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जानें क्‍या एक बार संक्रमण से उबरने के बाद दोबारा हो सकता है Coronavirus

News18Hindi
Updated: March 21, 2020, 9:34 AM IST
जानें क्‍या एक बार संक्रमण से उबरने के बाद दोबारा हो सकता है Coronavirus
राजस्‍थान के जयपुर में कोरोना वायरस संक्रमित व्‍यक्ति की स्‍वस्‍थ होने के तीन बाद मौत से ये सवाल उठ रहा है कि क्‍या ये वैश्विक महामारी बीमारी से उबर चुके मरीज को फिर चपेट में ले सकती है.

भारत (India) में शुक्रवार को एक दिन में 49 मामले सामने आने के बाद कोरोना वायरस (Coronavirus) से संक्रमित लोगों की संख्‍या 225 से ऊपर पहुंच गई है. भारत में अब तक 5 संक्रमितों की मौत हो चुकी है. इनमें एक व्‍यक्ति की संक्रमण से ठीक होने के तीन बाद मौत हुई. ऐसे में सवाल उठता है कि क्‍या उपचार के बाद ठीक हो चुके व्‍यक्ति को फिर संक्रमण (Re-Infection) हो सकता है?

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  • Last Updated: March 21, 2020, 9:34 AM IST
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चीन के वुहान (Wuhan) शहर से फैलना शुरू होने के बाद कोरोना वायरस (Coronavirus) दुनिया के 170 से ज्‍यादा देशों को अपनी चपेट में लेकर 2.5 लाख से ज्‍यादा लोगों को संक्रमित कर चुका है. संक्रमित (Infected) लोगों में से 11 हजार से ज्‍यादा लोगों की मौत हो चुकी है. भारत (India) में शुक्रवार को एक दिन में 49 मामले सामने आने के बाद संक्रमितों की संख्‍या 225 से ऊपर पहुंच गई है. भारत में अब तक 5 संक्रमितों की मौत हो चुकी है. इनमें एक व्‍यक्ति की संक्रमण से ठीक होने के तीन बाद शुक्रवार को मौत हुई. ऐसे में सवाल उठता है कि क्‍या उपचार के बाद ठीक हो चुके व्‍यक्ति को फिर संक्रमण (Re-Infection) हो सकता है.

ठीक होने के बाद कुछ दिन तक बना रहता है फिर संक्रमण का खतरा
स्‍वास्‍थ्‍य विशेषज्ञों का कहना है कि अगर किसी व्‍यक्ति को किसी वायरस का संक्रमण हो जाता है और वो इलाज के जरिये बीमारी से निकलकर स्‍वस्‍थ हो जाता है तो उसकी रोग प्रतिरोधक क्षमता (Immunity) उस वायरस से लड़ने की शक्ति विकसित कर लेती है. कोरोना वायरस संक्रमण दिसंबर, 2019 से ही फैलना शुरू हुआ है. ऐसे में स्‍पष्‍ट तौर पर नहीं कहा जा सकता है कि ये वायरस एक बार ठीक होने के बाद दोबारा हमला कर सकता है या नहीं. हालांकि, राजस्‍थान में ठीक होने के तीन बाद मौत के मामले को देखते हुए ये कहा जा सकता है कि स्‍वस्‍थ्‍य होने के बाद भी कुछ दिनों तक फिर संक्रमण का खतरा बना रहता है.

पहली बार इम्‍युनिटी बना लेती है वायरस से मुकाबले को एंटी बॉडीज



विशेषज्ञों के मुताबिक, दुनिया पर कई बार अलग-अलग वायरस का हमला होता रहा है. पुराने अनुभवों के आधार पर कहा जा सकता है कि एक बार संक्रमण के बाद वायरस के खिलाफ शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता एंटी बॉडीज बना लेती है. इससे भविष्य में इंसानी शरीर उसी वायरस से बचाव कर लेता है. सार्स और मार्स वायरस के मामलों में एक बार स्‍वस्‍थ्‍य हो चुके व्‍यक्ति में दोबारा संक्रमण नहीं हुआ. चीन में भी कुछ लोगों में अस्पताल से छुट्टी मिलने के बाद फिर से संक्रमण पाया गया है. हालांकि, पुख्ता तौर पर इस बारे में अभी कुछ भी कहना जल्‍दबाजी ही माना जाएगा. कोरोना वायरस का इन्क्यूबेशन पीरियड या संक्रमण होने और लक्षण दिखने तक का वक्त अमूमन 14 दिन है. अब तक सामने आए मामलों के आधार पर कहा जा रहा है कि संक्रमण के 5 दिन के भीतर लक्षण दिखना शुरू हो जाते हैं.

कोरोना वायरस शरीर में पहुंचने के बाद सबसे पहले गले के आसपास की कोशिकाओं, फिर सांस नली और आखिर में लंग्‍स को प्रभावित करता है.


इस तरह धीरे-धीरे शरीर को नुकसान पहुंचाता है कोरोना वायरस
यहां ये जान लेना भी जरूरी है कि ये वायरस शरीर पर कैसे हमला करता है? विशेषज्ञों का कहना है कि शरीर के भीतर जाने के बाद ये वायरस इंसान के लिए सांस लेने में तकलीफ पैदा कर सकता है. ये सबसे पहले गले के आसपास की कोशिकाओं पर हमला करता है. इसके बाद सांस की नली और फेफड़ों (Lungs) पर असर दिखाना शुरू करता है. इस जगह ये खुद को रिप्‍लीकेट करना यानी मल्‍टीप्‍लाई करना शुरू कर देता है. आसान शब्‍दों में कहें तो यहां वायरस अपनी संख्या बढ़ाता है. ये नए बने वायरस बाकी कोशिकाओं को प्रभावित करना शुरू कर देते हैं. शुरुआती हमले में इंसान को थकान, सिर दर्द, गले में दर्द या खराश, हल्‍का बुखार महसूस होता है. औसतन ये असर दिखने में वायरस के शरीर में पहुंचने के बाद 5 दिन का समय लगता है.

संक्रमण से मुकाबले को साइटोकाइन केमिकल छोड़ता है शरीर
अब ये जान लेते हैं कि हमारा शरीर वायरस से मुकाबला कैसे करता? संक्रमण के शुरुआती लक्षण नजर आते ही शरीर हर हिस्‍से को इस वायरस से मुकाबला करने के संकेत भेजता है. संकेत मिलने के बाद शरीर वायरस से मुकाबले के लिए साइटोकाइन नाम का केमिकल छोड़ना शुरू कर देता है. शरीर की रोग प्रतिरोधक प्रणाली पूरी ताकत के साथ वायरस से मुकाबला करने लगती है. बुखार और दर्द शरीर में रोग प्रतिरोधक क्षमता और वायरस के बीच चल रही इसी जंग के कारण महसूस होता है. इसके बाद कोरोना वायरस के मामले में सूखी खांसी आनी शुरू हो जाती है. अगर किसी को खांसी में बलगम आता है तो इसका मतलब है कि शरीर वायरस के हमले के कारण फेफड़ों की मृत कोशिकाओं को भी बाहर निकाल रहा है.

गंभीर होने पर बिगड़ जाता है रोग प्रतिरोधक तंत्र का संतुलन
किंग्स कॉलेज लंदन की डॉक्टर नैटली मैक्डरमॉट कहती हैं कि गंभीर संक्रमण के मामलों में रोग प्रतिरोधक तंत्र का संतुलन बिगड़ जाता है और शरीर में सूजन दिखनी शुरू हो जाती है. इस दौरान फेफड़ों में भी सूजन आ जाती है. फेफड़ों की इसी सूजन को निमोनिया कहते हैं. अगर ये वायरस आपके मुंह से होते हुए आपकी सांस नली में घुता है और फिर आपके फेफड़ों तक पहुंचता है तो आपके फेफड़ों में छोटे-छोटे एयरसैक बना देता है. इन्‍हीं एयरसैक के कारण संक्रमित व्‍यक्ति को सांस लेने में तकलीफ होने लगती है. यहीं से शरीर वायरस से मुकाबला हार जाता है और गंभीर रूप से बीमार पड़ जता है. बीबीसी की रिपोर्ट के मुताबिक इसके बाद फेफड़ों का फेल होना, सेप्टिक शॉक, ऑर्गन फेल होना और मौत का जोखिम शुरू हो जाता है. हालांकि, लैंसेट मेडिकल जर्नल में छपे एक अध्ययन के अनुसार वुहान के जिनयिनतान अस्पताल में कोरोना वायरस के कारण हुई दो मौतों में मरीजों के फेफड़े स्वस्थ पाए गए थे.

शरीर की इम्‍युनिटी और कोरोना वायरस के बीच मुकाबले पर किए शोध से इस वैश्विक महामारी की वैक्‍सीन बनाने में काफी मदद मिलेगी.


इम्‍युनिटी पर किया गया शोध, वैक्‍सीन बनाने में मिलेगी मदद
ऑस्ट्रेलियाई वैज्ञानिकों ने शोध कर यह पता लगाने का दावा किया है कि इंसान की रोग प्रतिरोधक क्षमता कोरोना वायरस का मुक़ाबला कैसे करती है. नेचर मेडिसिन जर्नल में प्रकाशित शोध में कहा गया है कि इस अध्‍ययन का उद्देश्‍य उन कोशिकाओं के बारे में पता लगाना था जो इस वायरस को टक्कर देती हैं. इससे कोरोना वायरस की वैक्सीन बनाने में मदद मिलेगी. मेलबर्न के पीटर डोहर्टी इंस्टीट्यूट फॉर इंफेक्शन एंड इम्यूनिटी के शोधकर्ता प्रोफेसर कैथरीन केडजिएर्स्का ने कहा कि संक्रमण के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं तो बहुत से लोग स्‍वस्‍थ्‍य होकर घर भी लौट रहे हैं. शोधकर्ताओं का कहना है कि पहली बार रिसर्च के जरिये चार प्रकार की प्रतिरक्षा कोशिकाओं की पहचान की गई है, जो COVID-19 से लड़ने में सक्षम पाई गई हैं. इन कोशिकाओं का पता एक संक्रमित महिला की जांच से किया गया.

स्थिति में सुधार के दौरान रक्‍त में दिखीं कुछ विशेष कोशिकाएं
चीन के वुहान की एक महिला को संक्रमण के बाद ऑस्ट्रेलिया के एक अस्पताल में भर्ती कराया गया. इसके बाद 14 दिन में वह स्वस्थ हो गईं. प्रोफेसर केडज़िएर्स्का ने बताया कि उनकी टीम ने इस महिला के इम्यून सिस्टम की गहराई से जांच की. जब महिला की स्थिति में सुधार आने लगा तो उनके रक्‍त के बहाव में कुछ विशेष प्रकार की कोशिकाएं दिखाई दीं. ये कोशिकाएं ठीक वैसी ही थीं, जैसी एंफ्लूएंजा के मरीजों में ठीक होने से पहले दिखती हैं. स्विनबर्न यूनिवर्सिटी ऑफ टेक्नोलॉजी में हेल्थ साइसेंस के डीन प्रोफेसर ब्रूस थॉम्पसन के मुताबिक़, ये शोध वायरस को पहचानने में मदद कर सकता है. ऑस्ट्रेलिया के स्वास्थ्य मंत्री ग्रेग हंट का कहना है कि इस खोज से कोरोना वायरस के लिए वैक्सीन बनाने में तेजी आएगी.

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First published: March 21, 2020, 9:34 AM IST
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