कौन है वो लड़का जिसने कचरे से बनाए 600 ड्रोन, क्या DRDO ने दिया काम?

कौन है वो लड़का जिसने कचरे से बनाए 600 ड्रोन, क्या DRDO ने दिया काम?
कर्नाटक के छात्र ने ई वेस्ट से ड्रोन बनाकर सुर्खियां बटोरीं. ड्रोन मॉडल की प्रतीकात्मक तस्वीर.

Thomas Alva Edison 1000 बार प्रयोगों में असफल हुए थे और उसके बाद उन्हें बल्ब के आविष्कार में सफलता मिली थी. अपने विचार के पीछे लगन के साथ लगातार कोशिश करते रहने की ताज़ा मिसाल पेश की है 22 वर्षीय Karnataka Boy ने, जो 80 बार नाकाम होने के बाद भी E-Waste Drone बनाने में कामयाब हुआ.

  • Share this:
एक Idea जो आपकी ज़िंदगी बदल दे... यह जुमला आपने किसी Advertisement में सुना होगा, लेकिन ऐसा सच में भी होता है. कर्नाटक के NM Prathap की कहानी सबूत है कि एक विचार को समय और लगन से पोसा जाए तो कमाल हो सकता है. इन दिनों चर्चा में बने हुए प्रताप अपने बनाए 600 ड्रोन्स को लेकर किस तरह सुर्खिया पा रहे हैं? प्रताप की कहानी क्या है और ये भी जानना चाहिए कि उनके बारे में जो दावे Media व Social Media में हो रहे हैं, उनका सच क्या है?

कचरे से बनाए 600 ड्रोन
कई रिपोर्टों की मानें तो प्रताप ने ई-वेस्ट यानी इलेक्ट्रॉनिक कचरे की मदद से 600 ड्रोन अब तक बनाए हैं. हवा में उड़कर तस्वीरें ले पाने में सक्षम इन ड्रोन्स की मदद से बाढ़ के दौरान कई लोगों की मदद की जा चुकी है. मंड्या के रहने वाले प्रताप को कर्नाटक में स्थानीय विधायक और सांसद से तारीफ मिल चुकी है. खबरें कह रही हैं कि देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी प्रताप की पीठ थपथपाई है, लेकिन इसका सच हम आपको आगे बताएंगे.

80 बार नाकामी के बाद प्रताप ने कैसे बनाए ड्रोन?
मैसूर में जेएसएस कॉलेज से ग्रैजुएशन के छात्र प्रताप ने 14 साल की उम्र में ड्रोन बनाने का विचार किया था. 80 बार कोशिश नाकाम होने के बावजूद प्रताप ने ज़िद नहीं छोड़ी और 16 साल की उम्र में प्रताप अपना पहला ड्रोन बना लेने में कामयाब हुए. ई कचरे से बना यह ड्रोन उड़कर तस्वीरें खींच सकता था.



प्रताप की शोहरत की कहानी कैसे आगे बढ़ी?
अपने ड्रोन मॉडल को लेकर जब प्रताप IIT Delhi पहुंचे तो वहां उन्हें दूसरा पुरस्कार मिला, लेकिन यहां से जापान के इंटरनेशनल ड्रोन प्रतियोगिता में भागीदारी का रास्ता खुला. दिसंबर 2017 में प्रताप ने इस प्रतियोगिता में भारत के लिए गोल्ड मेडल जीता. खबरों में कहा गया है कि प्रताप की प्रतिभा की कद्र करते हुए जापान के नोबेल विजेता हिडेकी शिराकावा ने उन्हें अपने घर बुलाकर काफी प्रशंसा की.

ये भी पढें:- देश में एक कॉंस्टेबल किस तरह SP बन सकता है?

unsung hero, fact check, fake news, drone boy, drdo scientist, drdo project, अनसंग हीरो, ड्रोन प्रताप, ड्रोन बनाने वाला लड़का, डीआरडीओ वैज्ञानिक, डीआरडीओ प्रोजेक्ट
600 ड्रोन बनाने वाले इस छात्र को ड्रोन प्रताप कहा जाने लगा है. तस्वीर Twitter से साभार.


यहीं नहीं रुका प्रताप का सफर
जब कर्नाटक के कुछ हिस्से भारी बाढ़ की चपेट में थे, तब प्रताप के ड्रोन्स की मदद से ज़रूरतमंदों तक दवाएं और भोजन पहुंचाने का काम किया गया था. आईआईटी में शिरकत करने के बाद से प्रताप करीब 87 देशों में अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन कर चुके हैं. यही नहीं, 2018 में उन्हें जर्मनी में अलबर्ट आइंस्टीन इनोवेशन गोल्ड मेडल से भी नवाज़ा जा चुका है. साथ ही, टोक्यो की रोबोटिक्स एग्ज़िबिशन में उन्हें गोल्ड और सिल्वर मेडल मिले हैं. कथित तौर पर प्रताप को आईआईटी बॉम्बे में लेक्चर देने का मौका भी मिला है.



प्रताप को लेकर क्या हैं दावे?
सोशल मीडिया और मीडिया की कुछ रिपोर्टों में दो तरह के दावे प्रताप को लेकर किए जा रहे हैं:

1. प्रताप को डीआडीओ में नौकरी मिल गई है या प्रताप को डीआरडीओ में वैज्ञानिक के तौर पर नियुक्त किया गया है या डीआरडीओ के ड्रोन निर्माण संबंधी एक खास प्रोजेक्ट के लिए प्रताप की सेवाएं लिये जाने जैसा दावा.
2. प्रधानमंत्री मोदी ने प्रताप की पीठ थपथपाई है या मोदी के कहने पर प्रताप को डीआरडीओ में काम मिला या पीएम मोदी ने डीआरडीओ में प्रताप की सिफारिश की.

ये भी पढें:-

क्या है चीन की 'सलामी स्लाइसिंग' रणनीति, जिससे सभी कर रहे हैं होशियार

क्या है सदगुरु का 'भैरव', जो कोरोना के खिलाफ जंग में 5 करोड़ में बिका

क्या है इन दावों का सच?
फेक न्यूज़ के फैक्ट चेक करने वाली वेबसाइट ऑल्ट न्यूज़ ने इन दावों की पोल खोलने के लिए सीधे प्रताप से ही संपर्क किया और सच जाना. प्रताप के हवाले से फैक्ट चेक रिपोर्ट में लिखा गया कि प्रताप को पीएम मोदी के कार्यालय से कोई प्रस्ताव नहीं मिला. प्रताप ने साफ कहा कि डीआरडीओ में नियुक्ति पीएम नहीं करते. अब तक प्रताप ने कोई कॉल या ई मेल न मिलने की बात कही है.

अस्ल में, दिसंबर 2019 में इंडिया टाइम्स की एक रिपोर्ट में कहा गया कि प्रताप डीआरडीओ के एक खास प्रोजेक्ट में नियुक्त किए गए हैं. तमाम तरह की फेक न्यूज़ और चर्चाएं यहीं से शुरू हुईं. प्रताप ने स्पष्ट किया कि डीआरडीओ के एक प्रोजेक्ट के लिए बेंगलूरु बेस्ड एक कंपनी काम कर रही थी और इस कंपनी के लिए प्रताप ने कुछ काम किया था. और रही बात पीएम मोदी से तारीफ या सिफारिश की, तो इस दावे को भी बेबुनियाद बताया गया है. यह सोशल मीडिया पर उड़ रही अफवाह मात्र है.
अगली ख़बर

फोटो

टॉप स्टोरीज

corona virus btn
corona virus btn
Loading