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कौन से हैं वो तीन सीमाई इलाके, जो भारत और नेपाल के बीच बडे़ विवाद की वजह बने

Sanjay Srivastava | News18Hindi
Updated: May 20, 2020, 3:20 PM IST
कौन से हैं वो तीन सीमाई इलाके, जो भारत और नेपाल के बीच बडे़ विवाद की वजह बने
ये कालापानी का इलाका है, जो सामरिक दृष्टि से भारत के लिए खासा अहम है, क्योंकि यहां नेपाल के साथ चीन की सीमा भी छूती है

नेपाल ने अपना राजनीतिक नक्शा जारी किया है, जिसमें उसने भारत में लंबे समय से मौजूद तीन उन इलाकों को अपना बताया है, जो या चीन की सीमा से छूते हैं या चीन और नेपाल की सीमा से लगे हैं और सामरिक लिहाज से बहुत अहम और संवेदनशील हैं. जानते हैं कि कौन से हैं वो तीन इलाके

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इन दिनों नेपाल के साथ भारत के साथ सीमा विवाद की खबरें सुखिर्यों में हैं. नेपाल के अखबार बहुत आक्रामक तरीके से इस विवाद पर खबरें छाप रहे हैं. नेपाल ने तुरत-फुरत में एक पॉलिटिकल मैप जारी करके तीन इलाकों को अपना बताया है, जो भारत के नक्शे में शामिल है. केवल यही नहीं नेपाल ने इन तीन इलाकों में करीब 500 चौकियां बनाकर सैनिक तैनात करना भी शुरू कर दिया है.
पहली बार नेपाल इस मामले पर इतना उग्र नजर आ रहा है. इससे पहले भारत और नेपाल के बीच ये सारी बातें बातचीत के जरिए सुलझा ली जाती थीं. लेकिन अब दोनों देशों के रिश्ते तल्ख नजर आ रहे हैं.
दो इलाकों लिपुलेख और कालापानी को लेकर विवाद की बातें पिछले दिनों भी सामने आईं थीं लेकिन नेपाल ने अपने राजनीतिक नक्शे में जो तीसरा स्थान शामिल किया है,वो लिम्पियाधुरा है. जानते हैं कि ये तीनों इलाके कहां हैं और दस्तावेज इन स्थानों के बारे में क्या कहते हैं.

क्या है लिम्पियाधुरा इलाका



ये इलाका भी उत्तराखंड में है जो नेपाल की सीमा से छूता हुआ है. यहां पर महाकाली नदी का उदगम है. दरअसल विवाद की वजह भी महाकाली नदी के उदगम से शुरू हुई है. नेपाल का कहना है कि नदी का उद्गम लिपुलेख के पास लिम्पियाधुरा से है. ये दक्षिण पश्चिम की तरफ बहती है.
वहीं भारत दावा करता रहा है कि महाकाली नदी कालापानी नदी से निकलती है और दक्षिण और पूर्व की तरफ बहती है. 1816 में नेपाल और ब्रिटिश इंडिया के बीच की गई सुगौली संधि के मुताबिक महाकाली नदी भारत और नेपाल दोनों की ही सीमाओं को छूती है. पूर्व की तरफ नेपाल को और पश्चिम की तरफ भारत को.



लिम्पियाधुरा भारत-नेपाल सीमा पर वो जगह है, जो फिलहाल उत्तराखंड में है, जहां महाकाली नदी का उदगम है. इसे नेपाल ने अपने नए राजनीतिक नक्शे में शामिल किया है


नेपाल की कैबिनेट का दावा है कि महाकाली (शारदा) नदी का स्रोत दरअसल लिम्पियाधुरा ही है जो फ़िलहाल भारत के उत्तराखंड का हिस्सा है, वो उसका हिस्सा है.

लिपुलेख कहां है और सामरिक लिहाज से कितना खास है
भारत ने करीब 10 दिनों पहले लिपुलेख (Lipulekh Pass) तक 80 किलोमीटर लंबा एक सड़क मार्ग तैयार किया था. नेपाल के साथ भारत का सीमा विवाद दरअसल इसी के साथ गर्म हुआ. इसे ना केवल नेपाल की संसद में उठाया गया बल्कि काठमांडू में भारतीय दूतावास के सामने इसके विरोध में जमकर प्रदर्शन भी हुआ.
कैलाश मानसरोवर तीर्थयात्रियों को 80 किलोमीटर की यह सड़क बनने के बाद लंबे रास्‍ते की कठिनाई से राहत मिलेगी और गाड़ियां चीन की सीमा तक जा सकेंगी. धारचुला-लिपुलेख रोड, पिथौरागढ़-तवाघाट-घाटियाबागढ़ रूट का विस्‍तार है. ये सड़क घाटियाबागढ़ से शुरू होकर लिपुलेख दर्रे पर ख़त्म होती है जो कैलाश मानसरोवर का प्रवेश द्वार है.

लिपुलेख दर्रे का प्राचीन काल से काफी महत्व रहा है, यही वो रास्ता है, जहां से होकर भारत और तिब्बत के बीच व्यापार होता था और तीर्थ यात्री कैलाश मानसरोवर की यात्रा पर जाते थे

भारत ने कई साल की मेहनत के बाद लिपुलेख दर्र तक नया सड़क मार्ग तैयार किया है, जिसे लेकर नेपाल से विवाद खड़ा होने के बाद ही उसने तुरत-फुरत अपना नया राजनीतिक नक्शा जारी कर दिया है.


भारत के लिए क्यों अहम 
लिपुलेख ला या लिपुलेख दर्रा या लिपुलेख भञ्ज्याङ हिमालय का एक पहाड़ी दर्रा है जो एक विवादित क्षेत्र है.ये 5,334 मीटर (17,500 फीट) की ऊंचाई पर है. प्राचीन काल में तो इसका बहुत महत्व था, क्योंकि भारत-तिब्बत के बीच आने-जाने के लिए इसी रास्ते का इस्तेमाल किया जाता था. लेकिन मानसून में भूस्खलन तथा ठंड में बर्फ से ढंका होने के कारण इस दर्रे से आना-जाना बहुत मुश्किल हो जाता है. चूंकि ये इलाका भी नेपाल के साथ चीनी सीमा को छूता है, लिहाजा सामरिक लिहाज से भारत के लिए बहुत खास और जरूरी है.
नेपाल का दावा करता है कि 1816 की सुगौली संधि के जरिए इस इलाके पर उसका हक बनता है. सुगौली संधि भारत के साथ उसकी पश्चिमी सीमा का निर्धारण करती है.

कालापानी को लेकर विवाद की वजह क्या है
पिछले साल भारत ने कालापानी को अपने नक्शे में दिखाया जिसे लेकर भी नेपाल ने विरोध जताया था. कालापानी उत्तराखंड के पिथौड़ागढ़ ज़िले में 35 वर्ग किलोमीटर ज़मीन है. यहां इंडो-तिब्बत बॉर्डर पुलिस के जवान तैनात हैं. भारतीय राज्य उत्तराखंड की नेपाल से 80.5 किलोमीटर की सीमा लगती है और 344 किलोमीटर चीन से.

भारत के लिए सामरिक दृष्टि से कालापानी का इलाका बहुत अहम है. जब 1962 में भारत और चीन का युद्ध हुआ था, तब चीन की सेनाएं तमाम कोशिश के बाद यहां तक पहुंच नहीं पाईं थीं

काली नदी का उद्गम स्थल कालापानी ही है. भारत ने इस नदी को भी नए नक्शे में शामिल किया है. भारत का दावा है कि 1816 में ईस्ट इंडिया कंपनी और नेपाल के बीच हुई सुगौली संधि के जरिए ही ये उसके पास है.

कालापानी पर नेपाल का क्या दावा है
नेपाल का दावा है कि 1961 में यानी भारत-चीन युद्ध से पहले नेपाल ने यहां जनगणना करवाई थी और तब भारत ने कोई आपत्ति नहीं जताई थी. नेपाल का कहना है कि कालापानी में भारत की मौजूदगी सुगौली संधि का उल्लंघन है.

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First published: May 20, 2020, 3:20 PM IST
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