जानें अमेरिका में जॉर्ज फ्लायड की मौत के विरोध में जला दिए गए 'गांधी महल' की पूरी कहानी

जानें अमेरिका में जॉर्ज फ्लायड की मौत के विरोध में जला दिए गए 'गांधी महल' की पूरी कहानी
बांग्‍लादेश मूल के तीन भाइयों ने अमेरिका के मेनियापोलिस में गांधी महल नाम से रेस्‍टोरेंट शुरू किया था. इसमें बृहस्‍पतिवार को दंगाइयों ने आग लगा दी थी.

अमेरिका (America) में एक अश्वेत नागरिक जॉर्ज फ्लॉयड (George Floyd) की मौत पर कई शहरों में लोग सड़कों पर उतर आए. लोगों ने विरोध के दौरान जमकर तोड़फोड़ और आगजनी की. इसी दौरान मेनियापोलिस की गांधी महल बिल्डिंग में भी आग लगा दी गई. आइए जानते हैं क्‍या है गांधी महल की कहानी...

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अमेरिका (America) में एक अश्वेत नागरिक जॉर्ज फ्लॉयड (George Floyd) की मौत पर कई शहरों में लोग सड़कों पर उतर आए है. लोगों ने विरोध के दौरान जमकर तोड़फोड़ और आगजनी भी की. जॉर्ज फ्लॉयड की गला दबाकर हत्या का आरोप एक अमेरिकी पुलिसकर्मी पर लगा है. इसका घटना का विरोध कर रहे दंगाइयों ने मेनियापोलिस (Minneapolis) में एक रेस्टोरेंट को आग लगा दी. आग के हवाले की गई गांधी महल (Gandhi Mahal) नाम की ये बिल्डिंग मेनियापोलिस पुलिस डिपार्टमेंट से महज तीन बिल्डिंग दूर है.

इसके बाद रेस्टोरेंट मालिक और उनकी बेटी ने फेसबुक पर लिखा कि हम उम्मीद नहीं छोडेंगे. हम उन पड़ोसियों के शुक्रगुजार हैं, जो गांधी महल की सुरक्षा में अड़े रहे. आप हमारी चिंता न करें, हमलोग फिर बना लेंगे, फिर से खड़े हो जाएंगे. मेरे पिता किसी से फोन पर बात करते हुए कह रहे थे कि मेरी बिल्डिंग को जलने दो, इंसाफ मिलना चाहिए, उन पुलिस ऑफिसर्स को जेल में डाला जाना चाहिए. पोस्‍ट वायरल हो गई और ये रेस्‍टोरेंट और उसे चलाने वाला परिवार दुनियाभर की नजरों में आ गए. आइए गांधी महल रेस्‍टोरेंट के बारे में सबकुछ जानते हैं.

बांग्‍लादेश मूल के भाइयों ने लेक स्‍ट्रीट पर शुरू किया रेस्‍टोरेंट
मेनियापोलिस में लेक स्‍ट्रीट पर बना गांधी महल बाहर से किसी सामान्‍य रेस्‍टोरेंट जैसा ही दिखता है, लेकिन इसकी 7,000 वर्ग फुट की बिल्डिंग के अंदर खाना सर्व करने के अलावा भी कई काम होते हैं. गांधी महल रेस्‍टोरेंट को बांग्‍लादेश मूल के तीन भाइयों ने मिलकर शुरू किया था. गांधी महल के प्रेसिडेंट और शेफ रुहेल इस्‍लाम कहते हैं कि हमने अपने ऊपर भरोसा किया और ये रेस्‍टोरेंट शुरू किया. आज ये पूरी तरह से फायदे का कारोबार बन चुका है. इस बिल्डिंग के मेन फ्लोर के साथ ही छत पर भी कई काम किए जाते हैं. रुहेल इस्‍लाम मेनियापोलिस के उन चंद कारोबारियों में हैं, जिन्‍हें बिजनेस जर्नल के कवर पेज पर जगह मिल चुकी है. उन्‍हें लेक स्‍ट्रीट का पावर प्‍लेयर भी कहा जाता है.



गांधी महल के मालिक रुहेल इस्‍लाम बिल्डिंग की छत पर मधुमक्‍खी पालन करते हैं. साथ ही बिजली की जरूरत को पूरा करने के लिए छत पर सोलर प्‍लांट भी लगाया है.




गांधी महल बिल्डिंग में रेस्‍टोरेंट के साथ ही होता है ये सब भी 
रुहेल इस्‍लाम और उनके परिवार ने सबसे पहले अपने भाइयों के साथ मिलकर 2005 में यूनिवर्सिटी ऑफ मिनिसोटा के नजदीक डिंकीटाउन में रेस्‍टोरेंट शुरू किया था. इसके बाद 2009 में इस परिवार ने अपने कारेाबार को लेक स्‍ट्रीट पर शुरू किया. पिछले कुछ साल में रुहेल इस्‍लाम के परिवार ने 27 एवेंन्‍यु और लेक स्‍ट्रीट की अपनी बिल्डिंग्‍स के बेसमेंट को फूड स्‍टोरेज एरिया में बदल दिया. इसके अलावा उन्‍होंने वहीं एक गार्डन में मसाले और हर्ब्‍स उगाने शुरू कर दिए.

साथ ही एक फिश फार्म भी खोल दिया. इस्‍लाम परिवार रेस्‍टोरेंट की छत पर मधुमक्‍खी पालन भी करता है. इसके अलावा गांधी महल बिल्डिंग की बिजली की जरूरत को पूरा करने के लिए छत पर सोलर पैनल्‍स लगाए गए हैं. लेक स्‍ट्रीट से कुछ कदम की दूरी पर इस परिवार ने एक कम्‍युनिटी गार्डन शुरू किया है, जिसमें सब्जियां और फल पैदा किए जाते हैं. इसके अलावा रुहेल अंडों के लिए बत्‍तख पालन करते हैं.

रुहेल इस्‍लाम एक कम्‍युनिटी गार्डन, कोल्‍ड स्‍टोरेज एरिया, कैफे हाउस, बत्‍तख पालन और फिश फार्म भी चलाते हैं.


लोगों की ओर से मिली मदद से करेंगे जरूरतमंदों की सहायता
गांधी महल में बृहस्‍पतिवार को दंगाइयों ने आग लगा दी थी. इसके बाद रुहेल इस्‍लाम की बेटी हफ्सा इस्‍लाम ने फेसबुक पोस्‍ट में लिखा कि गांधी महल पिछली रात आग की लपटों में घिरा रहा. लेकिन इससे हमारी अपने समुदाय के लिए खड़े रहने और उसके लिए मर मिटने की भावना खत्म नहीं होगी. सभी लोगों की जिंदगी में शांति होनी चाहिए. लोगों ने फंड बनाकर इस परिवार की मदद करने का फैसला किया है.

हफ्सा ने लोगों की ओर से मिल रही मदद पर लिखा है कि मैं लोगों के इस विनम्रता पर आभार व्यक्त करती हूं. हम इस फंड का इस्तेमाल इस कठिन घड़ी में अपने समुदाय के सपोर्ट करने में करूंगी. उनके लिए खाने-पीने और दूसरी चीजों को उपलब्ध करवाया जाएगा. हफ्सा ने कहा है कि वो एक टेम्पररी किचेन का इंतजाम करने में लगी हैं ताकि लोगों के खाने-पीने का इंतजाम हो सके.

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First published: May 31, 2020, 1:03 PM IST
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