क्या था तियानमेन नरसंहार कांड? जिसे हांगकांग के खिलाफ दोहरा सकता है चीन!

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Updated: August 19, 2019, 1:44 PM IST
क्या था तियानमेन नरसंहार कांड? जिसे हांगकांग के खिलाफ दोहरा सकता है चीन!
पीपल्स लिब्रेशन आर्मी के चीनी सैनिक. फाइल फोटो.

हांगकांग (Hong Kong) में लगातार विरोध प्रदर्शन (Protests) जारी हैं और ऐसे में चीन (China) का भारी सेना तैनात करने का कदम दुनिया भर को परेशान कर रहा है. चीन के क्रूर दमनचक्र के एक काले अध्याय के बारे में जानें.

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चीन अपनी दमनकारी नीतियों के लिए पहले भी बदनाम रह चुका है इसलिए हांगकांग में लगातार जारी व्यापक प्रदर्शनों (Movements) को लेकर इस तरह की आशंकाएं सामने आने लगी हैं कि कहीं इस प्रदर्शन को कुचलने के लिए चीन तीन दशक पुराने हिंसक तेवर को फिर न अपनाए. अमेरिकी (USA) राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump) ने भी कह दिया है कि अगर तियानमेन स्क्वायर नरसंहार (Tiananmen Square Massacre) जैसा दमनचक्र चीन ने अपनाया तो व्यापारिक रिश्तों में चीन को बड़ा नुकसान उठाना पड़ सकता है. क्या आप जानते हैं कि तियानमेन स्क्वायर नरसंहार क्या था, क्यों हुआ था, क्या प्रभाव थे और इसके बाद चीन क्यों पूरी दुनिया में बदनाम व अलग थलग पड़ गया था?

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हांगकांग में पिछले करीब दो महीनों से लोकतंत्र की बहाली (Pro Democracy) की मांग को लेकर चीन के खिलाफ प्रदर्शन जारी हैं. हज़ारों से लाखों की संख्या तक प्रदर्शनकारी सड़कों पर उतर रहे हैं. ताज़ा खबरों के मुताबिक चीन ने हांगकांग बॉर्डर (Hong Kong Border) पर सेना (Military Troops) की भारी तैनाती की है, जिसके चलते दुनिया भर में ये अंदेशा जताया जा रहा है कि चीन एक बार फिर विरोध प्रदर्शन को कुचलने के लिए तीस साल पुरानी हरकत करने की फिराक में है. तियानमेन स्क्वायर कांड क्या दोहराया जाएगा? ये समय बताएगा लेकिन फिलहाल उस दुर्भाग्यपूर्ण नरसंहार की कहानी जानें.

क्या था तियानमेन चौक नरसंहार कांड?

1989 में लोकतंत्र बहाली को लेकर जन आंदोलन हुआ था, जिसके पीछे ज़्यादातर छात्र ही थे. इस आंदोलन ने इतनी व्यापकता हासिल की थी कि चीन की राजधानी बीजिंग में स्थित तियानमेन चौक पर सरकार के विरोध में एक लाख से ज़्यादा प्रदर्शनकारी इकट्ठे हो गए थे. इस विद्रोह को कुचलने के लिए चीन सरकार ने मार्शल लॉ लगाया था और तोपों, बंदूकों व टैंकों से गोलीबारी कर प्रदर्शनकारियों को मौत के घाट उतार दिया था.

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चीन में 1989 में हुए प्रदर्शनों के दौरान एक आंदोलनकारी की तस्वीर. सीएनएन से साभार.

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सरकारी आंकड़े सिर्फ 300 मौतों के जारी हुए थे, लेकिन कभी अस्ल संख्या नहीं बताई गई. कई स्रोतों से दमनचक्र में मारे गए लोगों की संख्या के अनुमान सामने आए, जिनके मुताबिक डेढ़ हज़ार से ढाई हज़ार लोगों के मारे जाने तक की बात कही गई थी. एक दावे में तो 10 हज़ार लोगों के मारे जाने तक की बात कही गई थी.

इतने बड़े विद्रोह के कारण क्या थे?
सुधारवादी छवि के कम्युनिस्ट नेता हू याओबांग की मौत अप्रैल 1989 में होने के बाद उत्तर माओवादी चीन के लोगों में चीन के भविष्य को लेकर गहरी चिंताएं थीं. उस समय की चीनी सरकार की नीतियां भी लोगों को सोचने पर मजबूर कर रही थीं. देश में हर तरफ महंगाई, भ्रष्टाचार, नई अर्थव्यवस्था के लिए ग्रैजुएट्स के रोज़गार को लेकर सीमित सोच, प्रेस की स्वतंत्रता का हनन, अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के अधिकार का हनन जैसे कई मुद्दों पर लोग नाराज़ थे.

सबसे बड़ी चिंता यह थी कि एक राजनीतिक पार्टी सिस्टम को कानूनी किया जा रहा था यानी सत्ता तानाशाही की तरफ बढ़ रही थी. इन तमाम मुद्दों को लेकर सरकार का विरोध शुरू हुआ और इन प्रदर्शनों को इतना जन समर्थन मिला कि 3 और 4 जून 1989 को तियानमेन स्क्वायर पर एक लाख से ज़्यादा प्रदर्शनकारी इकट्ठे हो गए थे.

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टैंकमैन की इस तस्वीर को बैन किया गया था, जो एक कार्यक्रम में सामने आई तो दुनिया हैरान रह गई थी. सीएनएन से साभार.


तियानमेन नरसंहार की कुछ खास तारीखें
15 अप्रैल 1989 : चीन में लोकतांत्रिक मूल्यों को लेकर काम करने वाले नेता हू याओबांग की मौत.
13 मई 1989 : तियानमेन स्क्वायर पर 100 से ज़्यादा छात्र भूख हड़ताल पर बैठे और अगले कुछ ही दिनों में हड़तालियों की संख्या हज़ारों में थी.
19 मई 1989 : तियानमेन स्क्वायर पर एक विशाल रैली आयोजित हुई जिसमें करीब 12 लाख लोग शामिल थे. इस रैली के चलते चीन सरकार के प्रमुख ली पेंग ने मार्शल लॉ लागू करवाया.
1 जून 1989 : बीजिंग से अमेरिकी समाचार प्रसारण रोका गया. चीनी सेना के चित्र खींचने या वीडिया बनाने पर भी रिपोर्टरों पर प्रतिबंध लगाया गया.
2 जून 1989 : तियानमेन स्क्वायर पर प्रदर्शनकारियों के समर्थन में गायक हाउ डेजियन के कॉंसर्ट में 1 लाख लोग जुटे.
4 जून 1989 : 3 और 4 जून की दरम्यानी रात एक बजे से चीनी सेना ने तियानमेन स्क्वायर पर गोलीबारी शुरू की और दिन भरे चले इस दमनचक्र में नागरिकों और छात्रों को मौत के घाट उतारा गया. मौतों का औपचारिक व वास्तविक आंकड़ा तक जारी नहीं किया गया.
5 जून 1989 : मशहूर टैंकमैन वाकया हुआ. एक प्रदर्शनकारी टैंकों को रोकता हुआ अकेला सड़क पर टैंकों के सामने खड़ा दिखा और इस तस्वीर को सालों तक चीन ने प्रतिबंधित रखा. इसी दिन, हांगकांग में मारे गए लोगों को श्रद्धांजलि देने के आयोजन में 70 हज़ार लोग जुटे.
फरवरी 2006 : पूर्व पत्रकार यू डॉंग्यूए को 17 साल बाद जेल से रिहा किया गया, जिन्हें इस आरोप में गिरफ्तार किया गया था कि 1989 में प्रदर्शन के दौरान उन्होंने माओ ज़ेडॉंग की तस्वीर पर पेंट फेंका था.
4 जून 1999 : तियानमेन नरसंहार की 20वीं बरसी पर हज़ारों लोग उसी चौक पर जमा हुए. बीजिंग में पत्रकारों, विदेशी समाचार साइटों और ट्विटर को बंद कर दिया गया.

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1988 में बीजिंग के तियानमेन स्क्वायर की तस्वीर. विकिपीडिया से साभार.


इस नरसंहार कांड के बाद क्या हुआ?
तियानमेन नरसंहार कांड के बाद चीनी सरकार ने दमन की कार्रवाई जारी रखते हुए बड़ी संख्या में गिरफ्तारियां की थीं. सख़्त सज़ाएं दी गईं और कई प्रदर्शनकारियों को आज तक देश में लौटने नहीं दिया गया. अगले कुछ समय में चीनी सरकार दुनिया की आलोचनाएं झेलती रही और एक तरह से दुनिया भर ने चीन का ​बहिष्कार कर दिया था. फिर चीनी नेतृत्व में बदलाव भी हुए. चीन में मीडिया पर प्रतिबंध लंबे समय तक रहे और इस घटना से जुड़े हर तरह के लिटरेचर व रिपोर्टों को प्रतिबंधित रखने की कोशिश चीन ने की. चीन के लोग आज तक उस कांड की याद से सहमे हुए रहते हैं. उस कांड की बरसी पर हर साल हज़ारों लोग जुटते हैं और अपने ज़ख़्मों की याद में आंसू बहाते हैं.

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First published: August 19, 2019, 1:02 PM IST
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