सबसे खराब मौसम वाले 10 मोर्चे, जहां हमेशा मुस्तैद रहती है भारतीय सेना

सबसे खराब मौसम वाले 10 मोर्चे, जहां हमेशा मुस्तैद रहती है भारतीय सेना
कठिन स्थितियों के लिए अभ्यास करते भारतीय सैनिक.

भारतीय सेनाएं (Indian Armed Forces) कई मोर्चों पर दो लड़ाइयां लड़ती हैं, एक दुश्मन के खिलाफ और दूसरी खराब, सख्त या प्रतिकूल मौसम से. साहस और देशभक्ति के लिए हर स्थिति में जान की बाज़ी लगाने वाले फौजियों को सलाम करने के साथ समझना चाहिए कि जंग में जीतने जितना ही अहम है, इतनी मुश्किलों में खुद को लड़ने लायक बनाए रखना.

  • News18India
  • Last Updated: August 18, 2020, 5:53 PM IST
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अखंडता और संप्रभुता की रक्षा करने के लिए भारत की सशस्त्र सेनाएं (Indian Forces) कठिन हालात में मज़बूती से तैनात रहती हैं. पिछले कुछ समय से लद्दाख (Ladakh) स्थित चीन बॉर्डर (Indo-China Border) पर तनाव के चलते भारत के उत्तरी छोर पर अतिरिक्त बल तैनात किए गए हैं, जहां साल में कई महीने कड़ाके की ठंड पड़ती है और पहुंच मार्ग बंद हो जाते हैं. भारत की सीमाओं (India Borders) पर ऐसे कई इलाके हैं जहां हाड़ कंपा देने वाली ठंड या खाल जला देने वाली गर्मी जैसे सख्त हालात होते हैं और ऐसे में भी सेनाएं तैनात रहती हैं.

भारतीय आर्मी (Army), नौसेना (Navy) और वायुसेना (Air Force) के अलावा कोस्टगार्ड जैसे बल अपने साहस, अनुशासन और बगैर शर्त देशभक्ति के लिए जाने जाते हैं. कई बार भारतीय सेना ने विपरीत परिस्थतियों में अपने शौर्य और कौशल का परिचय दिया है. उत्तर से दक्षिण और पूरब से पश्चिम तक भारत की सीमाओं पर कितने कड़े हालात में सेनाएं तैनात रहती हैं, ऐसे 10 स्थानों के बारे में आपको बताते हैं.

-50°C तापमान वाला सियाचिन ग्लेशियर
यह दुनिया की सबसे ऊंची रणभूमि है. 5753 मीटर की ऊंचाई पर काराकोरम पवर्त श्रृंखला के पूर्व में और समुद्र तल से 18875 फीट की ऊंचाई पर स्थित इस रणभूमि में तापमान -50°C तक गिर जाता है. इस इलाके में कुछ सिपाही खराब मौसम की वजह से भी मारे जा चुके हैं. भारत के लिए अहम रणभूमि सियाचिन में पोस्टिंग से पहले फौजियों की कड़ी ट्रेनिंग होती है ताकि वो वहां के मौसम के अनुकूल हो सकें.
सियाचिन ग्लेशियर दुनिया की सर्वोच्च रणभूमि है, जहां भूस्खलन और बर्फीली ज़मीन धंसने की मुश्किलें आम हैं.




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कारगिल युद्ध में अहम रहा द्रास
जम्मू और कश्मीर के कारगिल ज़िले में महज़ 1021 लोगों की आबादी वाला यह छोटा सा कस्बा लद्दाख का द्वार कहलाता है. ये दुनिया का दूसरा सबसे ठंडा स्थान माना जाता है. यहां तकरीबन पूरे साल तापमान 10°C से ज़्यादा नहीं होता, हालांकि 0°C से कम ज़रूर हो जाता है. 1999 में पाकिस्तान के साथ कारगिल युद्ध के बाद से भारत यहां अपनी फौजी ताकत की मौजूदगी मज़बूत बनाए रखता है.

जाड़ों और बाढ़ वाला जम्मू-कश्मीर
कड़ाके की सर्दी और मानसून के मिले जुले असर के चलते यहां स्थितियां प्रतिकूल हो जाती हैं. यहां आतंकवाद और घुसपैठ की समस्याओं के कारण सेनाओं को हर वक्त मुस्तैद रहना होता है. साल 2014 में जब जम्मू-कश्मीर में भयानक बाढ़ आई थी, तब भी सेना ने काफी मदद की थी. इस राहत कार्य में आर्मी, वायु सेना और नौसेना के दलों ने मदद करते हुए करीब 2 लाख लोगों की रक्षा की थी.

भीषण गर्मी वाला राजस्थान बॉर्डर
पाकिस्तान के साथ भारत अपने उत्तर से पश्चिम तक सीमा साझा करता है. एक तरफ उत्तर में बेहद ठंड के हालात हैं, तो राजस्थान में बॉर्डर पर भीषण गर्मी के. यहां तापमान 50°C तक पहुंच जाता है. उस पर मुसीबत ये भी होती है कि धूल की आंधियां, रेतीले बवंडर भी यहां आम हैं और रेगिस्तानी आबोहवा जीने के हालात मुश्किल कर देती है. इस सख्त मौसम के बावजूद यहां सेनाएं लगातार पेट्रोलिंग करती हैं.

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राजस्थान में भारत पाक सीमा पर तापमान 50 डिग्री तक पहुंच जाता है.


भारत की समुद्री रेखा
गुजरात से लेकर दक्षिण भारत और फिर वहां से बंगाल तक देश की समुद्री सीमा का विस्तार है. साल भर देश की नेवी 7500 किलोमीटर लंबी समुद्री सीमा पर तैनात रहती है. 26/11 के हमले के बाद से समुद्री सीमाओं पर सुरक्षा को लेकर नौसेना की भूमिका और अहम हो गई है. इतनी लंबी सीमा पर भारतीय नौसेना बेतरतीब मानसून और तूफानों से जूझती है.

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अंडमान निकोबार द्वीप समूह
बंगाल की खाड़ी और अंडमान समुद्र के बीच स्थित ये द्वीप समूह भारतीय नौसेना और वायु सेना का एक अहम बेस है. यहां बारिश बहुत लंबे वक्त तक होती है और आर्द्रता बनी रहती है, जिसके चलते दोनों ही सेनाओं को खासी मुश्किलों का सामना करना होता है. चूंकि यह इलाका साउथ चाइना सी के पास है, जहां चीनी नौसेना की मौजूदगी भी खासी है, इसलिए यहां सेनाओं को काफी चौकन्ना रहना होता है.

उत्तर पूर्व का छोर अरुणाचल
चीन के साथ 3 हज़ार किलोमीटर से ज़्यादा लंबी सीमा जो भारत साझा करता है, उसका बड़ा हिस्सा अरुणाचल प्रदेश में है. दोनों ही देशों की सेनाएं इस बॉर्डर पर हमेशा मौजूद रहती हैं. यहां हालात कठिन हैं क्योंकि भौगोलिक संरचनाओं के कारण यहां कनेक्टिविटी बेहद मुश्किल है. यहां कठिन पहाड़ी इलाकों में आर्मी के साथ ही वायु सेना अहम रोल अदा करती है. यहां भारी बारिश और ज़्यादा मुश्किल खड़ी कर देती है.

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भारतीय वायुसेना के फाइल फोटो.


बर्फबारी और भारी बारिश वाला सिक्किम
पूरे साल सर्दी के साथ ही यहां बर्फबारी और भारी बारिश के कारण मौसम काफी कठिन हालात बना देता है. यहां धूप खिली हो, ठंड हो या भारी बारिश, हर वक्त फौजियों को चौकन्ना रहना होता है, खासकर पैदल सेना को. यहां हथियार पहुंचाने में वायु सेना भी मौसम के साथ जूझती है. चूंकि भारत के लिए यह इलाका चीनी सेना की गतिविधियों के चलते काफी अहम है, इसलिए यहां मुश्किलों के बावजूद फौजी डटे रहते हैं.

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जेके की तरह उत्तराखंड में भी सख्त मौसम
भारत के इस उत्तरी राज्य में भी कश्मीर की तरह तापमान शून्य से नीचे चला जाता है. इसके साथ ही इस पहाड़ी प्रदेश में मानसून के ज़्यादा मेहरबान रहने से भी यहां हालात मुश्किल हो जाते हैं. चूंकि चीन की तरफ से यहां घुसपैठ को लेकर सतर्क रहना होता है इसलिए कठोर मौसम के बावजूद सेनाएं तैनात रहती हैं. साल 2013 में भारी बाढ़ के वक्त यहां भी सेना और तमाम सशस्त्र बलों ने हज़ारों लोगों का बचाव किया था.

और देश की हवाई सुरक्षा
देश के हवाई क्षेत्र में सुरक्षा और युद्ध की स्थिति में सेना को हवाई मदद देने के लिए ज़िम्मेदार वायु सेना पूरे देश में अपनी मौजूदगी रखती है. उत्तर में चाहे बर्फीले मौसम का सामना करना हो या पश्चिम में भीषण गर्मी में रेतीले तूफानों का या पूर्व में बेहद बारिश का, वायु सेना कठिनाइयों से जूझती है.
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