बीजेपी ने फिर कहा-टीपू अत्याचारी शासक-क्या वाकई ऐसा था?

कर्नाटक में एक बार फिर टीपू सुल्तान से जुड़ा विवाद सुर्खियों में है. भाजपा अपने उसी स्टैंड पर कायम है कि टीपू अत्याचारी शासक था. जानें टीपू सुल्तान को लेकर भाजपा और अन्य पार्टियों का स्टैंड किन तर्कों के हवाले से क्या रहा है.

News18Hindi
Updated: July 30, 2019, 4:44 PM IST
बीजेपी ने फिर कहा-टीपू अत्याचारी शासक-क्या वाकई ऐसा था?
टीपू सुल्तान. फाइल फोटो.
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Updated: July 30, 2019, 4:44 PM IST
कर्नाटक में सत्ता परिवर्तन होते ही टीपू सुल्तान एक बार विवाद का मुद्दा हो गया है. बीजेपी के ए​क विधायक बोपैया के सवाल और आवेदन के मद्देनज़र नई भाजपा सरकार ने टीपू सुल्तान जयंती पर आयोजित होने वाले कार्यक्रम रद्द कर एक बार फिर इस मुद्दे को हवा दे दी है. टीपू जयंती कार्यक्रम को रद्द करने के पीछे भाजपा ने अपना पुराना स्टैंड कायम रखते हुए टीपू को एक अत्याचारी शासक करार दिया है और टीपू जयंती को गैर ज़रूरी बताया है. लेकिन क्या आप जानते हैं कि भाजपा को टीपू सुल्तान से क्यों बैर रहा है? कर्नाटक में भाजपा नेता क्यों, कैसे और कब कब टीपू सुल्तान विवाद से जुड़े रहे हैं? इस लेख में पूरा ब्योरा जानें.

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ताज़ा खबर के मुताबिक़ कर्नाटक सरकार ने आदेश जारी करते हुए कहा है कि तुरंत प्रभाव से राज्य द्वारा फंड की जाने वाली टीपू सुल्तान की जंयती के कार्यक्रम को रद्द किया जाता है. साल 2015 में सिद्धारमैया के मुख्यमंत्री बनने के बाद कर्नाटक में हर साल टीपू सुल्तान जंयती राज्य के कार्यक्रम के तौर पर मनाई जाती रही, लेकिन बीजेपी तबसे ही इस कार्यक्रम का विरोध करती रही है. क्यों? जानें भाजपा के क्या तर्क हैं और इतिहास क्या है और भाजपा नेताओं का क्या स्टैंड रहा है.

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पिछले कुछ समय से कर्नाटक में टीपू सुल्तान को लेकर राजनीतिक बहस जारी है.


क्या वाक़ई हिंदू विरोधी शासक था टीपू?
यहां हम इतिहास की बात नहीं करेंगे, बल्कि इतिहास के हवाले से दिए जाने वाले तर्कों की बात करेंगे. इतिहास के कम से कम दो ख़ेमे रहे हैं और इस मामले में हिंदू समर्थक दावा करते हैं कि टीपू अत्याचारी और हिंदू विरोधी शासक था और उसे सेक्युलर बताने वाला इतिहास झूठा है. वहीं सेक्युलर भी यही दावा करते हैं कि हिंदू नज़रिए से लिखा हुआ इतिहास प्रामाणिक नहीं है. बहरहाल, टीपू को हिंदू विरोधी बताने वाले इतिहास में विलियम कर्कपैट्रिक द्वारा 1811 में प्रकाशित एक किताब का हवाला दिया जाता है, जिसमें टीपू के लिखे पत्र प्रकाशित किए गए थे.
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इन पत्रों के हवाले से ये कहा जाता है कि टीपू ने अपने शासनकाल में कई लोगों से जो वार्तालाप किया, उससे साफ ज़ाहिर होता है कि टीपू के शासन काल में दक्षिण में हज़ारों या संभवत: लाखों हिंदुओं का जबरन धर्म परिवर्तन करवाया गया था और हिंदुओं पर अत्याचार किए गए थे. इस किताब के अलावा राजा वर्मा, विलियम लोगन, इतिहासकार एम ए गोपालन लिखित पुस्तकों के हवाले देकर भी यही साबित किया जाता है. वहीं, दूसरा खेमा टीपू के अंग्रेज़ों के खिलाफ संघर्ष को तरजीह देकर उसे महत्वाकांक्षी शासक बताता है, जिसने अपने राज्य के विस्तार के लिए आक्रामक नीतियां अपनाईं, लेकिन ऐसा करने वाला वह पहला शासक नहीं था.

भाजपा का स्टैंड क्या रहा है?
टीपू को लेकर गिरीश कर्नाड, राणा अयूब और शेख अली जैसे दक्षिण के प्रसिद्ध इतिहासकार और लेखक सेक्युलर नज़रिया रखते रहे हैं, लेकिन भाजपा इन्हें खारिज करते हुए टीपू को अत्याचारी और हिंदू विरोधी शासक करार देती रही है. लेकिन, भाजपा का यह स्टैंड बहुत पुराना नहीं रहा है. जी हां, 2015 से पहले टीपू जयंती के कार्यक्रम राज्य फंड से नहीं होता था, लेकिन होता था. और तब येडियुरप्पा, जगदीश शेत्तार और आर अशोक जैसे भाजपाई राजनीतिक चेहरों के उन कार्यक्रमों में शामिल होने के दावे किए जाते हैं.

दूसरी ओर शेख अली ने टीपू सुल्तान के जीवन पर आधारित जो किताब 2012 में लिखी थी, उसे कर्नाटक के संस्कृति विभाग से प्रकाशित किया गया था, जिसमें तत्कालीन सीएम भाजपा नेता शेत्तार ने एक संदेश भी लिखा था, जिसमें उन्होंने टीपू सुल्तान के बतौर शासक गुणों का बखान किया था. अस्ल में, भाजपा की तरफ से टीपू के मुखर विरोध का सिलसिला 2015 से ही शुरू हुआ, जब टीपू जयंती को राज्य का कार्यक्रम घोषित ​कर दिया गया.

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तो क्या वजहें रही हैं?
भाजपा के नेता समय समय पर टीपू पर हुए विवादों के दौरान टीपू सुल्तान को आतंकवादी तक करार दे चुके हैं. साल 2017 में भी टीपू जयंती को लेकर भाजपा नेताओं ने विरोध दर्ज किया था, तब एक समाचार वेबसाइट के एक लेख में कर्नाटक सरकार के कानूनी सलाहकार रहे ब्रजेश कलप्पा के हवाले से सवाल उठाए गए थे कि दक्षिण के एक ट्रेन टीपू एक्सप्रेस के नाम से चलती है, केंद्र की भाजपा सरकार ने उसे क्यों बैन नहीं किया? सीबीएसई की किताब में टीपू पर एक अध्याय है, उसे क्यों नहीं बैन किया जाता?

वहीं कांग्रेस नेताओं के हवाले से न्यूज़मिनट ने लिखा था कि भाजपा धर्म के आधार पर वोटों के ध्रुवीकरण के लिए टीपू सुल्तान की छवि खराब करने का सहारा लेती रही है. टीपू को आतंकी और टीपू जयंती आयोजित करने पर कांग्रेस को खलनायक साबित करने के पीछे भाजपा की वोट बैंक की ही रणनीति रही है. वहीं, भाजपा का पिछले कुछ सालों से यही स्टैंड है कि टीपू प्रमुख शासक नहीं बल्कि खलनायक था.

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First published: July 30, 2019, 4:39 PM IST
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