दिलीप घोष कौन हैं, जिन्होंने ममता बनर्जी को दी बरमूडा पहनने की सलाह

ममता बनर्जी और दिलीप घोष.

ममता बनर्जी और दिलीप घोष.

West Bengal Election 2021 : भद्दी बयानबाज़ी का एक और पड़ाव आया जब भाजपा के राज्य प्रमुख (WB BJP Chief) ने कहा कि ममता पैर दिखाना चाहती हैं तो बरमूडा पहनें, साड़ी नहीं. आलोचना झेल रहे घोष पहले भी बेहद विवादास्पद बयान (Controversial Statements) दे चुके हैं.

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  • Last Updated: March 25, 2021, 9:30 AM IST
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गोमूत्र से कोरोना वायरस (Corona Virus) के इलाज का दावा करने और पहले भी एक महिला पर अपने बयान के चलते सेक्सुअल हैरसमेंट (Sexual Harassment) के आरोप झेल चुके दिलीप घोष पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री (West Bengal CM) ममता बनर्जी को 'बरमूडा' पहनकर 'अंग प्रदर्शन' करने की सलाह देने के चलते विवादों में हैं. पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के दरम्यान भाजपा के प्रदेश प्रमुख (BJP State Chief) और मौजूदा सांसद घोष अपने बयानों के चलते फिर चर्चा में भी आ रहे हैं और विवादों में भी. घोष के बारे में कई दिलचस्प फैक्ट्स आपको पता नहीं होंगे.

कभी शादी न करने वाले करीब 57 साल के घोष का राजनीतिक करियर कब और कैसे शुरू हुआ, इसके साथ ही आपको बताते हैं कि वो किस तरह अपने अटपटे और आक्रामक बयानों के चलते सुर्खियों में बने रहे हैं.

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कौन हैं दिलीप घोष?
पश्चिम बंगाल भाजपा के अध्यक्ष और मेदिनीपुर सीट से लोकसभा सांसद के तौर पर पहचाने जाने वाले घोष आर्थिक रूप से पिछड़े इलाके जंगल महल के निम्न वर्गीय परिवार से आते हैं. बंगाली हिंदुओं की मान्यता के हिसाब से पिछड़ी सदगोप जाति से ताल्लुक रखने वाले घोष दावा करते रहे हैं कि उन्होंने इंजीनियरिंग का डिप्लोमा किया, लेकिन पॉलीटेक्नीक इंस्टीट्यूट ने इससे इनकार किया है. इस विवाद को लेकर भी एक कोर्ट केस हुआ था.

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भाजपा ने लगातार दूसरी बार घोष को पार्टी प्रदेशाध्यक्ष पद 2020 में सौंपा.


गोमूत्र से कोरोना के इलाज का दावा



मार्च 2020 में घोष तब देश भर में चर्चा के केंद्र बन गए थे जब उन्होंने यह कहा था कि गाय के मूत्र के सेवन से कोरोना वायरस का इलाज संभव है. इस बयान के बाद टीएमसी सहित कई जानकारों ने उनकी कड़ी आलोचना की थी. इसके साथ ही, खुलकर उन्होंने यह भी दावा किया था कि वह नियमित रूप से गोमूत्र का सेवन करते हैं और यह भारत की संस्कृति रही है. हालांकि अक्टूबर 2020 में घोष कोविड-19 पॉज़िटिव पाए गए थे.

विवादों से चोली दामन का साथ

घोष कई बार अपने बयानों के कारण विवादों को हवा देते रहे हैं. उनमें से कुछ प्रमुख के बारे में आपको बताते हैं :

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1. नाडिया में एक रैली के दौरान जब एंबुलेंस को रास्ता नहीं दिया गया तो घोष ने कहा कि टीएमसी उनकी रैली नाकाम करने की साज़िश कर रही थी, लेकिन बाद में पता चला कि वह एंबुलेंस सच में मरीज़ को ले जा रही थी.

2. 2016 में घोष ने जादवपुर की लड़कियों को 'लड़कों से दोस्ती' करने के कारण बेशर्म और आदर्श के मापदंडों वाली लड़कियों से कमतर बताया था. यही नहीं, 2019 में इस यूनिवर्सिटी के छात्रों को घोष ने देशद्रोही भी कह दिया था.

3. विदेशी गायों को बेकार बताते हुए घोष ने भारतीय गायों का गुणगान करते हुए यह भी कहा था कि यहां की गायों के दूध में सोना होता है, जिसके कारण दूध का रंग हल्का पीला होता है.

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4. सीएए का विरोध कर रहे प्रदर्शनकारियों के लिए कई बार घोष ने आपत्तिजनक बयान दिए थे और उनके आंदोलन के विरोध में गालियों तक का इस्तेमाल किया था.

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एक प्रदर्शन के दौरान जादवपुर यूनिवर्सिटी के छात्र.


5. 'राम के पूर्वजों के बारे में सब जानते हैं, लेकिन देवी दुर्गा के बारे में किसी को यह जानकारी नहीं है.' इस बयान के बाद टीएमसी के कार्यकर्ताओं ने अपना सिर मुंडवाकर इस बयान का विरोध किया था.

6. भाजपा कार्यकर्ताओं ने जब एक सीएए के खिलाफ प्रदर्शनकारी महिला को तंग किया था, तब घोष ने कहा था कि उनके लोगों ने ठीक किया. 'उसे शुक्र मनाना चाहिए कि उसके साथ कुछ और बुरा नहीं हुआ.' यह कहने वाले घोष के खिलाफ पुलिस ने इस मामले में सेक्सुअल हैरसमेंट का केस दर्ज किया था.

कैसा रहा घोष का राजनीतिक करियर?

1984 में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रचारक के तौर पर घोष का सियासी सफर शुरू हुआ था. 1999 में वो अंडमान में आरएसएस के इनचार्ज रहे और पूर्व चीफ सुदर्शन के सहायक भी. 2015 में भाजपा ने उन्हें बंगाल का प्रदेशाध्यक्ष बनाया. पहली बार चुनावी राजनीति में 2016 में उतरे और खडगपुर सदर सीट से उन्होंने विधानसभा चुनाव जीता.

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इसके बाद घोष के ही नेतृत्व में भाजपा ने 2019 का लोकसभा चुनाव बंगाल में बगैर किसी गठबंधन के लड़ा और उम्मीद से ज्यादा कामयाबी के तौर पर 18 लोकसभा सीटें जीतीं. खुद घोष मेदिनीपुर सीट से करीब 89,000 वोटों के अंतर से जीते. 'चाय पे चर्चा' उनका चर्चित सियासी कैंपेन रहा. 2019 में कोलकाता में कथित तौर पर टीएमसी कार्यकर्ताओं ने उनके अभियान के दौरान हमला किया था. 2020 में भाजपा ने उन्हें दूसरी बार पार्टी प्रदेशाध्यक्ष बनाया था.
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