दिल्ली में भी चीन की तर्ज पर लगेंगे स्मॉग टावर, जानिए कैसे काम करता है ये

चीन के झियान शहर में बना ये टावर 330 फीट ऊंचा है- सांकेतिक फोटो (youtube)
चीन के झियान शहर में बना ये टावर 330 फीट ऊंचा है- सांकेतिक फोटो (youtube)

प्रदूषण के मामले में जानलेवा हालातों से गुजर रहे चीन (hazardous condition of pollution in China) ने बीते सात-आठ सालों में इसपर काफी हद तक काबू पा लिया. इसमें बड़ी भूमिका स्मॉग टावर (smog tower) की भी मानी जा रही है.

  • News18Hindi
  • Last Updated: October 20, 2020, 6:52 AM IST
  • Share this:
दिल्ली में सर्दियां आते ही वायु प्रदूषण (air pollution in Delhi) खतरनाक स्तर पर चला जाता है. इसे देखते हुए मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल (Arvind Kejriwal) ने कनॉट प्लेस पर एक स्मॉग टावर लगाने का एलान किया है. लगभग 20 करोड़ की लागत से बना ये टावर चीन के स्मॉग टावर (smog tower) की तर्ज पर होगा. जानिए, क्या है स्मॉग टावर और कैसे काम करता है.

चीन में वायु प्रदूषण बेकाबू 
बता दें कि एक समय था जब दिल्‍ली-एनसीआर की तरह ही चीन के बड़े शहर धुंध की चादर में लिपटे रहते थे. बीजिंग में तो हर व्‍यक्ति मास्‍क पहनकर रहता था. स्‍कूल-कॉलेज, सरकारी संस्‍थान बंद कर दिए जाते थे. वायु प्रदूषण का स्‍तर काफी खतरनाक होता था. लेकिन चीन ने इस वायु प्रदूषण के खिलाफ 2013 में जंग छेड़ी और 8 सालों में इसका स्तर काफी घटा सका. प्रदूषण के कारण होने वाले स्मॉग को कम करने के लिए लिए गए कई कदमों में से एक था स्मॉग टावर.





टावर बचा रहा जानें 
चीन के झियान शहर में बना ये टावर 330 फीट ऊंचा है. ये हवा को साफ करने का काम करता है. अनुमान के मुताबिक ये रोज एक करोड़ घनमीटर हवा को साफ करता है. इसके लगने के बाद शहर की साफ हवा की स्थिति में बहुत सुधार हुआ है. इस शहर की स्थिति इस एयर प्यूरिफायर लगने से पहले ये थी कि शहर का शख्स हवा में 21 सिगरेट के बराबर विषैले तत्व हवा के साथ पी रहा था.

चीन में वायु प्रदूषण का स्‍तर काफी खतरनाक होता था- सांकेतिक फोटो (flickr)


कितनी हवा शुद्ध करता है
वैज्ञानिक ही इसका पूरा कामकाज देखते हैं. ये जब से लगाया गया है तब से दस किलोमीटर के रेंज की हवा को साफ रखता है. केवल यही नहीं ये प्यूरिफायर टावर हवा की गुणवत्ता में सुधार के साथ-साथ स्मॉग को भी 15 से 20 प्रतिशत तक कम करता है. झियान के टावर ने कथित तौर पर अपने आसपास के क्षेत्र में लगभग 6 वर्ग किमी के क्षेत्र में पीएम 2.5 को 19% तक कम किया है.

ये भी पढ़ें: जानिए, भारत अपने सैनिकों पर किस तरह दुनिया में सबसे ज्यादा करता है खर्च

सोलर एनर्जी पर होता है काम 
टावर की सारी कार्य प्रणाली सौर ऊर्जा से नियंत्रित है. इसलिए इसको बाहर से कोई बिजली नहीं दी जाती. ये सूरज से मिलने वाली ऊर्जा से खुद ब खुद काम करता है. वैज्ञानिक मान रहे हैं कि इस टावर से आने वाले समय में और बेहतर रिजल्ट मिलने लगेंगे. वैज्ञानिक आने वाले समय इसकी क्षमता और ऊंचाई दोनों बढ़ा सकते हैं ताकि ये ज्यादा रेंज तक काम कर सके.

दिल्ली में सर्दियां आते ही प्रदूषण खतरनाक स्तर पर चला जाता है- सांकेतिक फोटो (needpix)


बीजिंग में भी विशाल स्मॉग टावर 
कभी ये हाल था कि झियान शहर में सर्दियों के दौरान इतना ज्यादा प्रदूषण होता था कि लोगों का सांस लेना दुश्वार हो चुका था. मुख्य तौर पर इस शहर का हीटिंग सिस्टम कोयला आधारित था. इस प्रोजेक्ट को 2015 में शुरू किया गया और दो साल के भीतर इसे पूरा कर लिया गया. वैसे बीजिंग में भी चीन ने इसी तरह का एक विशाल स्मॉग टावर बनवाया है. ये केवल बिजली से चलता है हालांकि इसकी क्षमता उतनी नहीं है, जितनी शांक्शी प्रांत के इस झियान शहर के टॉवर की.

ये भी पढ़ें: इस्लामिक देशों का खलीफा तुर्की क्यों उइगर मुस्लिमों के मामले में मुंह सिले है?  

भारत में पहले भी होती रही कोशिश
वैसे दिल्ली में भी पायलट प्रोजेक्ट की तरह स्मॉग टावर लगाने की कोशिश पहले की जा चुकी है. साल 2018 में यहां ITO चौक पर वायु नाम से एक टावर बनाने की कोशिश हुई, लेकिन ये तकनीक फेल हो गई क्योंकि दिल्ली की हवा इस हद तक प्रदूषित हो चुकी है कि उसके फिल्टर ही काम नहीं कर रहे थे. इससे मेंटेनेंस कॉस्ट ज्यादा जा सकती थी. डिवाइस को सीएसआईआर (वैज्ञानिक एवं औद्योगिक अनुसंधान परिषद) और नीरी (नेशनल एनवायरनमेंट इंजीनियरिंग रिसर्च इंस्टीट्यूट) ने डिजाइन किया था.

दिल्ली में भी पायलट प्रोजेक्ट की तरह स्मॉग टावर लगाने की कोशिश पहले की जा चुकी है (Photo-news18 english)


दिल्ली के लाजपत नगर में भी एक टावर लगाया गया है. हालांकि ये कैसे काम कर रहा है, फिलहाल इस बारे में ज्यादा चर्चा नहीं हो रही है. बताया जा चुका है कि यह प्रदूषण स्तर को कम करेगा और चार आउटलेट इकाइयों के माध्यम से शुद्ध हवा को बाहर निकालने में मदद करेगा.

ये भी पढ़ें: जानिए, दुनिया के कितने देश चीन के उधार में डूबे हुए हैं    

केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) का कहना है कि साफ हवा के लिए कई गुना बड़े और प्रभावी टावर लगाने होंगे तभी दिल्ली के लोग साफ हवा में सांस ले सकेंगे. इसकी तकनीक इस तरह से काम करेगी कि टावर में मौजूद एग्जॉस्ट फैन प्रदूषित हवा को भीतर खींचेंगे और भीतर ही उसकी प्रोसेसिंग करके साफ हवा को बाहर फेंकेंगे.
अगली ख़बर

फोटो

टॉप स्टोरीज