कौन हैं जोमैटो के फाउंडर, जिनकी सोशल मीडिया पर हो रही है खूब तारीफ

जोमैटो एक युवा उद्यमी दीपेन्दर गोयल के आयडिया की वजह से अस्तित्व में आया. इसके फाउंडर दीपेन्दर गोयल ने अपने पुराने दोस्त पंकज चड्ढा के साथ मिलकर जोमैटो की शुरुआत की थी. आज ऑनलाइन फूड डिलीवरी करने वाली कंपनी 22 देशों के 10 हजार शहरों में सेवाएं दे रही है.

News18Hindi
Updated: August 1, 2019, 5:01 PM IST
कौन हैं जोमैटो के फाउंडर, जिनकी सोशल मीडिया पर हो रही है खूब तारीफ
जोमैटो के फाउंडर दीपेन्दर गोयल
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Updated: August 1, 2019, 5:01 PM IST
एक मुस्लिम डिलीवरी बॉय से खाना लेने से इनकार करने वाले मामले में जोमैटो की खूब तारीफ हो रही है. मध्य प्रदेश के जबलपुर के इस मामले में जोमैटो ने फूड डिलीवरी कैंसिल करने के मना कर दिया था. जोमैटो की तरफ से कहा गया कि सिर्फ मुस्लिम डिलीवरी बॉय होने की वजह से खाना कैंसिल नहीं किया जा सकता. जब इस मामले ने सोशल मीडिया पर तूल पकड़ा तो जोमैटो की तरफ से ट्वीट किया गया- Food doesn’t have a religion. It is a religion. यानी खाने का कोई धर्म नहीं होता है. खाना खुद में एक धर्म है. जोमैटो के इस ट्वीट की खूब तारीफ हुई.

जोमैटो एक युवा उद्यमी दीपेन्दर गोयल के आयडिया की वजह से अस्तित्व में आया. इसके फाउंडर दीपेन्दर गोयल ने अपने पुराने दोस्त पंकज चड्ढा के साथ मिलकर जोमैटो की शुरुआत की थी. आज ऑनलाइन फूड डिलीवरी करने वाली कंपनी 22 देशों के 10 हजार शहरों में सेवाएं दे रही है. सिर्फ दिल्ली-एनसीआर में इस कंपनी ने 1200 रेस्टोरेन्ट्स के साथ करार किया है. ये ऑनलाइन फूड डिलीवरी की एशिया में ही नहीं बल्कि पूरी दुनिया की सबसे बड़ी कंपनी है.

इसके फाउंडर दीपेन्दर गोयल की निजी जिंदगी के बारे में ज्यादा जानकारी नहीं मिलती. दीपेन्दर शांत और शर्मीले स्वभाल के हैं, इसलिए कारोबार में जबरदस्त कामयाबी हासिल करने के बाद भी सफलता का नशा उनके सिर चढ़कर नहीं बोला.

दीपेन्दर का जन्म पंजाब के एक मध्यमवर्गीय परिवार में हुआ था. आईआईटी दिल्ली से उन्होंने पढ़ाई की है. किसी भी आम पंजाबी की तरह दीपेन्दर भी खाने के शौकीन रहे हैं. इसी शौक ने जोमैटो की कल्पना को साकार किया.

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जोमैटो 22 देशों के 10 हजार शहरों में अपनी सेवाएं दे रही हैं


कैसे अस्तित्व में आया जोमैटो

दीपेन्दर गोयल ने 2005 में आईआईटी से अपनी पढ़ाई पूरी की. जनवरी 2006 में उन्होंने बेन एक कंपनी में सीनियर एसोसिएट कंसलटेंट के बतौर जॉब जॉइन की. इसी ऑफिस में रहते हुए उन्होंने पहले फूडी-ईबे डॉट कॉम के नाम से ऑनलाइन फूड प्रोवाइड करवाने वाली कंपनी खोली, जिसका नाम बाद में बदलकर जोमैटो कर दिया.
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जोमैटो को शुरू करने के पीछे दिलचस्प कहानी है. दीपेन्दर को इसका आयडिया अपने ऑफिस के कैफेटेरिया में आया. दीपेन्दर देखा करते थे कि लंच टाइम में खाने के मेन्यू को लेकर उनके ऑफिस के लोग काफी सिर खपाते थे. इसमें लोगों का काफी वक्त बर्बाद होता था. यहीं से दीपेन्दर के दिमाग में एक ऑनलाइन वेबसाइट का आयडिया आया. दीपेन्दर ने अपने दोस्त पंकज चड्ढा के साथ मिलकर एक ऐसी वेबसाइट बनाने की सोची, जिसमें इलाके के सभी रेस्टोरेंट के सारे मेन्यू उनके ऑफिस के लोगों के लिए उपलब्ध हों.

दीपेन्दर ने इसे बड़े सिंपल तरीके से शुरू किया. लेकिन उनकी कल्पना के विपरित वेबसाइट पर काफी ट्रैफिक आने लगा. इसी के बाद दोनों ने मिलकर 2008 में फूडी-इबे डॉट कॉम बनाई. इस वेबसाइट के लॉन्च होने के बाद नए दीपेन्दर के लिए नए दरवाजे खुल गए. उन्होंने अपने ऑफिस के इर्द-गिर्द रेस्टोरेंट के साथ दूसरे इलाके के रेस्टोरेंट को भी जोड़ना शुरू किया.

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जोमैटो ऑनलाइन फूड प्रोवाइड करवाने वाली सबसे बड़ी कंपनी बनी


ऐसा बनी जोमैटो ऑनलाइन फूड प्रोवाइड करवाने वाली सबसे बड़ी कंपनी

यहां तक कि कोलकाता, मुंबई, बेंगलुरु और पुणे में इसकी सर्विस देनी शुरू की. दीपेन्दर चौबीस घंटे काम कर रहे थे. दिन मे ऑफिस में और रात में अपनी ऑनलाइन फूड डिलीवरी वाली कंपनी के लिए. उन्होंने ज्यादा से ज्यादा रेस्टोरेंट को अपने साथ जोड़ने का टारगेट रखा. शुरुआत के दो साल उन्होंने बिना किसी बड़े इनवेस्टमेंट और प्रोफेशनल टीम के कंपनी चलाई. लेकिन बाद में इसकी जरूरत महसूस की जाने लगी.

उसी वक्त नौकरी डॉट कॉम की पैरेंट कंपनी इंफो एज ने उनके वेंचर में 1 मिलियन डॉलर का इनवेस्टमेंट कर दिया. अगस्त 2011 के इनवेस्टमेंट के बाद इनकी गाड़ी चल पड़ी. इसी के बाद इन्होंने फूडी-इबे डॉट कॉम से नाम बदलकर जोमैटो डॉट कॉम कर दिया.

जोमैटो ने साल 2012 में दुबई, यूएई, श्रीलंका, कतर, ब्रिटेन, फिलीपींस और साउथ अफ्रीका में भी अपनी सेवाएं देनी शुरू कर दी.

2011-12 में जोमैटो मीडिया प्राइवेट लिमिटेड ने 2.04 करोड़ का मुनाफा कमाया. 2012-113 में ये बढ़कर 11.38 करोड़ हो गया. 2015 तक इसका मुनाफा बढ़कर 96.7 करोड़ हो गया.

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First published: August 1, 2019, 4:57 PM IST
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