क्या है UN की मानवाधिकार परिषद, जहां भारत को घेरने की कोशिश करेगा पाक

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Updated: September 12, 2019, 3:27 PM IST
क्या है UN की मानवाधिकार परिषद, जहां भारत को घेरने की कोशिश करेगा पाक
स्विटज़रलैंड के जिनेवा में स्थित यूएनएचआरसी का सम्मेलन भवन.

स्विट्जरलैंड के जिनेवा (Geneva) में स्थित UNHRC के 42वें सेशन में जम्मू-कश्मीर (Jammu & Kashmir) मुद्दे को लेकर भारत और पाकिस्तान (India Pakistan) एक दूसरे को घेरेंगे. इससे पहले इस मानवाधिकार परिषद के बारे में सब कुछ जानें.

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संयुक्त राष्ट्र (United Nations) की मानवाधिकार परिषद (Human Rights Council) की बैठक जिनेवा में होने जा रही है, जहां जम्मू-कश्मीर पर भारत के हालिया कदम के खिलाफ पाकिस्तान अपना पक्ष रखेगा और फिर भारत अपना. लंबे समय से आप और हम यूएन की इस मानवाधिकार परिषद (UNHRC) के बारे में खबरें सुनते रहे हैं लेकिन ये परिषद क्या है, क्यों है और कैसे काम करती है, इन तमाम सवालों के साथ ही आप मानवाधिकारों (Human Rights) के बारे में भी कितना जानते हैं? यूएनएचआरसी के बारे में तमाम ज़रूरी बातें जानने के साथ ही ये भी जानें कि संयुक्त राष्ट्र के मानवाधिकार आयोग और मानवाधिकार परिषद के बीच क्या ताल्लुक रहा है.

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संयुक्त राष्ट्र दुनिया के तकरीबन सभी देशों का एक ऐसा संयुक्त मंच है जिसकी कोशिश दुनिया को हर मोर्चे पर बेहतर बनाने (Better World) की रही है. इसी व्यवस्था की एक इकाई मानवाधिकार आयोग (Human Rights Commission) हुआ करता था. 2006 में आयोग को खत्म करते हुए इसके स्थान पर यूएन की मानवाधिकार परिषद बनाई गई और इसमें दुनिया को 5 इलाकों (Regional Groups) में बांटकर तकरीबन हर देश का प्रतिनिधित्व संस्था में लाने की कोशिश रही. इस संस्था से पहले ये जानते हैं कि मानवाधिकारों के दायरे में कौन-कौन से अधिकार शामिल हैं.

ये हैं मानव अधिकार

मानवाधिकारों को लेकर संयुक्त राष्ट्र ने जो अंतरराष्ट्रीय घोषणा पत्र प्रस्तुत किया था, उसमें 30 सूत्रीय व्याख्या के ज़रिए मानव अधिकारों के बारे में जानकारी दी गई.

इसके मुताबिक़, स्वतंत्रता, समानता, जीने, गुलाम या बंधुआ व्यवस्था न होने, प्रताड़ना या शोषण का विरोध, सबके लिए समान कानून, किसी को गैरकानूनी बंधक न बनाना, कानूनी लड़ाई के अवसर, दोषसिद्ध न होने तक निर्दोष माने जाने, निजता की सुरक्षा, कहीं आने जाने की आज़ादी, सुरक्षित स्थान पर जीने, राष्ट्रीयता, शादी व परिवार रखने, निजी संपत्ति रखने, विचार करने, अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता, जनसभा की आज़ादी, लोकतंत्र, सामाजिक सुरक्षा, कामगारों के अधिकार, खेलने की आज़ादी, सबके लिए भोजन व आवास, शिक्षा, कॉपीराइट, निष्पक्ष व स्वतंत्र संसार, उत्तरदायित्व और कोई अधिकार न छीन सके आदि को सभी मनुष्यों के अधिकार के रूप में चिह्नित किया गया.

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जम्मू-कश्मीर पर भारत ने ताज़ा फैसला लेते हुए राज्य का पुनर्गठन किया और इस दौरान राज्य में तकरीबन महीने भर सुरक्षा बल तैनात रहे. फाइल फोटो.


क्या करती है यूएनएचआरसी?
संयुक्त राष्ट्र की मानवाधिकार परिषद की स्थापना का मकसद है कि वह सुनिश्चित करे कि सभी लोग अपने अधिकारों के बारे में जागरूक हों और अपने अधिकारों का इस्तेमाल कर सकें. परिषद का एक काम ये भी है कि वह मानवाधिकारों के हनन को लेकर सजग रहे और निगरानी रखे. मा​नवाधिकारों के संरक्षण और उन्हें मज़बूत बनाने के लिए ज़रूरी कदम उठाना भी इस परिषद का कार्यक्षेत्र है. संयुक्त राष्ट्र में शामिल देशों की सरकारें मानवाधिकारों की रक्षा कर रही हैं या नहीं, इसका ध्यान रखना और अगर ​कहीं किसी के अधिकार छीने जा रहे हैं तो उनकी मदद करना परिषद का दायित्व माना गया है.

कैसे काम करती है परिषद?
यूएनएचआरसी में वो सभी देश भाग लेते हैं जो संयुक्त राष्ट्र के सदस्य हैं. लेकिन किसी भी मुद्दे पर निर्णय लेने का अधिकार कुछ देशों को है. निर्णय लेने की व्यवस्था में एक कार्यकाल में 47 देशों के प्रतिनिधि शामिल होते हैं. इन देशों को पहले बताए गए 5 रीजन्स में से चुना जाता है और एक देश लगातार दो कार्यकाल में शामिल नहीं हो सकता. इन प्रतिनिधियों का कार्यकाल दो साल का होता है.

UNHRC में क्या है स्थिति
UNHRC में भौगोलिक स्थिति को देखते हुए सदस्यों को पांच रीजनल ग्रुप में बांटा गया है. UNHRC के अफ्रीकन स्टेट्स में 13 सदस्य, एशिया-पैसिफिक में 13 सदस्य, ईस्टर्न यूरोपियन स्टेट्स में 6 सदस्य, लैटिन अमेरिकन और कैरेबियन स्टेट्स में 8-8 सदस्य, जबकि वेस्टर्न यूरोपियन और अन्य स्टेट्स के लिए 7 सीटें निर्धारित हैं. भारत-पाकिस्तान दोनों ही देश एशिया पेसिफिक ग्रुप में हैं. भारत 2021 तक UNHRC का सदस्य है, जबकि पाकिस्तान की मेंबरशिप 2020 में खत्म हो रही है.

UNHRC में जो नए सदस्य चुने गए हैं, उन देशों के नाम हैं- बुर्किना फासो, कैमरून, इरिट्रिया, सोमालिया, और टोगो. यह सभी अफ्रीकन स्टेट्स कैटिगरी में हैं. वहीं ईस्टर्न यूरोपियन स्टेट्स ग्रुप में बुल्गारिया और चेक रिपब्लिक, जबकि लैटिन अमेरिकन-कैरिबियन स्टेट्स कैटिगरी में अर्जेंटीना, बहामास और उरुग्वे शामिल हैं. इसके अलावा वेस्टर्न यूरोपियन और अन्य राज्यों की कैटिगरी में ऑस्ट्रिया, डेनमार्क और इटली नए सदस्य निर्वाचित हुए हैं.

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अमेरिका कई बार मानवाधिकारों को लेकर रूस को घेरने की कोशिश करता रहा है. फाइल फोटो.


क्यों हुई है परिषद की आलोचना?
जब जॉर्ज बुश अमेरिकी राष्ट्रपति थे, तब अमेरिका ने परिषद में प्रतिनिधित्व को लेकर सवाल उठाए थे और उसके बाद बराक ओबामा के कार्यकाल के दौरान अमेरिका ने परिषद में मुख्य ​भूमिका निभाने की भरसक कोशिश की थी. वॉशिंगटन पोस्ट की 2010 की एक खबर के मुताबिक कहा जाता है कि परिषद में उन देशों को प्रतिनिधित्व को तवज्जो दी जा रही थी, जो दमनकारी नीतियों के पोषक माने जाते रहे.

चीन, रूस, इंडोनेशिया, क्यूबा और सउदी अरब जैसे देशों का नाम लेकर अमेरिकी पक्ष ने परिषद पर दमनकारियों को प्रतिनिधित्व देने के आरोप लगाए थे. असल में, इनमें से कई देशों में लोकतांत्रिक शासन व्यवस्था न होकर कम्युनिस्ट सरकारें हैं इसलिए अमेरिका और उसके साथी देश इन सरकारों का विरोध करते रहे हैं.



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First published: September 10, 2019, 2:41 PM IST
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