जूडो में ब्लैक बेल्ट हैं पुतिन, सिक्योरिटी में लगती है 50 हजार सैनिकों की ड्यूटी

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Updated: October 5, 2018, 10:40 PM IST
जूडो में ब्लैक बेल्ट हैं पुतिन, सिक्योरिटी में लगती है 50 हजार सैनिकों की ड्यूटी
रूसी राष्ट्रपति पुतिन फिलहाल दो दिन की यात्रा पर भारत आए हुए हैं.

पुतिन पूर्वी जर्मनी में रूसी खुफिया एजेंसी KGB के अफसर के तौर पर नियुक्त किए गए थे. 1985 से 1990 तक वह वहीं पर बतौर जासूस पोस्टेड रहे.

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अमेरिका, ब्रिटेन, जर्मनी और फ्रांस जैसे देश रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के बढ़ते पावर और कद के चलते उन्हें पसंद नहीं करते, लेकिन फिर भी पुतिन पर रूस के लोगों का विश्वास और पूरे विश्व में बढ़ता उनका कद किसी से छिपा नहीं है. वह करीब 20 सालों से सत्ता के शीर्ष पर कायम हैं. पहले प्रधानमंत्री, फिर दो बार राष्ट्रपति बने.

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संविधान के हिसाब से लगातार तीसरी बार राष्ट्रपति नहीं बन सकते थे, तो प्रधानमंत्री बने. इस दौरान अपने डिप्टी को राष्ट्रपति बनाया. लेकिन जैसे ही एक कार्यकाल पूरा हुआ, फिर से राष्ट्रपति बन गए. और तो और अपने प्रभाव का ऐसा इस्तेमाल किया कि इस बार राष्ट्रपति बनते ही सबसे पहले रूसी राष्ट्रपति का कार्यकाल 4 से बढ़ाकर 6 साल करवा दिया.

जाहिर है पुतिन का इतना प्रभाव है तो उनके उतने ही दुश्मन भी होंगे. बिल्कुल हैं, लेकिन पुतिन के आस-पास हमेशा इतनी सुरक्षा तैनात रहती है कि कोई परिंदा तक वहां पर नहीं मार सकता. रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन जूडो में ब्लैक बेल्ट हैं. उनकी सुरक्षा में 50 हजार सैनिकों की ड्यूटी लगती है. आइए जानते हैं पुतिन की सिक्योरिटी के बारे में.

पुतिन पूर्वी जर्मनी में रूसी खुफिया एजेंसी KGB के अफसर के तौर पर नियुक्त किया गया था. 1985 से 1990 तक वे वहीं पर जासूस के तौर पर पोस्टेड रहे. जर्मनी के एकीकरण के बाद वे मॉस्को वापस आ गए. वापस मॉस्को आए तब वे लेफ्टिनेंट कर्नल थे. ऐसे में वह KGB एजेंट की स्किल्स से अच्छी तरह वाकिफ हैं. छोटे-मोटे हमलों को वे खुद ही संभाल सकते हैं.

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>> रूस के राष्ट्रपति की सुरक्षा वहां की 'फेडरल प्रोटेक्टिव सर्विस' की जिम्मेदारी है.
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>>यह रूस की एक शक्तिशाली और आधुनिक इंटेलिजेंस हथियारों से लैस सुरक्षा टुकड़ी है.

>>यह पूरी टुकड़ी इतनी खुफिया है कि इसके बारे में कोई भी ऑफिशियल जानकारी रूस जारी नहीं करता है.

>>गैर-आधिकारिक सूत्रों के हिसाब से इस टुकड़ी में कुल 50,000 सैनिक हैं.

>>हालांकि, इसके सारे ही सैनिक राष्ट्रपति की सुरक्षा में नहीं रहते. कई दूसरे बड़े इंटेलिजेंस कारनामों को भी अंजाम देते हैं. लेकिन इनके जो रोल निर्धारित किए गए हैं उनमें पहली वरीयता राष्ट्रपति की सुरक्षा को ही दी गई है.

>>जब पुतिन बाहर निकलते हैं, तो इस टुकड़ी के जवान न सिर्फ पुतिन के साथ-साथ चलते हैं, बल्कि वे यह भी ख्याल रखते हैं कि पुतिन जिस रास्ते से गुजरने वाले हैं उसमें कोई सुरक्षा का खतरा न रहने पाए.

>>अभी तक यह टुकड़ी कई सारे ऑपरेशनों को अंजाम दे चुकी है, लेकिन अभी तक इन ऑपरेशनों की जानकारी साधारण जनता के लिए जारी नहीं की गई है.

क्यों खतरे में आ सकते हैं पुतिन?

>>पुतिन ने अपने सामने ही अमेरिका के राष्ट्रपतियों को कार्यकाल पूरा करते देखा है. इस दौरान रूस की हालत अमेरिका के सामने लगातार अच्छी होती गई है.

>>कमजोर आर्थिक स्थिति वाले परिवार से आने वाले पुतिन के पिता मजदूर थे. फिर भी पुतिन ने काफी मेहनत से पढ़ाई की.

>>1991 में सोवियत रूस का विघटन हो गया. पुतिन ने इसी दौर में KGB छोड़ दी और ब्यूरोक्रेसी में आ गए थे. वे राष्ट्रपति होने के नाते देश के तो कई राज जानते ही हैं. सेना और इंटेलिजेंस के भी सारे राज जानते हैं.

>>राष्ट्रपति बनने के बाद रूस को विश्व समुदाय में अपनी खोई इज्जत वापस मिलने लगी थी. इसमें पुतिन का रोल अहम था. उन्होंने रूस का खोया सम्मान पाने के लिए कई जरूरी कदम उठाए. इससे पश्चिमी देशों को उनसे प्रतिद्वंदिता है.

>>2018 में चुनाव हुए तो उनके सामने एक विरोधी अलेक्सी नवालने ने कड़ी चुनौती दी. लेकिन, अलेक्सी को जेल भेज दिया गया. 2016 में उनपर केमिकल अटैक हुआ, जिसमें अलेक्सी की आंखें जाते-जाते बचीं. उनके देश और बाहर कई लोग इस बात का विरोध करते हैं और इसके लिए वे पुतिन को जिम्मेदार मानते हैं.

>>फिलहाल पुतिन 2024 तक रूस के राष्ट्रपति रहने वाले हैं.

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First published: October 5, 2018, 1:42 PM IST
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