73 सालों में पाकिस्तान में बने हैं केवल दो हिंदू मंदिर, जानें उनके बारे में

73 सालों में पाकिस्तान में बने हैं केवल दो हिंदू मंदिर, जानें उनके बारे में
क्वेटा के इस्कॉन मंदिर में कृष्ण राधा की मूर्ति

1947 में भारत के बंटवारे के पास नए देश के रूप में पाकिस्तान सामने आया. बंटवारे से पहले पाकिस्तान में सैकड़ों मंदिर थे. जो धीरे धीरे खत्म हो रहे हैं. आजादी के बाद पाकिस्तान में दो बड़े हिंदू कृष्ण मंदिर बनाए गए. जानें वो मंदिर कौन हैं और किसने बनवाए, इसके पाकिस्तान सरकार की क्या भूमिका थी

  • Share this:
जिस समय भारत का बंटवारा हुआ, उस समय पाकिस्तान में बड़े पैमाने पर हिंदू मंदिर थे लेकिन उनमें से ज्यादातर अब काफी खराब स्थिति में हैं. अंगुली पर गिने जाने लायक मंदिरों में ही पूजा होती है. इस्लामाबाद में पहला हिंदू मंदिर बनने की तैयारी हो रही थी लेकिन पाकिस्तान की एक संस्था इसके निर्माण का विरोध कर रही है. क्या आपको मालूम है कि पाकिस्तान बनने के बाद से वहां कितने हिंदू मंदिर बने हैं. इसका जवाब है-केवल दो मंदिर.

पाकिस्तान को बने हुए 73 साल हो गए हैं. बंटवारे के कुछ साल बाद तक पाकिस्तान में मजहबी घृणा चरम पर थी. कोई मंदिर बनाने के बारे में सोच भी नहीं सकता था. 06 दिसंबर 1992 को जब अयोध्या में बाबरी ढांचे का ध्वंस हुआ, तब वहां करीब 1000 मंदिरों को निशाना बनाया गया.

वर्ष 2000 के बाद इंटरनेशनल सोसायटी फॉर कृष्णाकांशसनेस यानि इस्कॉन ने इसके लिए वहां पाकिस्तान सरकार से बातचीत करके मंदिर बनाने की कोशिश शुरू की. ये इतना आसान तो नहीं था. लेकिन इस काम में इस्कॉन के न्यूयॉर्क और ब्रिटेन के संपर्क भी काफी काम आए.



इस्कॉन ने बनाए हैं दोनों हिंदू कृष्ण मंदिर
इसके चलते इस्कॉन ने वहां दो बड़े हिंदू मंदिर बनाए. मंदिरों के बनने के दौरान भी हल्का-फुल्का विरोध हुआ था. इन मंदिरों के लिए जमीन पाकिस्तान सरकार ने ही दी. मंदिरों को बनने में कई साल लगे लेकिन अब ये दो बड़े मंदिर पाकिस्तान के मुख्य मंदिर बन चुके हैं.

इस्लामाबाद में मंदिर पर फतवा, जानें किस हाल में हैं पाकिस्तान के शहरों के कृष्ण मंदिर

हैरतभरा था पाकिस्तान में हिंदू मंदिरों का बनना
हालांकि पाकिस्तान जैसे देश में नए बड़े मंदिरों का बनना ही अपने आपमें काफी हैरतभरा है. माना जाता है कि अल्पसंख्यकों पर अत्याचार के चलते पाकिस्तान की दुनिया में काफी किरकिरी हो रही थी. काफी बड़े संख्या में पाकिस्तान से हिन्दू अल्पसंख्यकों का पलायन हो रहा था.

पाकिस्तान में कराची स्थित इस्कॉन कृष्णा मंदिर का मुख्य द्वार, ये मंदिर काफी बड़ी जमीन पर बना है


इन मंदिरों को बनाने की मंजूरी देने के पीछे एक बड़ी वजह ये भी रही होगी कि तब पाकिस्तान सरकार अंतरराष्ट्रीय बिरादरी को इसके जरिए संदेश देना चाहती थी कि उसके यहां अल्पसंख्यकों के साथ कोई भेदभाव नहीं होता है.

इन दो शहरों में हैं ये मंदिर
ये दो बड़े मंदिर हैं - इस्कान द्वारा क्वेटा में बनाया गया श्री श्री राधा राधानाथ मंदिर भवन और कराची में इस्कान का राधा गोपीनाथ मंदिर. हालांकि वर्ष 2000 के बाद कराची स्थित स्वामिनारायण संप्रदाय के मंदिर ने अपने मंदिर का भवन का विस्तार किया.

इस्कॉन मंदिर कराची में गतिविधि के दौरान प्रदर्शनी


पहला मंदिर कब बना
इस्कॉन का पाकिस्तान में पहला मंदिर क्वेटा में वर्ष 2007 में बनकर तैयार हुआ. बलूचिस्तान प्रांत में हालांकि इसके अलावा कई पुराने मंदिर हैं लेकिन इसकी गतिविधियां ज्यादा होती हैं. इसके लिए इस्कॉन को पाकिस्तान सरकार ने जमीन उपलब्ध कराई थी.

ये भी पढ़ें - भारत में भी कई बार देखी गई हैं उडनतश्तरियां, जानें कब और कहां

जमीन किसने दी 
इसके बाद इस्कॉन ने जब कराची में मंदिर खोलने के लिए सरकार से पहल की तो उन्हें इसकी भी मंजूरी दे दी गई. इसके लिए भी जमीन पाकिस्तान सरकार से मिली. दोनों मंदिरों के बनने का खर्च आमतौर पर पाकिस्तान में रहने वाले हिंदुओं और इस्कॉन ने उठाया.

दुनियाभर में इस्कॉन के मंदिर
इस समय दुनियाभर में इस्कॉन के 400 से ज्यादा हैं. इस्कॉन ने पश्चिमी देशों में अनेक भव्य मंदिर और विद्यालय बनवाए हैं. बेंगलुरु का इस्कॉन मंदिर दुनिया का सबसे बड़ा इस्कान मंदिर हैं जिसे 1997 में हरे कृष्ण ‍हिल पर बनाया गया था.
अगली ख़बर

फोटो

टॉप स्टोरीज

corona virus btn
corona virus btn
Loading