पानी का पता न चले इसलिए मंगल पर एलियन्स का दावा क्या साज़िश है?

पानी का पता न चले इसलिए मंगल पर एलियन्स का दावा क्या साज़िश है?
मंगल पर जीवन संबंधी खोज कई अंतरिक्ष एजेंसियां कर रही हैं. फाइल फोटो.

नासा (NASA) पर आरोप क्यों लगाए गए? इन आरोपों में कितनी सच्चाई है? ये भी जानें कि मंगल (Mars) पर एलियन्स और पानी को लेकर ताज़ा शोध क्या कह रहे हैं.

  • News18Hindi
  • Last Updated: September 28, 2019, 4:34 PM IST
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नईदिल्ली. नासा का सबसे खास मिशन (Mars Mission) रहा है कि मंगल ग्रह पर पानी (Water on Mars) किसी तरह खोज लिया जाए ताकि लाल ग्रह (Red Planet) पर मनुष्यों के जीवन की संभावना को लेकर आगे बढ़ा जा सके. इस बीच कुछ समय से नासा मंगल पर एलियन्स (Aliens on Mars) के होने की खबरों और दावों का प्रचार कर रहा है. बिल्कुल संभव है कि दोनों दिशाओं में एक साथ आगे बढ़ा जा रहा हो लेकिन एलियन्स थ्योरिस्ट ने ये दावा कर चौंका दिया है कि मंगल पर एलियन्स की खबरों की आड़ में नासा साज़िशन (NASA Conspiracy) पानी मिल जाने की बात छुपा रहा है.

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अब सवाल ये खड़ा होता है कि वाकई मंगल पर पानी खोजे जाने (Water Found on Mars) के प्रमाण हाथ लग चुके हैं और क्या वाकई नासा ये साज़िश कर रहा है कि दुनिया को इस बारे में पता न चले. पृथ्वी (Earth) के अलावा और किसी ग्रह पर जीवन (Life Beyond Earth) मुमकिन है, क्या सच में ये साबित हो चुका है? तथ्यों और तर्कों के हवाले से इस पूरे मामले का सच जानिए.



नासा पर सच छुपाने का आरोप
अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी पर ये आरोप एक एलियन थ्योरिस्ट स्कॉट वॉरिंग ने लगाया है. असल में, यूएफओलॉजिस्ट ने ईटीडेटाबेस पर लिखे गए एक ब्लॉग के हवाले से जो रिपोर्ट प्रकाशित की है, उसके मुताबिक वॉरिंग ने​ लिखा है 'मुझे पता चला ​कि पहाड़ीनुमा संरचनाओं से पानी बहता हुआ पाया गया. मंगल ग्रह की ये तस्वीर अगस्त 2014 में ली जा चुकी थी लेकिन मुझे कुछ ही महीने पहले देखने को मिली. इसके बावजूद नासा ने अब तक इस तरह पानी मिलने की कोई घोषणा नहीं की है'.

क्यों लगाया गया है ये आरोप?
वॉरिंग का दावा है कि इस सच को छुपाए जाने के पीछे ज़रूर नासा को कोई गुप्त मकसद है. उन्होंने नासा के पूर्व सहयोगी प्रशासक जॉन ग्रन्सफील्ड के 2015 के बयान का हवाला भी दिया कि तब उन्होंने कहा था 'मंगल पर हमारी खोज का मिशन पूरी तरह पानी को लेकर है'. अब आरोप है कि एक साल पहले मिले सबूत के बावजूद इस तरह का बयान क्यों दिया गया और क्यों उस सच को छुपाया गया.

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मंगल ग्रह पर पानी होने के संबंध में आईबीटी ने अनुमानित ग्राफिक्स के ज़रिए एक वीडियो जारी किया है.


क्या है इस तस्वीर का सच?
वॉरिंग ने इस तस्वीर का खुलासा अपने ब्लॉग पर करते हुए कहा कि ये पानी का इतना बड़ा प्रवाह है कि इस पर नज़र न गई हो, ऐसा मुमकिन नहीं हो सकता. 'इसका मतलब यही है कि नासा ने इसे जानबूझकर दुनिया से छुपा रखा है.' ये भी कहा गया है कि इस बात पर जांच की जा सकती है कि ये प्रवाहित धाराएं पानी की हैं या किसी और द्रव की, लेकिन इस बारे में नासा का कोई भी खुलासा न करना शक पैदा करता है.

क्या वाकई ये आरोप विश्वसनीय हैं?
वॉरिंग और यूएफओ द्वारा जो आरोप लगाए गए हैं, उनको लेकर आईबीटी ने जो रिपोर्ट छापी है, उसमें कहा गया है कि पहली बात तो ये है कि वॉरिंग मंगल ग्रह पर जीवन को लेकर वॉरिंग पहले भी बेहद संदिग्ध स्रोत रहे हैं और कई तरह की भ्रामक बातें कर चुके हैं. दूसरी बात ये है कि पृथ्वी के अलावा कहीं और जीवन को लेकर यूएफओ पहले भी चौंकाने वाले दावे करता रहा है. कुल मिलाकर नासा पर साज़िश के आरोपों को लेकर असमंजस बरकरार है और कहा नहीं जा सकता कि सच क्या है. अब ये जानें कि एलियन्स थ्योरी क्या है?

मंगल पर क्या सच में हैं जीवित एलियन्स?
अपने मंगल अभियान के चलते नासा अक्सर मंगल पर एलियन्स के जीवन के बारे में बात करता रहा है. इस साल जून में इंडिपेंडेंट की एक खबर थी कि नासा के क्यूरियॉसिटी रोवर ने मंगल ग्रह पर भारी मात्रा में मीथेन गैस के सबूत खोजे जिससे ग्रह पर एलियन्स के होने की संभावना ज़ोर पकड़ती है.

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आईबीटी के एक वीडियो में मंगल के कुछ कंप्यूटराइज़्ड चित्रों के ग्राफिक्स दर्शाए गए हैं.


इससे पहले नासा के चीफ के हवाले से 'स्पेस' ने इसी साल फरवरी में एक रिपोर्ट में कहा था 'तीन अहम खुलासे हैं : लाल ग्रह की सत्ह पर कॉम्प्लेक्स जैविक अणु हैं यानी कि कार्बन आधारित कुछ ब्लॉक हैं जो जीवन की संभावना है. दूसरा, बायोजेनिक गैस मीथेन की मौजूदगी है और मौसमों के साथ बदलाव भी देखा गया है और तीसरा ये कि मंगल के दक्षिण ध्रुव के निचले स्तर पर प्रचुर पानी की संभावना है. पहली दो खोजें नासा के क्यूरियॉसिटी रोवर के हवाले से बताई गईं और बाकी दो यूरोप के मार्स एक्सप्रेस के हवाले से. ये भी कहा गया कि मंगल पर एलियन्स के होने या कभी रहने की पुष्टि नहीं होती लेकिन इन खोजों से संभावना ज़रूर बनती है.

और पानी की खोज क्या है?
मंगल पर पानी की खोज दुनिया भर की स्पेस एजेंसियों के साथ ही नासा का भी अहम मिशन रहा है. समय समय पर पानी होने को लेकर कई तरह की खबरें आती रही हैं और ताज़ा खबर ये है कि मंगल पर कुछ चुंबकीय स्पंदन या एक ऐसा चुंबकीय क्षेत्र मिला है जिसमें कंपन और हलचल महसूस की गई है. नेशनल जियोग्राफिक की हालिया खबर के मुताबिक यह रहस्यमयी है लेकिन संभावना जताई गई है कि इस परत में इतना पानी हो सकता है जिसे ग्लोबल रिज़र्वायर माना जा सकता है. वैज्ञानिकों के हवाले से कहा गया है कि पृथ्वी पर भी पानी समुद्रों के भीतर रेत, चट्टानों और मिट्टी में प्रवाहित रहा है इसलिए मंगल पर भी ऐसा कुछ हुआ तो हैरानी नहीं होगी.

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