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जार्ज पंचम के लिए रवीन्द्रनाथ टैगोर ने नहीं लिखा था- जन गण मन, क्या आप जानते हैं पूरा सच?

News18Hindi
Updated: January 24, 2019, 10:34 AM IST
जार्ज पंचम के लिए रवीन्द्रनाथ टैगोर ने नहीं लिखा था- जन गण मन, क्या आप जानते हैं पूरा सच?
फाइल फोटो

साल 1911 में अंग्रेज शासक जार्ज पंचम दौरे पर आए थे. भूतपूर्व वायसरॉय लॉर्ड हार्डिंग्स के कहने पर पंचम ने बंगाल के विभाजन को रद्द कर दिया था.

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  • Last Updated: January 24, 2019, 10:34 AM IST
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अक्सर सोशल मीडिया पर हम ऐसी कोई पोस्ट या फोटो देखते होंगे जिसके मुताबिक रवीन्द्रनाथ टैगोर द्वारा रचित भारत का राष्ट्रगान  'जन गण मन', जार्च पंचम के लिए लिखा हुआ बताया जाता है. हालांकि सोशल मीडिया पर राष्ट्रगान से जुड़ी इन बातों की सच्चाई कुछ और है. इस पर खुद रवीन्द्रनाथ टैगोर ने ही सफाई दी है.

रवीन्द्रनाथ टैगोर का लिखा 'जन गण मन' पहली बार 27 दिसंबर 1911 को भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के कोलकाता अधिवेशन के दूसरे काम शुरू करने से पहले गाया गया था. यह खबर अगले दिन 'अमृत बाजार पत्रिका' में प्रकाशित की गई. प्रकाशित खबर के अनुसार कांग्रेस के अधिवेशन की शुरुआत रवींद्रनाथ टैगोर द्वारा लिखी गई एक प्रार्थना से की गई.

वहीं 'बंगाली' नामक एक अखबार की एक रिपोर्ट में कहा गया कि कांग्रेस के अधिवेशन के दूसरे दिन की शुरुआत रवींद्रनाथ टैगोर द्वारा लिखे गए एक देशभक्ति गीत से हुई. 'बॉम्बे क्रॉनिकल' में छपा था कि रवींद्रनाथ टैगोर द्वारा लिखित यह गाना बंगला भाषा में थी जिसमें संस्कृत भी शामिल थी.

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बता दें साल 1911 में अंग्रेज शासक जार्ज पंचम दौरे पर आए थे. भूतपूर्व वायसरॉय लॉर्ड हार्डिंग्स के कहने पर पंचम ने बंगाल के विभाजन को रद्द कर दिया था. उन्होंने ओडिशा को अलग राज्य का दर्जा दे दिया था. कांग्रेस के अधिवेशन में जार्ज पंचम के इस फैसले की बड़ाई की गई.

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बीबीसी पर प्रकाशित एक रिपोर्ट के अनुसार 'जन गण मन' के बाद जार्ज पंचम की बड़ाई करने वाला एक गाना भी गाया गया था. इसे रामभुज चौधरी ने लिखा था. यह हिन्दी में था. उस वक्त कुछ अखबारों ने इस की भी रिपोर्ट प्रकाशित की थी. इस गाने के बोल थे- 'बादशाह हमारा.'
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उस वक्त ब्रिटिश शासन के समर्थकों ने यह बात कुछ इस तरह फैलाई, जिससे लगा कि रवीन्द्रनाथ टैगोर ने ही जार्ज पंचम की प्रशंसा वाला गीत लिखा था. इसके बाद से ही यह कहा जाने लगा कि जार्ज पंचम के लिए रवीन्द्रनाथ टैगोर ने गाना लिखा था.

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'जन गण मन' के रचयिता रवीन्द्रनाथ टैगोर ने साल 1912 में ही यह कहा कि इसमें 'भारत भाग्य विधाता' के केवल दो ही अर्थ हो सकते हैं. पहला देश की जनता या फिर सर्वशक्तिशाली ऊपर वाला. चाहे उसे ईश्वर कहें या देव.

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टैगोर ने जन गण मन पर उठे विवाद को खारिज करते हुए साल 1939 में एक चिट्ठी भी लिखी थी. इसमें रवीन्द्रनाथ टैगोर ने कहा था- मैं उन लोगों को जवाब देना अपना अपमान मानूंगा जो मुझे इस मूर्खता के लायक समझते हैं. साल 1917 में टैगोर ने इसकी धुन बनायी थी. इसके बाद इस गाने एक भजन का रूप ले लिया. कांग्रेस के अधिवेशनों की शुरुआत इसी से होने लगी.

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First published: January 24, 2019, 10:34 AM IST
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