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Lockdown के दौरान क्यों और कैसे बूम कर रही है PORN इंडस्ट्री?

11 साल की लड़की से होमवर्क में पॉर्न को लेकर सवाल पूछे गए.

11 साल की लड़की से होमवर्क में पॉर्न को लेकर सवाल पूछे गए.

कोरोना (Corona) के चलते दुनिया भर में बने लॉकडाउन का एक साइड इफेक्ट है कि अश्लील वीडियो (Porn Video) आदि परोसने वाली इंडस्ट्री की चांदी हो गई है. भारत (India) में इसका बाज़ार सबसे ज़्यादा बढ़ा हुआ देखा गया. लेकिन आपको यह भी जानना चाहिए कि इस बूम के पीछे भारतीय समाज का एक भद्दा चेहरा किस तरह बेनकाब होता है.

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दुनिया के कई देशों में कोरोना वायरस (Corona Virus) महामारी के मद्देनज़र लॉकडाउन के हालात बने. लॉकडाउन के दौरान कई व्यवसायों (Business) और रोज़गारों पर मार की खबरें आपने सुनीं और पढ़ीं लेकिन कुछ उद्योग (Industry) ऐसे भी हैं, कोविड 19 (Covid 19) महामारी के कारण जिनकी चांदी हो रही है. इन्हीं में से एक है पॉर्न उद्योग (Porn Industry). सिर्फ भारत ही नहीं बल्कि अमेरिका और यूरोप के कई देशों में इस उद्योग के मुनाफे में खूब उछाल देखा जा रहा है.

भारत में पॉर्न उद्योग सबसे ज़्यादा बूम कर रहा है. यह तब है जबकि कई भारतीय टेलिकॉम संचालकों (Telecom Operators) ने​ निर्देशों के कारण बड़ी संख्या में वयस्क कंटेंट (Adult Content) वाली पॉर्न साइट्स को ब्लॉक कर रखा है. लेकिन इन्हें मिरर डोमेन पर देखा जा सकता है. जानिए कि कैसे भारत और दुनिया में यह उद्योग फल फूल रहा है. साथ ही, यह भी जानिए कि कैसे लॉकडाउन के समय में यह बाज़ार तब्दील हो रहा है और इसके मनोवैज्ञानिक (Psychology) पहलू क्या हैं.

भारत में 95% फीसदी बढ़ा ट्रैफिक
लॉकडाउन के पहले चरण के दौरान ही भारत में वयस्क वेबसाइटों पर ट्रैफिक में 95% का उछाल देखा गया था. दुनिया की सबसे बड़ी पॉर्न साइट पॉर्नहब ने जो डेटा जारी किया था, उसके आधार पर खबरें थीं, कि कोविड 19 के चलते क्वारैण्टीन, लॉकडाउन और आइसोलेशन बढ़ने के कारण पॉर्न की डिमांड बढ़ी. स्मार्टफोन के सबसे तेज़ी से बढ़ते बाज़ार वाले भारत में देशव्यापी लॉकडाउन की घोषणा से पहले ही पॉर्न वेबसाइट पर 20% ज़्यादा ट्रैफिक देखा गया था.

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भारत में वयस्क वेबसाइटों पर ट्रैफिक में 95% का उछाल देखा गया.


भारत में चाइल्ड पॉर्न चिंता की वजह
भारत में न केवल पॉर्नोग्राफी, बल्कि चाइल्ड पॉर्नोग्राफी की मांग जिस तरह बढ़ी है, वह बड़ी चिंता का कारण है. इंडिया चाइल्ड प्रोटेक्शन फंड की ताज़ा रिपोर्ट की मानें तो पॉर्न साइट्स पर चाइल्ड सेक्स जैसे कीवर्ड की मांग तो बढ़ी ही है, लेकिन 'बेहद हिंसात्मक चाइल्ड पॉर्न' की मांग में वृद्धि देखी गई है. वह भी लॉकडाउन शुरू होने के बाद से करीब 200 फीसदी तक.

ये आंकड़े बड़ी चिंता का विषय है क्योंकि दूसरी तरफ, बाल यौन शोषण बढ़ने की खबरें आ रही हैं. चाइल्डलाइन इंडिया हेल्पलाइन की ताज़ा रिपोर्ट के हवाले से कहा गया है कि लॉकडाउन के समय में बच्चे सेक्सुअल अब्यूज़ के जोखिम में पहले से ज़्यादा हैं. देशव्यापी लॉकडाउन के 11 दिनों में हेल्पलाइन पर 92 हज़ार एसओएस कॉल का डेटा है, जब अब्यूज़ और हिंसा के मामलों में मदद मांगी गई.


महाराष्ट्र में कैसे हुई बड़ी कोशिश?
देश में चाइल्ड अब्यूज़ के मामले में नंबर 1 राज्य महाराष्ट्र में इस समस्या से निपटने के लिए एक बड़ा ​अभियान चलाया गया. खबरों की मानें तो महाराष्ट्र पुलिस के सायबर विभाग के डीजीपी के हवाले से कहा गया कि सोशल मीडिया पर बाल पॉर्नोग्राफरों पर नज़र रखने वाले एक अमेरिकी एनजीओ ने राष्ट्रीय क्राइम ब्यूरो के साथ संदिग्धों के आईएसपी एड्रेस शेयर किए थे. इनके आधार पर इन पॉर्नोग्राफरों पर कार्रवाई की गई. हालांकि क्या और कितनी कार्रवाई हुई है, अभी इसका डेटा नहीं मिला है.

दुनिया में कैसे बढ़ी पॉर्न मांग?
पॉर्नहब के आंकड़ों के मुताबिक फ्रांस में लॉकडाउन शुरू होने के फौरन बाद ही पॉर्न की मांग 40% बढ़ी देखी गई थी. जर्मनी में वयस्क साइटों पर ट्रैफिक 25% बढ़ा देखा गया तो इटली में एडल्ट कंटेंट का उपभोग 55% तक बढ़ा. स्पेन में 60%, तो स्विटज़रलैंड में 25% मांग बढ़ने के साथ ही अमेरिका में लॉकडाउन कई चरणों में स्थानों के अनुसार रहा इसलिए वहां प्रतिबंधों के हिसाब से प्रभावित इलाकों में पॉर्न कंज़म्प्शन बढ़ा देखा गया.

वहीं, एशिया की बात करे तो रूस में रजिस्टर्ड एडल्ट साइटों पर 56% ट्रैफिक बढ़ा. दक्षिण कोरिया में चूंकि पूर्ण लॉकडाउन नहीं रहा इसलिए वहां पॉर्न की मांग में खास बढ़ोत्तरी नहीं देखी गई.

पॉर्नोग्राफी क्यों? क्या है मनोविज्ञान?
क्लीनिकल साइकोलॉजी के प्रोफेसर जोशुआ ग्रब्स ने एक लेख में लिखा है हालांकि पॉर्न देखने के पीछे सबसे बड़ा कारण कई रिसर्चों में हस्तमैथुन से जुड़ा पाया गया, लेकिन इसके अलावा भी कई कारण देखे गए. अकेलापन, निराशा, डिप्रेशन, चिंता, तनाव जैसे कई नकारात्मक भावों के समय पॉर्न देखने से तात्कालिक राहत मिलती है इसलिए लोग लॉकडाउन और महामारी के समय संभवत: ज़्यादा पॉर्न देख रहे हैं. लेकिन सवाल यह है कि क्या इसे जायज़ ठहराया जा सकता है?

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लॉकडाउन के समय में बच्चे सेक्सुअल अब्यूज़ के जोखिम में पहले से ज़्यादा हैं.


पॉर्न बिज़नेस कितना बढ़ा? कैसे जानें?
मार्च की तुलना में अप्रैल में पॉर्नहब पर ट्रैफिक 22% ज़्यादा देखा गया था इसलिए उसके मुनाफे में काफी वृद्धि का अनुमान है. दूसरी तरफ, इकोनॉमिस्ट की रिपोर्ट कहती है कि यह सच में जान पाना मुश्किल है कि यह धंधा कितना मुनाफा कमा रहा है क्योंकि सिर्फ कुछ ही आउटफिट अपना मुनाफा ज़ाहिर कर रहे हैं. बाकी नहीं चाहते कि य​ह ज़ाहिर हो कि एक वैश्विक महामारी या आपदा यानी लोगों की परेशानी के कारण वो पनप रहे हैं.

एक अमेरिकी फर्म के हवाले से यह रिपोर्ट कहती है कि दुनिया भर की बात करें तो इस उद्योग का मुनाफा तकरीबन दोगुना हो गया है. वहीं बुखारेस्ट की एक फर्म के हवाले से मुनाफा बढ़ने यानी पॉर्न ट्रैफिक बढ़ने का कारण यह भी बताया गया है कि लॉकडाउन के कारण ब्रेकअप और वैवाहिक जीवन के विवाद कम हुए हैं और सोशल डिस्टेंसिंग के नियम भी इंडस्ट्री को बढ़ावा दे रहे हैं.

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