तरफ सरकाने वाली इस रणनीति के साथ ही चीन की कोशिश है कि पीओके तक अहम स्थानों पर कब्ज़ा कर लिया जाए. गलवान घाटी में फिलहाल जो स्थिति बनी है, यह इसी का नमूना है.

लद्दाख क्यों है इतना अहम?
पीओके में ग्वादर पोर्ट से खूंजरेब पास तक गिलगिट बाल्टीस्तान में सड़क निर्माण के प्रोजेक्ट पर चीन ने भारी निवेश किया है. अस्ल में, चीन को अरब देशों से तेल मंगाने के लिए समुद्री रास्ते का इस्तेमाल करना होता है, जो हिंद महासागर से दक्षिण चीन सागर तक पहुंचता है. एक तो यह रास्ता बहुत लंबा है और दूसरे इस रास्ते पर भारतीय नौसेना चीनी बेड़ों को कभी भी निशाना बना सकती हैं.

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इन कारणों से पाकिस्तानी सीमा वाले समुद्र से लेकर, सड़क के रास्ते तेल चीन तक लाना महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट है. अब इस प्रोजेक्ट में पीओके और अक्साई चिन के बीच लिंक बनाने के लिए लद्दाख का इलाका बहुत अहम हो जाता है. साफ है कि चीन यहां बेहद उतावलेपन के साथ कुछ भी करने पर उतारू हो सकता है.

कैसे खुलता है चीन का पंजा?
लद्दाख के तौर पर पहली उंगली के बाद ये भी समझना ज़रूरी है कि बाकी उंगलियों से चीन किस तरह छेड़छाड़ करता है. अक्साई चिन में 38000 वर्ग किलोमीटर का हिस्सा हथिया चुका चीन हाल में, नेपाल को उकसाकर लिम्प्याधुरा, कालापानी और लिपुलेख को भारत से अलग करवा चुका है. दूसरी तरफ, भूटान में भी चीन कुछ हिस्सों को जबरन सीमा विवाद में डालकर उन पर बातचीत करने की चाल चल रहा है.

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तिब्बत प्रशासन के प्रमुख लोबसांग सांगे.


इसके अलावा, सिक्किम में डोकलाम तक चीन अपने बेस बना चुका है और वहां घात लगाए बैठा है. अरुणाचल प्रदेश में 90000 वर्ग किलोमीटर पर दावे के साथ ही चीन यहां भी पीछे हटने में वही 'दो कदम बढ़ाओ, एक पीछे लो' की रणनीति से बढ़ता रहा है.

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तिब्बत ने क्यों किया भारत को होशियार?
गलवान में 20 भारतीय जवानों के शहीद होने की घटना के बाद तिब्बत के केंद्रीय प्रशासन के प्रमुख लोबसांग सांगे ने सीएनएन-न्यूज़18 से खास बातचीत में याद दिलाया था कि तिब्बत के साथ भी चीन ने यही सुलूक किया था. सांगे ने होशियार करते हुए कहा था कि 'जब तक आप तिब्बत के साथ हुए सुलूक को नहीं समझेंगे, चीनी नेतृत्व के दिमाग और रणनीति को नहीं समझेंगे. हथेली कब्ज़ाने के बाद अब चीन पांचों उंगलियों की तरफ है.'

सांगे ने इन हालात का हल बताते हुए कहा कि बातचीत ही रास्ता है. 'लेकिन भारत को अपनी सीमा और संप्रभुता की सुरक्षा के लिए चौकस रहना चाहिए. चीन की रणनीति 'पहले दाना देने और फिर चाबुक मारने' जैसी है. भारत को भी ऐसे ही तरीके अपनाने चाहिए लेकिन पहल करने से बचना चाहिए.'
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