मंगल पर मिशन भेजने वाला पहला मुस्लिम देश होगा UAE, जानें डिटेल

मंगल पर मिशन भेजने वाला पहला मुस्लिम देश होगा UAE, जानें डिटेल
यूएई के मिशन मंगल के बारे में फैक्ट्स जानें.

पश्चिमी एशिया या Arab Country या किसी Muslim Country से पहली बार कोई ऐसा Space Mission लॉंच होने जा रहा है, जो Planet Mars पर ऐसे अध्ययन करेगा, जो अब तक नहीं हुए हैं. संयुक्त अरब अमीरात (United Arab Emirates) के इस मंगल मिशन में बहुत कुछ खास है. इस मिशन से जुड़े हर सवाल का जवाब आपको यहां मिलेगा.

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अमीरात मंगल मिशन (The Emirates Mars Mission) या होप मंगल मिशन (Hope Mars Mission) संयुक्त अरब अमीरात का महत्वाकांक्षी अंतरिक्ष कार्यक्रम (Space Mission) है. किसी अरब या मुस्लिम देश से मंगल के लिए यह पहला अभियान यूएई के लिए इसलिए भी खास है क्योंकि अगर सब ठीक रहा तो Al-Amal नाम का यह अंतरिक्ष यान फरवरी 2021 में Mars Orbit में पहुंच रहा होगा, जब यूएई का 50वां Foundation Day नज़दीक होगा.

यह दिन इसलिए चुना गया क्योंकि यह यूएई के प्रधानमंत्री शेख मोहम्मद बिन रशीद अल मकतूम की सालगिरह का दिन है और उन्हीं के नाम के स्पेस सेंटर में होप मिशन तैयार किया गया है. उम्मीद और मानवता इस मिशन के संदेश बताए गए हैं. 1.3 टन के इस यान के 50 करोड़ किलोमीटर का सफर करने के इस मिशन के बारे में हर सवाल का जवाब जानिए.

क्या है ये होप मिशन?
होप मिशन के ज़रिये मंगल ग्रह के वातावरण के बारे में अध्ययन किया जाना है. यह मिशन वास्तव में पहली बार एक मौसम उपग्रह के तौर पर मंगल पर भेजा जा रहा है, जो इन सवालों के जवाब दे सकता है कि मंगल से कैसे हाइड्रोजन और ऑक्सीज़न गैसें गायब हुईं. हवा, पानी से लेकर मिट्टी तक, मंगल के वातावरण के हर पहलू की स्टडी के ज़रिये यह समझने में मदद मिल सकेगी कि लाखों करोड़ों सालों के दौरान मंगल ग्रह की संरचना में किस तरह बदलाव हुए.
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यूएई के मंगल मिशन से कुछ अनसुलझे सवालों के जवाब मिलने की उम्मीद है.


मंगल का अध्ययन क्यों?
होप मिशन के ज़रिये 1000 जीबी से ज़्यादा का नया डेटा मिलने की उम्मीद है जिसे दुनिया भर में 200 से ज़्यादा वैज्ञानिक संस्थाओं के साथ मुफ्त में साझा किया जाएगा. इस मिशन की महत्वाकांक्षा है कि मंगल के अतीत और वर्तमान को जानकर यह समझा जाए कि वहां पृथ्वी के लिए क्या भविष्य है और क्या जीवन संभव हो सकता है. मंगल ग्रह की सतह पर पानी पाए जाने के दावों के बाद किस प्रकार के जीवन की गुंजाइश वहां हो सकती है, यह समझने के लिहाज़ से यह मिशन अहम है.

होप के लिए यह अध्ययन क्यों?
असल में, अमीराती स्पेस विज्ञान नहीं चाहता था कि मंगल के बारे में अब तक जो दूसरों द्वारा जाना जा चुका है, उसे फिर समझा जाए इसलिए उसने नासा से सलाह ली कि मंगल पर क्या अध्ययन किया जाए, जिससे मिल चुकी जानकारियों में इज़ाफा हो सके. नासा की एडवाइज़री MEPAG ने अमीरात के मिशन की थीम यह सुझाई -

मंगल के वातावरण में ऊर्जा का संचार ऊपर से नीचे किस तरह होता है, और दिन भर में किस समय क्या फर्क आता है और साल भर में किस समय क्या फर्क दिखता है, यह अध्ययन किया जाना ज़रूरी है.


इस विषय की परतों में छुपा था कि यह जाना जाए कि मंगल पर ऐतिहासिक रूप से पानी था, लेकिन वह समय के साथ कैसे गायब हो गया. इसी विषय के हिसाब से अमीरात होप मिशन को डिज़ाइन किया गया और अंतरिक्ष यान को ग्रह से 22 से 44 हज़ार किमी दूरी पर रहकर उसकी संरचना को समझने के लिए तैयार किया गया.

यान भेजने के पीछे यूएई का मकसद?
मंगल के बारे में और ज़्यादा जानने और इस बारे में दुनिया भर में एक साझा सहयोगी माहौल बनाना यूएई के इस मिशन का मकसद बताया गया है. इस मिशन के ज़रिये यह भी साबित किया जा रहा है कि अमीरात अंतरिक्ष विज्ञान में पीछे नहीं है, न ही अंतरिक्ष अनुसंधान में पीछे रहना चाहता है और यह भी कि अरब में आने वाली पीढ़ियों के लिए स्पेस साइंस में करियर के विकल्प खुले हुए हैं.

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महमूद अल नासेर और महमूद नासेर अल इमादी मंगल मिशन प्रोब के फ्लैट सैट का परीक्षण करते हुए.


इस मिशन का समय?
मंगल ग्रह अपनी धुरी पर एक परिक्रमा के लिए 24.6 घंटे का समय लेता है. मंगल ग्रह पर एक साल पृथ्वी के करीब दो सालों के बराबर यानी पृथ्वी के हिसाब से 687 दिनों का होता है. होप मिशन वैज्ञानिक प्रक्रियाओं के लिए मई 2021 से शुरू कर 2025 तक काम जारी रखेगा. 121,000किमी/घंटे की रफ्तार से करीब 200 दिनों यह अंतरिक्ष यान मंगल तक पहुंचेगा और फिर उसकी परिक्रमा करेगा.

होप मिशन की पूरी टाइमलाइन
2014 - मिशन की घोषण
2015 - प्राथमिक डिज़ाइनिंग
2016 - प्राथमिक चरणों की समीक्षा
2017 - क्रिटिकल डिज़ाइनिंग की समीक्षा
2018 - विकास और संयोजन
2019 - परीक्षण
2020 - लांच और यात्रा शुरू
2021 - मंगल की कक्षा में पहुंचकर वैज्ञानिक ऑपरेशन
2024 - विस्तृत वैज्ञानिक ऑपरेशन

कैसे अध्ययन करेगा होप मिशन?
मंगल के वातावरण को समझने की वैज्ञानिक प्रकियाओं के लिए होप मिशन में तीन एडवांस्ड इंस्ट्रूमेंट हैं, जो सिलसिलेवार अपना काम करेंगे.

अमीरात eXploration Imager (EXI) एक मल्टीबैंड कैमरा है, जो मंगल की तस्वीरें 12 मेगा पिक्सल रिज़ॉल्यूशन पर लेगा और लाल ग्रह के निचले वातावरण की स्टडी करेगा. यह जलीय बर्फ और ओज़ोन के बारे में अल्ट्रावायलेट बैंड के ज़रिये जानकारी जुटाएगा.

अमीरात Mars Infrared Spectrometer (EMIRS) एक इनफ्रारेड बैंड है, जिसके ज़रिये धूल की ऑप्टिकल डेप्थ, बर्फ के बादलों और वाष्पों की स्टडी की जाएगी. मंगल के निचले वातावरण और सतह पर तापमान को भी समझा जाएगा.

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डेढ़ सौ अमीराती इंजीनियरों ने मिलकर बनाया मंगल यान. प्रतीकात्मक तस्वीर.


अमीरात Mars Ultraviolet Spectrometer (EMUS) नाम के इंस्ट्रूमेंट से मंगल के ऊपरी वातावरण की स्टडी अल्ट्रावायलेट वेवलेंथ से होगी. थर्मोस्फीयर में स्थित कार्बन मोनोऑक्साइड और ऑक्सीज़न के बिखराव को समझा जाएगा. EMUS के ज़रिये मंगल के आउटर स्पेस में ऑक्सीज़न व हाइड्रोजन संबंधी स्टडी भी की जाएगी.

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कैसे बना होप मिशन?
करीब 150 अमीराती इंजीनियरों ने मिलकर इस अंतरिक्ष यान का निर्माण किया, जिसमें अमेरिका के कोलोराडो, एरिज़ॉना और कैलिफोर्निया बर्कले यूनिवर्सिटी के वैज्ञानिकों व इंजीनियरों की मदद ली गई. इसकी लागत 20 करोड़ अमेरिकी डॉलर की रही, जिसे पहले के कुछ मंगल मिशनों की तुलना में काफी कम बताया गया है. इस मिशन के निर्माण का पूरा ज़िम्मा यूएई अंतरिक्ष विज्ञान केंद्र से संबद्ध मोहम्मद बिन रशीद स्पेस सेंटर ने लिया.

होप मिशन के लॉंच में यह भी खास होगा कि पहली बार किसी मंगल या अंतरिक्ष मिशन का काउंटडाउन अरबी भाषा में होगा. 15 जुलाई को ठीक 12:51:27am पर जापान के TNSC से लॉंच होने के लिए तय इस​ मिशन को Https://www.EmiratesMarsMission.ae/Live/ लिंक के ज़रिये लाइव देखा जा सकता है. खबरों की मानें तो लॉंचिंग समय को लेकर कुछ देर हो सकती है.
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