EVM की बजाय क्यों चर्चा में है आपके वोट का सबूत देने वाली VVPAT मशीन?

ईवीएम की विश्वसनीयता बनाए रखने के लिए चुनाव आयोग पहली बार कर रहा है सभी बूथों पर वीपीपैट का इस्तेमाल, लेकिन पर्ची मिलान को लेकर विवाद!

News18Hindi
Updated: April 15, 2019, 1:08 PM IST
EVM की बजाय क्यों चर्चा में है आपके वोट का सबूत देने वाली VVPAT मशीन?
ईवीएम-वीवीपैट
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Updated: April 15, 2019, 1:08 PM IST
ईवीएम और वीवीपैट (वोटर वेरीफाएबल पेपर ऑडिट ट्रेल यानी वीवीपैट) एक बार फिर चर्चा में हैं. विपक्षी दलों ने रविवार को एक बैठक कर 50 फीसदी ईवीएम-वीवीपैट मिलान को लेकर सुप्रीम कोर्ट जाने का फैसला लिया है. आंध्र प्रदेश के सीएम चंद्रबाबू नाएडू ने इसे लेकर शनिवार को मुख्य चुनाव आयुक्त सुनील अरोड़ा से मुलाकात भी की थी. दावा किया था कि 21 विपक्षी दल इस मामले पर एकजुट हैं. इससे पहले भी विपक्षी दल इसी मांग को लेकर सुप्रीम कोर्ट गए थे.

तब कोर्ट ने चुनाव आयोग को निर्देश दिया था कि लोकसभा सीट के अंतर्गत आने वाले सभी विधानसभा क्षेत्रों के 5 बूथों पर ईवीएम और वीवीपैट का मिलान किया जाए. अभी तक विधानसभा चुनाव में एक पोलिंग बूथ जबकि लोकसभा में उसके तहत आने वाले सभी विधानसभा क्षेत्रों के एक-एक बूथ पर ही ईवीएम और वीवीपैट का मिलान होता है. पिछली बार जब विपक्षी दल सुप्रीम कोर्ट गए थे तब चीफ जस्टिस रंजन गोगोई की अध्यक्षता वाली बेंच 50 फीसदी पर्चियों के मिलान की मांग पर सहमत नहीं हुई थी. तर्क दिया था कि इसके लिए बड़ी संख्या में लोगों की जरूरत पड़ेगी. (ये भी पढ़ें:  इसलिए हैक नहीं हो सकती भारतीय चुनाव आयोग की EVM!)

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लोकसभा चुनाव 2019 के पहले चरण के मतदान में ही कई जगहों पर बीजेपी विरोधी दलों के कार्यकर्ताओं, नेताओं ने EVM पर सवाल उठाए थे. नेशनल कॉन्फ्रेंस के नेता उमर अब्दुल्ला ने तो यहां तक दावा किया था कि जम्मू-कश्मीर के पुंछ में एक ईवीएम (EVM) में कांग्रेस (Congress) का बटन काम नहीं कर रहा. उमर अब्दुल्ला ने यह दावा ट्वीट करके किया था.

हालांकि ईवीएम  की विश्वसनीयता कायम रखने के लिए ही आयोग इस बार सभी सीटों पर वीवीपैट का इस्तेमाल कर रहा है. बीजेपी विरोधी कई पार्टियां ईवीएम पर सवाल उठाकर बैलेट से चुनाव करवाने की मांग करती रही हैं. जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम फारूक अब्दुल्ला ने तो ईवीएम को 'चोर मशीन' तक कह दिया था.  यह व्यवस्था इसलिए की गई है ताकि किसी तरह का विवाद होने पर ईवीएम में पड़े वोट के साथ पर्ची का मिलान किया जा सके.दरअसल, ईवीएम पर उठ रहे सवालों ने ही वीवीपैट काे जन्म दिया.

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कैसे काम करती है वीवीपैट?
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इसे ईवीएम मशीन के साथ जोड़ा जाता है. वीवीपैट व्यवस्था के तहत वोट डालने के तुरंत बाद कागज की एक पर्ची बनती है. जिसे वोटर सात सेकंड तक देख सकता है कि उसने किसे वोट किया है, यानी कि उसका वोट उसके अनुसार ही पड़ा है या नहीं. फिर पर्ची एक बॉक्स में गिर जाती है. मतदाता इसे अपने घर नहीं ले जा सकता.

निजी कंपनी से वीवीपैट बनवाना चाहती थी सरकार!
चुनाव आयोग ने उस प्रस्ताव को नामंजूर कर दिया था, जिसमें सरकार की ओर से VVPAT मशीनों को प्राइवेट सेक्टर से खरीदने की सलाह दी गई थी. चुनाव आयोग ने सरकार से कहा था कि अगर ऐसा होता है तो आम आदमी के विश्वास को ठेस पहुंचेगी.

कौन करता है निर्माण
भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड (बीईएल) बंगलूरू और इलेक्ट्रॉनिक कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड (ECIL) हैदराबाद ने यह मशीन 2013 में डिजाइन की. दोनों भारत सरकार के उपक्रम हैं. बीईएल रक्षा मंत्रालय के अधीन सैन्य, नागरिक उपकरण एवं संयंत्र बनाने वाली संस्था है. जबकि ECIL डिपार्टमेंट ऑफ ऑटोमिक इनर्जी का उपक्रम है. इन कंपनियों द्वारा निर्मित ईवीएम और वीवीपैट पर सवाल उठ रहे हैं.

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सबसे पहले कहां हुआ इस्तेमाल?
सबसे पहले इसका इस्तेमाल नगालैंड के चुनाव में 2013 में हुआ. इसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने वीवीपैट मशीन बनाने और इसके लिए पैसे मुहैया कराने के आदेश केंद्र सरकार को दिए.

बीईएल ने साल 2016 में 33,500 वीवीरपैट मशीन बनाईं. इसका इस्तेमाल गोवा के चुनाव में 2017 में किया गया. साल 2017 में हुए पांच राज्यों के विधानसभा चुनावों में आयोग ने 52,000 वीवीपैट का इस्तेमाल किया.

हालांकि, चुनाव आयोग ने जून 2014 में ही तय किया था कि 2019 के चुनाव में सभी मतदान केंद्रों पर वीवीपैट का इस्तेमाल किया जाएगा.

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