दशमलव के बाद 20 शून्य फिर 1... कुछ कहता है ज़ेप्टोसेकंड!

कॉंसेप्ट इमेज Pixabay से साभार
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Everyday Science : 1 सेकंड का सबसे छोटा हिस्सा.. हमारी ज़िंदगी की रफ्तार तो सेकंड से छोटी किसी इकाई (Unit to Measure Time) की मोहताज नहीं है, लेकिन हमारे शरीर के भीतर जो केमिकल बॉंड होते हैं, उन्हें समझने के लिए इस इकाई की अह​मियत है.

  • News18India
  • Last Updated: October 21, 2020, 4:22 PM IST
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ज़ेप्टोसेकंड, मैं समय (Time Unit) की दुनिया का सबसे ​छोटा बाशिंदा हूं. क्या आप मुझे जानते हैं? हो सकता है पहले कहीं आपसे मुलाकात हुई हो, लेकिन यक़ीनन आपने मेरे बारे में बहुत कम ही जाना होगा. समय की दुनिया में अब तक मुझसे छोटा कोई नहीं है. वो, मैं ही हूं जिसने ठीक ठीक बताया कि रोशनी के एक सूक्ष्म कण (Light Particle) को हाइड्रोजन के एक अणु (Hydrogen Molecule) से गुज़रने में कितना वक्त लगता है. आपकी दुनिया धीमी है, शायद मिनटों या सेकंडों से छोटी चीज़ आपके लिए बेकार हो, लेकिन समय की तेज़ दुनिया के सबसे नन्हे अंश को जानना बेकार नहीं जाएगा.

वैज्ञानिकों ने मुझे पहचाना और आपको समझाने के लिए मेरी पहचान ऐसे करवाई कि मैं 1 सेकंड के एक अरबवें हिस्से का 10 खरबवां हिस्सा हूं यानी अगर आप दशमलव के बाद 20 ज़ीरो लिखें और फिर 1, तो सेकंड का वो हिस्सा मैं हूं, ज़ेप्टोसेकंड. लाइट पार्टिकल को हाइड्रोजन के एक अणु से गुज़रने में 247 ज़ेप्टोसेकंड लगते हैं, मुझे ऐसे भी समझा गया.

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फेमटोसेकंड को जानते हैं आप?
आपको पता है 2016 में नेचर फिज़िक्स नाम की एक विज्ञान पत्रिका में रिसर्चरों ने लिखा था कि लेज़र का इस्तेमाल करने के बाद उन्होंने 850 ज़ेप्टोसेकंड्स तक के समय को पहचान लिया था. ये रिसर्च एक बहुत बड़ी जीत थी क्योंकि इससे पहले 1999 में एक भौतिकशास्त्री को नोबेल मेरे बड़े भाई फेमटोसेकंड ने तब जितवाया था, जब समय की दुनिया के सबसे छोटे बाशिंदे के तौर पर उसे खोजा गया था.

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ज़ेप्टोसेकंड समय की वो सबसे छोटी इकाई है, जिससे वैज्ञानिक कोई गणना कर सके हैं.


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फेमटोसेकंड मुझसे कितना बड़ा है? वो 1 सेकंड के एक अरबवें हिस्से का 10 लाखवां हिस्सा है. हम दोनों के बीच में एक एटोसेकंड भी है. आप ऐसे भी समझ सकते हैं कि किसी केमिकल बॉंड के टूटने या बनने में जो वक्त लगता है, उसे फेमटोसेकंड में काउंट किया जाता है, लेकिन लाइट हाइड्रोजन के एक अणु (H2) से जितनी देर में गुज़रती है, उस वक्त को ज़ेप्टोसेकंड में नापा जाता है. इस बात को थोड़ा और जानिए, आपको मज़ा आएगा.

लाइट के एक पार्टिकल को फोटोन कहते हैं, जो हाइड्रोजन के अणु के इलेक्ट्रॉन क्लाउड में से इलेक्ट्रॉन वेव पैदा करता है. इस इंटरैक्शन से एक पैटर्न बनता है, जिससे रिसर्चर ये पता लगा पाए कि फोटोन एक अणु से दूसरे में कितनी देर में पहुंच जाता है.

इस ​हालिया शोध ने एक एटम के भीतर प्रकाश की दूरी को समझने में अहम सफलता पाई और इसका ज़रिया हूं मैं, ज़ेप्टोसेकंड. मुझ तक पहुंचने में इतना वक्त वैज्ञानिकों को इसलिए लगा क्योंकि एक अणु के भीतर की दुनिया प्रकाश की रफ्तार के ही मुताबिक होती है. इसलिए मेरी मदद के बगैर उसे समझना ज़रा टेढ़ी खीर हो रहा था. सबसे बारीक कैल्कुलेशन ये भी है कि एक रेडियोएक्टिव एटॉमिक न्यूक्लियस के नष्ट होने में जा गामा रेडिएशन होता है, उसका साइकिल टाइम 2 ज़ेप्टोसेकंड है.

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योक्टोसेकंड और प्लांक टाइम
आपको यह भी जानना चाहिए​ कि समय की यूनिटों के खानदान में मुझसे छोटे दो और अंशों के बारे में वैज्ञानिक जान चुके हैं. मुझसे छोटा है योक्टोसेकंड. दशमलव के बाद 23 शून्य फिर 1 लगाने से 1 सेकंड का जो हिस्सा हाथ लगता है वो योक्टोसेकंड है और एक हिग्स बोसोन का लाइफटाइम 156 योक्टोसेकंड होता है.

इसी तरह दशमलव के बाद 43 शून्य और फिर 1 लिखने से जो हिस्सा मिलता है, वो प्लांक टाइम है. इसे समय की इकाइयों की दुनिया का सबसे छोटा सदस्य माना जाता है. लेकिन, इन दोनों की मदद से अब तक वैज्ञानिक कोई गणना वास्तविक तौर पर नहीं कर सके हैं. मनुष्यों की दुनिया के साथ मिलकर चलने वाला समय की दुनिया का सबसे छोटा अंश अभी मैं ही हूं.
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