जहां नदियां नहीं हैं जलस्रोत, मध्य पूर्व के उन देशों में कैसे बुझती है प्यास?

#MISSIONPAANI : कुदरती रिचार्ज होने वाले जल संसाधनों से जितना पानी मिलता है, उससे 250% से 2500% तक ज़्यादा पानी बहरीन, सऊदी अरब और कुवैत इस्तेमाल करते हैं. जानें कैसा है दुनिया के सबसे सूखे इलाके यानी मिडिल ईस्ट में जलसंकट.

News18Hindi
Updated: July 16, 2019, 2:49 PM IST
जहां नदियां नहीं हैं जलस्रोत, मध्य पूर्व के उन देशों में कैसे बुझती है प्यास?
दुनिया का सबसे सूखा और बंजर इलाका है मिडिल ईस्ट.
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पानी. इस शब्द की कीमत अगर समझना हो तो कभी मध्य पूर्व में वक्त बिताइए. मिडिल ईस्ट और उत्तरी अफ्रीका के कई देश ऐसे हैं, जहां नदियां और प्राकृतिक झीलें नहीं हैं. सोचिए कि वहां पीने का पानी कितनी कीमत रखता होगा. ये तो शायद सोचा जा भी सकता है, लेकिन ये समझना भी कितना ज़रूरी और दिलचस्प है कि पानी कैसे यहां देशों की राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ा है. क्योंकि, युद्ध हुआ या किसी तनाव के चलते किसी समझौते में दरार आई, तो हारने वाले देश की आबादी के सामने प्यास से मरने तक की नौबत आ सकती है. आइए जानें कि मध्य पूर्व के उन देशों की प्यास कैसे बुझती है, जहां नदियां और झीलें नहीं हैं.

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दुनिया की छह फीसदी से ज़्यादा आबादी मिडिल ईस्ट और उत्तरी अफ्रीका के कुछ देशों में रहती है, लेकिन दुनिया के पीने लायक कुदरती पानी का सिर्फ 2 फीसदी यहां मौजूद है. अल्जीरिया, कुवैत, जॉर्डन, लीबिया, ओमान, फिलीस्तीन, कतर, सऊदी अरब, ट्यूनीशिया, यूएई और यमन में 12 मुल्क ऐसे हैं, जो दुनिया के सबसे सूखे क्षेत्र हैं और जहां जलसंकट सबसे बड़ा है.

यहां पानी की औसतन उपलब्धता 1200 क्यूबिक मीटर है, जो दुनिया के औसत 7000 क्यूबिक मी​टर की तुलना में करीब छह गुना कम है. मध्य पूर्व और उत्तरी अफ्रीका में पानी की मांग जितनी है, उतनी सप्लाई नहीं है. संकट केवल इतना नहीं बल्कि ये भी है कि आबादी के साथ मांग लगातार बढ़ रही है लेकिन उपलब्धता नहीं. एक अनुमान के मुताबिक 2050 तक प्रति व्यक्ति पानी की उपलब्धता आधी रह जाएगी. आइए जानें कि कौन से जलस्रोत या तकनीकें यहां प्यास बुझाने में कारगर साबित होती हैं.

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दो नदियों के पानी की पहुंच
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टि​गरिस और यूफरेट्स, ये दो नदियां मिडिल ईस्ट में पीने के पानी का सबसे बड़ा स्रोत हैं. तुर्की के पहाड़ों से पानी लेकर ये दो नदियां सीरिया और इराक होते हुए दक्षिण पूर्व की तरफ जाती हैं. इन दो नदियों पर 22 बांध और 19 हाइड्रोलिक प्लांट बने हैं. तुर्की, सीरिया और इराक के बीच इन नदियों के पानी के बंटवारे को लेकर झगड़ों का पूरा इतिहास रहा है क्योंकि ये नदियां 90 लाख की आबादी की प्यास के बीच बहती हैं.

1990 के दशक में सद्दाम हुसैन के पतनकाल के समय इराक के खिलाफ जाकर तुर्की और सीरिया ने इराक में इन नदियों के पानी की सप्लाई रोक दी थी. सद्दाम हुसैन सरकार गिरने के बाद इराक के लिए पानी की उपलब्धता बहाल की गई थी. यानी समझा जा सकता है कि जंग के हालात में किसी देश पर पानी का कितना बड़ा संकट आ सकता है. बहरहाल, इन दो नदियों का पानी उन देशों तक नहीं पहुंचता, जहां नदियां न होने के कारण जलसंकट सबसे बड़ा है.

भूमिगत पानी पर निर्भरता कितनी है?
अरेबियाई प्रायद्वीप दुनिया का सबसे सूखा या बंजर इलाका है. यहां बारिश बहुत कम होती है, गर्मी ज़्यादा होने के कारण वाष्पीकरण ज़्यादा होता है और कुदरती पानी के स्रोत बेहद सीमित हैं. स्टोर्ड ग्राउंड वॉटर यानी भंडारित भूमिगत जल इस इलाके के लिए बहुत महत्वपूर्ण है. इस भूमिगत जल में कुछ एक्विफर यानी जलभर या जलधाराएं भी शामिल हैं. ये एक्विफर 20 से 200 मीटर तक की गहराई के हैं और इनका फैलाव 200 मीटर से 200 किलोमीटर तक है. इन उथले एक्विफरों में पानी की क्वालिटी अच्छी है.

इनके अलावा, फॉसिल ग्राउंड वॉटर यानी जीवाश्मिक भूमिगत जल के एक्विफर भी हैं, लेकिन ये पानी रिचार्जेबल नहीं है यानी जितना है, उतना ही है. हज़ारों साल पुराने ये तमाम एक्विफर कुवैत, बहरीन, कतर, यूएई, ओमान, यमन, जॉर्डन, सीरिया और इराक में पाए जाते हैं. सऊदी अरब के दो तिहाई हिस्से में ये एक्विफर फैले हुए हैं. एक छोटा जलस्रोत वादियों में है, जहां छोटी, पतली धाराएं और झरने भी पाए जाते हैं, जो बहुत छोटी आबादी के लिए सीमित जल संसाधन हैं.

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यूएई में लगा डिसेलिनेशन प्लांट. समुद्र के खारे पानी को पीने लायक बनाने की तकनीक से पानी बनाने वाला दुनिया का सबसे बड़ा देश सऊदी अरब है.


समुद्री पानी को पेयजल बनाने की तकनीक
समुद्र के खारे पानी को पीने लायक बनाने की तकनीक वास्तव में इस पूरे इलाके की प्यास बुझाने का सबसे बड़ा स्रोत बन चुका है. इस तकनीक से पानी बनाने वाला दुनिया का सबसे बड़ा देश सऊदी अरब है. आने वाले समय में पानी की डिमांड बढ़ेगी और उपलब्धता चुनौती होगी, ऐसे में घरेलू पानी की सप्लाई के इस तकनीक में निवेश ही सबसे अहम उपाय रह गया है. अब नीतियों में इस बात का ध्यान रखा जा रहा है कि किस तरह के पानी को कैसे इस्तेमाल किया जाए.

यानी पीने या घरेलू उपयोग के लिए समुद्री पानी से बने पेयजल का उपयोग और कृषि और सिंचाई के लिए सीमित एक्विफरों के पानी के उपयोग किए जाने पर कुछ गाइडलाइन्स बन चुकी हैं और कुछ पर विचार हो रहा है.

एक तकनीक और है, वेस्ट वॉटर रिसाइकिलिंग
उपयोग किए जा चुके या गंदे पानी को रिसाइकिल कर उसे फिर उपयोग में लाने की तरकीब भी इस क्षेत्र में बड़े पैमाने पर अपनाई जा रही है. इस तरह के पानी को उद्योगों और कृषि क्षेत्र में सप्लाई करने संबंधी नीतियां बन रही हैं ताकि सभी जलस्रोतों से उपलब्ध हो रहे पानी को ठीक ढंग से इस्तेमाल किया जा सके और खाने-पीने के लिए अच्छी क्वालिटी के पानी की उपलब्धता बनी रहे.

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तापमान में बढ़ोत्तरी के चलते सीरिया की 60 फीसदी ज़मीन रेगिस्तान बनने की तरफ है.


 

आखिर में आंकड़ों की ज़ुबानी ज़मीनी हकीकत
* वॉटर टेबल में पिछले 30 सालों में यूएई में हर साल एक मीटर की गिरावट दर्ज हुई. इस दर से अनुमान है कि 50 सालों में यूएई में प्राकृतिक फ्रेश पानी संसाधन शून्य हो जाएंगे.
* दुनिया भर में समुद्र से पेयजल बनाने की तकनीक से बनने वाले पानी का 75 फीसदी मध्य पूर्व और उत्तर अफ्रीका में है, जिसमें से 70 फीसदी सउदी अरब, कुवैत, कतर, बहरीन और यूएई में है.
* मध्य पूर्व व उत्तर अफ्रीका में 85 फीसदी पानी की मांग कृषि क्षेत्र में है. पानी बचाने में कारगर कृषि तकनीकें अपनाने पर विचार और ज़ोर की प्रक्रिया जारी है.
* क्लाइमेट चेंज के कारण चुनौतियां और बढ़ रही हैं. बारिश 20 फीसदी तक घट चुकी है. उदाहरण के तौर पर तापमान में बढ़ोत्तरी के चलते सीरिया की 60 फीसदी ज़मीन रेगिस्तान बनने की तरफ है.
* सात सालों के विश्लेषण के बाद 2009 में एक रिपोर्ट में कहा गया था कि इस पूरे क्षेत्र में फ्रेश पानी के रिज़र्वों से उतना पानी घट चुका है, जितना पानी पूरे मृत सागर यानी डेड सी में होता है.

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First published: July 16, 2019, 2:49 PM IST
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