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कुंभ विशेष: ये है सबसे पुराना अखाड़ा जिसने की थी नागा परंपरा की शुरुआत

कुंभ विशेष: ये है सबसे पुराना अखाड़ा जिसने की थी नागा परंपरा की शुरुआत

इसी अखाड़े के एक साधु कपिल मुनि को नागा परंपरा की शुरुआत करने वाला माना जाता है.

    इलाहाबाद में आस्था के महाकुंभ का आगाज होने वाला है. 55 दिनों तक चलने वाले इस महापर्व के पहले दिन मकर संक्रांति के दिन संगम तट पर श्रद्धालु डुबकी लगाएंगे. सारे अखाड़ों का शाही स्नान भी इसी दिन होगा.

    महानिर्वाणी अखाड़ा वैदिक हिंदू परंपराओं के आधार पर स्थापित अखाड़ों में तीसरा सबसे बड़ा अखाड़ा है. यह एक शैव अखाड़ा है. इस अखाड़े के पूज्य साधुओं में से कपिल मुनि प्रमुख हैं. उन्हें ही नागा परंपरा को शुरू करने वाला भी माना जाता है. इसे अखाड़ों में सबसे पुराना माना जाता है, कहा जाता है यह अखाड़ा पहले से ही स्थापित था. आदि शंकराचार्य ने अपने जीवनकाल में इसका फिर से संगठन किया था. महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग की पूजा का जिम्‍मा इसी अखाड़े के पास है. यह परंपरा पिछले कई साल से चली आ रही है. प्रयाग और वाराणसी इस अखाड़े के प्रमुख केंद्र रहे हैं. इसके बाद हरिद्वार को इसके संतों ने अपना प्रमुख केंद्र बनाया. ओंकारेश्वर और नासिक भी इनके प्रमुख केंद्र हैं.

    महानिर्वाणी अखाड़े में कौन से साधु होते हैं प्रमुख?
    इस अखाड़े के प्रमुख को आचार्य महामंडलेश्वर की उपाधि से जाना जाता है. उनका चुनाव अखाड़े के ही महामंडलेश्वर करते हैं. और एक बार चुने जाने के बाद साधु इस पद पर जीवनभर बने रहते हैं. फिलहाल इस अखाड़े में 46 महामंडलेश्वर हैं. इसके अलावा अखाड़े में सचिव, श्रीमहंत, महंत, कारोबारी/कोठारी और थनपति/थानेदार. अखाड़े के पांच प्रमुख साधुओं को पंचेश्वर भी कहा जाता है, जिन्हें हर कुंभ में चुना जाता है.

    अखाड़े के सचिव श्री रमेशगिरीजी महाराज हैं. परमहंस नित्यानंद इस अखाड़े के प्रमुख 2013 में नियुक्त किए गए थे. उन पर यौन शोषण के आरोप थे. प्रसिद्ध दाती महाराज को भी इस अखाड़े की सदस्यता मिल गई थी. हालांकि बाद में उनसे इसकी सदस्यता ले ली गई थी.



    महानिर्वाणी अखाड़े की पेशवाई कैसे निकाली जाती है?
    जब महानिर्वाणी अखाड़े की पेशवाई निकाली जाती है तो सबसे आगे अखाड़े का ध्वज होता है. उसके पीछे नागा सन्यासियों का समूह करतब दिखाते आगे-आगे बढ़ता है. रथ पर आरूढ़ आराध्य कपिल मुनि की मूर्ति थी जिसपर महात्मा चंवर डुलाते हैं. बीच-बीच में रथ पर सवार साधु-महात्मा दर्शन के लिए कतार में खड़े श्रद्धालुओं पर जल में डुबोकर फूल बरसाते हैं.

    नागा साधुओं ने अपने अस्त्र शस्त्र के साथ पेशवाई के बीच में जगह-जगह रुककर युद्ध कौशल का भी प्रदर्शन करते हैं. सड़क के दोनों किनारो पर दो घोड़ों पर सवार दो नागा सन्यासी नगाड़ा बजाते हुए चलते हैं. इसके बीच में साधु, महात्मा, सन्यासी, नागा चलते हैं.

    यह भी पढ़ें: कुंभ विशेष: ये है सबसे ज्यादा पढ़े-लिखे साधुओं का अखाड़ा, डॉक्टर और प्रोफेसर भी हैं शामिल

    Tags: Allahabad Kumbh Mela, Allahabad news, Hindu, Naga Chaitanya, Religion, Spirituality

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