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कश्मीर पर क्या था पाकिस्तान का खतरा भांपने वाले सावरकर का विज़न?

कश्मीर पर क्या था पाकिस्तान का खतरा भांपने वाले सावरकर का विज़न?

विनायक दामोदर सावरकर. फाइल फोटो.

विनायक दामोदर सावरकर. फाइल फोटो.

सावरकर (Savarkar) की ऐतिहासिक कश्मीर (Kashmir) यात्रा के बारे में जानने के साथ ये भी जानें कि किस तरह सावरकर ने सालों पहले कुछ खतरों के लिए आगाह किया था.

    प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (PM Narendra Modi) ने सावरकर का ज़िक्र करते हुए कश्मीर से अनुच्छेद 370 (Article 370) हटाए जाने के फैसले को वाजिब ठहराया और एक तरह से इसके मूल में सावरकर के राष्ट्रवाद (Hindu Nationalism) को ही मूल भावना करार दिया. इससे पहले मंगलवार को महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव (Maharashtra Election) प्रचार के दौरान भाजपा (BJP) ने घोषणापत्र जारी करते हुए क्रांतिकारी माने जाने वाले विनायक दामोदर सावरकर (Veer Savarkar) को भारत रत्न देने का वादा किया. इस पूरे घटनाक्रम के बीच इतिहास के पन्नों से आपको जानना चाहिए कि सावरकर का कश्मीर कनेक्शन क्या था. क्या सावरकर ने कुछ खतरे भांप लिये थे और कश्मीर के बारे में क्या सावरकर क्या विचार रखते थे?

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    एक ईश्वर, एक देश, एक मकसद...
    ब्रिटिश राज (British India) में काला पानी यानी अंडमान (Andaman) की जेल से सावरकर को रत्नागिरी की जेल में शिफ्ट किया गया था. वहां तीन साल कैद रहने के बाद 1924 में सशर्त छोड़े जाने से पहले सावरकर ने जेल में एक किताब लिख डाली थी और अपने साथी कैदियों में राष्ट्रवाद (Nationalism) का अपना विचार या मंत्र फूंका था. ये विचार था : एक ईश्वर, एक देश, एक लक्ष्य, एक जाति, एक जीवन, एक भाषा.

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    सावरकर का देश के एकीकरण का यह विचार हमेशा से जनसंघ और ​बाद में भाजपा के मैनिफेस्टो में प्रमुखता से रहा है और सावरकर के इस विचार को भाजपा के दिग्गज नेता आदर्श मानते रहे हैं. कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटाए जाने के फैसले को लेकर भी भाजपा ने सावरकर के इस विचार का उल्लेख किया था.

    कश्मीर से रामेश्वरम तक एक भारत!
    सावरकर रचित पुस्तक 'हिंदू राष्ट्र दर्शन' के हवाले से द प्रिंट की रिपोर्ट में उल्लेख है कि हिंदू महासभा की 19वीं वार्षिक सभा में अहमदाबाद के कर्णावती में सावर ने 1937 में एक भाषण में कहा था 'कश्मीर से रामेश्वरम तक और सिंध से असम तक, हिंदोस्तान को एक और अविभाजित ही रहना चाहिए'. इस भाषण में उन्होंने भारत के एकीकरण पर ही नहीं बल्कि देश में एकेश्वरवाद यानी एक ही ईश्वर को माने जाने की व्यवस्था की भी वकालत की थी.

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    सावरकर के विचारों और जीवन वृत्त को समेटती चर्चित किताब का कवर.


    सावरकर की यादगार कश्मीर यात्रा
    जुलाई 1942 में सेहत खराब होने के बावजूद सावरकर एक से ज़्यादा बार कश्मीर गए थे. सावरकर पर वैभव पुरंदरे की चर्चित किताब के एक चैप्टर को मानें तो जम्मू में ​कुछ मुस्लिमों समेत हिंदू बहुल 40 हज़ार लोगों की भीड़ ने सावरकर का स्वागत किया था. इस दौरान वो रावलपिंडी के एक संक्षिप्त प्रवास पर भी गए थे. उस वक्त विभाजन की हामी राजनीतिक पार्टी जम्मू व कश्मीर कॉन्फ्रेंस ने भी सावरकर का स्वागत कर उनसे ​कश्मीर को लेकर चर्चा की थी.

    कश्मीर में क्या बहुमत का सिद्धांत नहीं होना चाहिए? मुस्लिम बहुल आबादी के लिए हिंदू राजा क्यों? जब सावरकर के सामने ये सवाल रखा गया था तब सावरकर ने कटाक्ष करता हुआ जवाब दिया था 'मैं चाहता हूं कि कश्मीर के मुस्लिम इसी सिद्धांत की बात भोपाल और हैदराबाद के मामले में भी करें जहां आबादी हिंदू बहुल है और मुस्लिम शासक हैं'.

    कैसे भांप लिया था सावरकर ने खतरा?
    आज़ादी मिलने के कुछ ही दिनों बाद सितंबर 1947 में सावरकर ने चेतावनी दी थी कि कश्मीर में पाकिस्तानी घुसपैठ का खतरा होगा, जिस पर निगरानी रखते हुए निर्णायक कदम उठाए जाने चाहिए. इसी तरह निज़ाम की बगावत को लेकर भी सावरकर ने आगाह किया था. द एनालिस्ट की रिपोर्ट में इस उल्लेख के साथ यह भी कहा गया है कि सावरकर आधुनिक भारतीय सेना, सीमाओं पर चौकसी और न्यूक्लियर ​हथियारों के हिमायती थे.

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    Tags: Article 370, Jammu and kashmir, Kashmir, Maharashtra asembly election 2019, Pm narendra modi

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