राहुल ने जिसका जिक्र कर साधा पीएम मोदी पर निशाना, जानें क्या है वो शिमला समझौता

कश्मीर मसले पर ट्रंप के बयान के बाद राजनीतिक बवाल मचा है. राहुल गांधी ने कहा है कि ये 1972 के शिमला समझौते के साथ धोखा है. जानिए आखिर क्या कहता है शिमला समझौता

News18Hindi
Updated: July 23, 2019, 11:57 PM IST
राहुल ने जिसका जिक्र कर साधा पीएम मोदी पर निशाना, जानें क्या है वो शिमला समझौता
समझौते पर दस्तखत करते इंदिरा गांधी और जुल्फिकार अली भुट्टो
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Updated: July 23, 2019, 11:57 PM IST
कश्मीर मसले को लेकर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के दावे पर देश की राजनीति में बवाल मचा है. इस मुद्दे पर संसद में भी हंगामा हुआ है. राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री मोदी पर निशाना साधा है. राहुल ने ट्वीट कर कहा है कि अगर ट्रंप का दावा सही है तो पीएम मोदी ने भारत के हितों और 1972 के शिमला समझौते को धोखा दिया है. हालांकि विदेश मंत्रालय ने ट्रंप के दावे का खंडन किया है. लेकिन ट्रंप के बयान को लेकर बवाल खत्म होने का नाम नहीं ले रहा है.

दरअसल अमेरिका दौरे पर गए इमरान खान के साथ मुलाकात में डोनाल्ड ट्रंप ने खुलासा किया था कि कश्मीर मसले पर प्रधानमंत्री मोदी ने मध्यस्थता का ऑफर दिया था. ट्रंप ने इमरान से बातचीत में कहा था कि वो कश्मीर मसले पर मध्यस्थता के लिए तैयार हैं और पीएम मोदी ने भी उन्हें मध्यस्थता करने को कहा था.

पूरा सवाल मध्यस्थता को लेकर ही है. मध्यस्थता को लेकर शिमला समझौते का हवाला क्यों दिया जा रहा है? राहुल गांधी क्यों कह रहे हैं कि ये शिमला समझौते के साथ धोखा है? इस बात को समझने के लिए 1972 में हुए भारत पाकिस्तान के बीच शिमला समझौते को बारीकी से जानना होगा.

क्या कहता है 1972 का शिमला समझौता ?

1971 के भारत-पाकिस्तान युद्ध में पाकिस्तान की बुरी तरह से हार हुई थी. पाकिस्तान के करीब 90 हजार युद्धबंदी भारत की कैद में थे. पाकिस्तान ने अपने युद्धबंदियों को छुड़ाने और अपने सैनिकों को वापस पाने के लिए कोशिशें शुरू कीं. दोनों देशों ने 2 जुलाई 1972 को शिमला में एक समझौते पर हस्ताक्षर किए. इसे ही शिमला समझौता के नाम से जाना जाता है. भारत की तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी और पाकिस्तान के तत्कालीन राष्ट्रपति जुल्फिकार अली भुट्टो ने समझौते पर दस्तखत कर दोनों देशों के अच्छे रिश्तों की दिशा में मजबूत कदम बढ़ाए थे. हालांकि पाकिस्तान का मुख्य मकसद अपने सैनिकों की वापसी थी.

शिमला समझौते में भारत पाकिस्तान के बेहतर पड़ोसी बने रहने के लिए कुछ नियम कायदे बनाए गए थे. जिसका दोनों देशों को पालन करना था. इस समझौते की अहम बातें इस तरह से थीं-

-सबसे अहम बात तो यही थी कि दोनों देशों के बीच भविष्य में जब भी बातचीत होगी, कोई मध्यस्थ या तीसरा पक्ष नहीं होगा. दोनों देश मिलकर समस्या का हल निकालेंगे.
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-दोनों देश आपसी संबंधों को खराब करने वाले विवादों और संघर्षों को खत्म करने की दिशा में काम करेंगे. दोनों सरकारें दोस्ताना और अच्छे संबंधों को बढ़ावा देंगे. शांति स्थापना के लिए और अपने लोगों के कल्याण के लिए संसाधनों और उर्जा का इस्तेमाल करेंगे.

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2 जुलाई 1972 को हुआ था शिमला समझौता


-दोनों देशों के संबंध संयुक्त राष्ट्र चार्टर के सिद्धांतों और प्रस्तावों के मुताबिक निर्धारित होंगे. दोनों पक्ष मतभेदों के निपटारे के लिए शांतिपूर्ण साधनों का इस्तेमाल करेंगे. अगर किसी समस्या का समाधान द्विपक्षीय वार्ता से नहीं निकल पाता है और मामला लंबित रहता है तो दोनों में से कोई भी अपनी तरफ से एकतरफा बदलाव की कोशिश नहीं करेगा. किसी भी ऐसे काम को प्रोत्साहित नहीं किया जाएगा, जिसकी वजह से दोनों पक्षों के बीच के संबंध तनावपूर्ण बने.

-दोनों देश एकदूसरे के शांतिपूर्ण सहअस्तित्व के लिए प्रतिबद्ध होंगे. एकदूसरे की प्रादेशिक अखंडता और संप्रभुता का सम्मान करेंगे.

-दोनों देशों के बीच सहमति बनी कि पिछले 25 वर्षों के दौरान जिन वजहों से संबंधों में कड़वाहट आई है उसे दूर करने की दिशा में काम किया जाएगा. संघर्ष के मामलों को शांतिपूर्ण तरीके से निपटाया जाएगा.

-दोनों देशों ने संकल्प लिया कि वो एकदूसरे के खिलाफ प्रोपेगेंडा से बचेंगे. एकदूसरे प्रादेशिक अखंडता का सम्मान करेंगे और राजनीतिक स्वतंत्रता के लिए न खतरा पैदा करेंगे न ही किसी तरह का बल का प्रयोग करेंगे.

-दोनों देश संचार के माध्यमों का इस्तेमाल कर बेहतर माहौल बनाएंगे. डाक, टेलिग्राफ सेवा के साथ समुद्री और हवाई लिंक को बहाल करने की दिशा में काम करेंगे. दोनों देश अपने नागरिकों को सफर के बेहतर सुविधाओं को बढ़ावा देने के लिए कदम उठाएंगे.

-दोनों देशों के व्यापार और दूसरे तरह के आर्थिक सहयोग में हरसंभव एकदूसरे की मदद करेंगे और सहयोग को बढ़ावा देंगे.

-विज्ञान और संस्कृति के क्षेत्र में आदान-प्रदान को बढ़ावा देंगे. इस मामले में दोनों देशों के प्रतिनिधिमंडल समय-समय पर मुलाकात करेंगे.

-स्थायी संबंधों के लिए के लिए सहमति बनी कि दोनों देशों की सेनाएं अपनी-अपनी तरफ अंतरराष्ट्रीय सीमा से पीछे हट जाएंगी. 17 दिसंबर 1971 को युद्धविराम के वक्त दोनों देशों की सेना जहां खड़ी थी, उसे ही नियंत्रण रेखा माना गया. इस बात पर सहमति बनी कि कोई भी पक्ष आपसी मतभेदों और कानूनी विवादों के बाद भी इस रेखा को बदलने की एकतरफा कोशिश नहीं करेगा.

-दोनों देशों के बीच सहमति बनी कि समझौते के प्रभाव में आने के वक्त से दोनों देशों के सेनाओं की वापसी शुरू हो जाएगी और 30 दिनों की भीतर ये प्रक्रिया खत्म हो जाएगी.

-दोनों देश की सरकारें इस बात पर सहमत हुईं कि उनके राष्ट्र प्रमुख भविष्य में समय-समय पर बैठकें कर समस्या के समाधान निकालेंगे. इसमें युद्धबंदियों और एकदूसरे की सीमा में घुसे लोगों से लेकर आपसी राजनयिक संबंधों के बेहतर होने के मामले भी होंगे.
First published: July 23, 2019, 5:20 PM IST
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