क्या है अमेरिकी स्पेस फोर्स, जिसे पहली बार मिडिल ईस्ट में किया गया तैनात

अंतरिक्ष में रक्षा के लिए अमेरिका ने स्पेस फोर्स इसी साल गठित की.
अंतरिक्ष में रक्षा के लिए अमेरिका ने स्पेस फोर्स इसी साल गठित की.

पहले कहा गया था कि अमेरिकी वायु सेना (US Air Force) की शाखा के तौर पर स्पेस फोर्स (Space Force) का गठन होगा, लेकिन पिछले साल के आखिर में एक अलग मिलिट्री ब्रांच के तौर पर शुरू किया गया. अब इसे मध्य पूर्व में तैनात किया गया है.

  • News18India
  • Last Updated: September 22, 2020, 10:12 AM IST
  • Share this:
अमेरिका के छठे सशस्त्र बल (US Armed Forces) के रूप में सामने आई है स्पेस फोर्स. नेवी, आर्मी, मरीन कॉर्प्स, एयर फोर्स और कोस्ट गार्ड के बाद इस बल का गठन अमेरिका ने इसलिए किया ताकि अंतरिक्ष में उसका दबदबा (Arms Race in Space) कायम रह सके और अंतरिक्ष में प्रतिद्वंद्वी देशों (Space Rivalry) के साथ मुकाबला किया जा सके. जी हां, यह अंतरिक्ष सेना है और चीन व रूस (China and Russia) के बाद अमेरिका तीसरा देश है, जिसके पास यह फोर्स है.

करीब दो साल पहले इस फोर्स के बारे में अमेरिका ने घोषणा की थी और अब ताज़ा खबर यह है कि मध्य पूर्व में कतर के उदैद एयरबेस में अमेरिकी स्पेस फोर्स के 20 जवानों की टुकड़ी को तैनात किया गया है. यह इस फोर्स की विदेशी धरती पर पहली तैनाती है. इस प्रोजेक्ट को ट्रंप की सनक भी करार दिया गया था, लेकिन अब यह हरकत में आ चुकी है. इस फोर्स के फैक्ट्स और भविष्य की योजनाएं भी ध्यान देने लायक हैं.

अस्ल में क्या है स्पेस फोर्स?
इसे आप आसान भाषा में 'एस्ट्रॉनॉट सोल्जर' के तौर पर समझ सकते हैं. यानी ऐसे लड़ाके सैनिक जो अंतरिक्ष यात्री के तौर पर भी ट्रेंड होंगे. लेकिन हकीकत ज़रा अलग इसलिए है क्योंकि ये लड़ाके वास्तविक रूप से स्पेस में तैनात नहीं होंगे बल्कि अमेरिकी उपग्रहों और अन्य अंतरिक्ष व्हीकलों की सुरक्षा के लिए काम करेंगे. इसी साल फरवरी में इस फोर्स में जनरल जॉन रे रेमंड को प्रमुख के तौर पर नियुक्त किया गया था, जिन्होंने कहा था कि यह फोर्स तकनीक फोकस सर्विस होगी.
ये भी पढ़ें :- ये हैं वो दो महिलाएं, जिन्हें इतिहास में पहली बार नेवी में मिले 'पंख'



क्या है स्पेस फोर्स की ज़रूरत?
रूस और चीन दो बड़े प्रतिद्वंद्वियों के तौर पर अमेरिका के सामने न केवल स्पेस बल्कि सेना के मामले में भी चुनौती पेश करते हैं. 2015 में चीन ने तो एक स्ट्रैटजिक सपॉर्ट फोर्स तैयार की थी, जो उसे स्पेस, सायबर और इलेक्ट्रोनिक से जुड़े युद्ध मिशन में मदद करती है. 2018 में अमेरिकी रक्षा विभाग ने कहा था कि चीन ऐसी हाइपरसॉनिक मिसाइलों में निवेश कर रहा है तो अमेरिकी डिटेक्शन सिस्टम से बच सकें.

US military, US air force, US space program, US news, Donald Trump news, अमेरिकी सेना, अमेरिकी वायु सेना, अमेरिका अंतरिक्ष कार्यक्रम, अमेरिका समाचार, डोनाल्ड ट्रंप न्यूज़
अमेरिकी स्पेस फोर्स मज़ाक की पात्र बनती रही है.


इसके अलावा, रूस और चीन दोनों ही एंटी सैटेलाइट हमलों के लिए तैयारी कर चुके हैं. हालात ये हैं कि अमेरिका बहुत हद तक मौसम, इंटेलिजेंस के लिए बेहतर तस्वीरों और जीपीएस सैटेलाइटों के लिए काफी तौर पर अंतरिक्ष में स्थित उपग्रहों पर निर्भर करता है इसलिए वह अपने उपग्रहों पर कोई जोखिम नहीं ले सकता.

मिडिल ईस्ट में क्यों तैनात हुई फोर्स?
यहां युद्ध अभियानों में मदद करने के लिए स्पेस फोर्स की तैनाती की गई है. अमेरिकी एयरफोर्स के अंतर्गत काम करने वाली इस फोर्स की तैनाती के बारे में खबरें कह रही हैं कि कम्युनिकेशन और सर्विलांस के ज़रिये अमेरिका की सैकड़ों सैटेलाइटों की सुरक्षा इस फोर्स की ज़िम्मेदारी है. अमेरिकी एयरफोर्स की सचिव ने कहा कि स्पेस फोर्स में 16,000 वायु सैनिक और सिविल कर्मी शामिल होंगे.

फोर्स के क्या इरादे हैं?
ट्रंप प्रशासन ने इस फोर्स के पहले साल के लिए 4 करोड़ डॉलर का बजट मंज़ूर किया है. ग्लोबल सिक्योरिटी प्रोग्रमा में सीनियर वैज्ञानिक लॉरा ग्रेगो की मानें तो यह फोर्स वास्तव में, बगैर ​बड़े बजट और सेना के मोटे तौर पर ब्यूरोक्रेटों को नए सिरे से इस्तेमाल करना और उनके पदों को इधर उधर करने का ही कार्यक्रम है. लेकिन यह सेना के लिए कुछ मामलों में अहम भी हो सकता है.

ये भी पढ़ें :-

अपने जेएनयू साथी उमर खालिद की गिरफ्तारी पर क्यों चुप हैं कन्हैया?

ये रिश्ता क्या कहलाता है... चीनी बैंक से भारत के लोन लेने पर क्या है बवाल?

स्पेस.कॉम की रिपोर्ट के मुताबिक पिछले कुछ समय में अमेरिका, चीन और रूस अंतरिक्ष में हथियारों की दौड़ में लगे रहे हैं इसलिए जो उपग्रह सशस्त्र नहीं भी हैं, उन्हें भी इस युद्ध में शामिल होना पड़ रहा है. अब बड़ा सवाल ये है कि क्या इस तरह की फोर्स के गठन से यह तय होगा कि परमाणु युद्ध न हो और निरस्त्रीकरण हो सके या इसका उलट? क्या स्पेस भी एक युद्ध का मैदान बनने जा रहा है?

क्यों आलोचना की शिकार रही स्पेस फोर्स?
उपग्रहों को नुकसान पहुंचाने के लिए अंतरिक्ष को मैदाने जंग बना देने और अंतर्राष्ट्रीय राजनीति के चलते सुरक्षा को दरकिनार कर देने के खतरे देखते हुए विशेषज्ञों ने माना कि यह कदम मानवता के लिए खतरनाक हो सकते हैं. दूसरी तरफ, अमेरिकी स्पेस फोर्स की यूनिफॉर्म व लोगो को 'स्टार ट्रेक' सीरीज़ की नकल बताकर इसका मज़ाक उड़ाया गया. नेटफ्लिक्स पर इसी नाम से एक कॉमेडी सीरीज़ बनाई गई. इस फोर्स को ट्रंप की सनक का नतीजा बताया गया.

बहरहाल, अमेरिका की स्पेस फोर्स अमल में आ चुकी है और अमेरिकी दावों के मुताबिक यह अंतरिक्ष में सिर्फ उपग्रहों की रक्षा के लिए तकनीक आधारित फोर्स है, लेकिन समय बताएगा कि चीन और रूस के साथ संघर्ष में इस फोर्स का इस्तेमाल किस तरह होता है.
अगली ख़बर

फोटो

टॉप स्टोरीज