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अपने सूरज का चक्कर 378 दिनों में लगा रहा है ये ग्रह, क्या एक और पृथ्वी मिल गई?

हमारे सौरमंडल में इस तरह के कई पिंड हैं जहां पानी है.  (प्रतीकात्मक तस्वीर)

हमारे सौरमंडल में इस तरह के कई पिंड हैं जहां पानी है. (प्रतीकात्मक तस्वीर)

हमारी पृथ्वी (Earth) 365 दिन और करीब छह घंटे में अपने सूरज की परिक्रमा कर लेती है. इस लिहाज़ से हाल ही खोजा गया यह ग्रह (Planet) पृथ्वी से काफी मिलता जुलता है. अब जानिए कि अंतरिक्ष विज्ञान (Astrology) कैसे इस ग्रह को समझ रहा है और यहां किन आधारों पर जीवन की कितनी संभावनाएं हैं.

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    पृथ्वी की तरह कोई ऐसा दूसरा ग्रह (Earth Like Planet) मिल जाए, जहां जीवन संभव हो, इस खोज में वैज्ञानिक (Scientists) लगातार जुटे हुए हैं. ताज़ा Research की मानें तो एक ऐसा ग्रह देखा गया है जो अपने सौरमंडल (Solar System) के सूरज का चक्कर 378 दिनों में पूरा कर रहा है, यानी यह पृथ्वी से काफी तालमेल रखता है. क्या यह दावा किया जा सकता है कि खगोल वैज्ञानिकों (Astrologers) ने पृथ्वी जैसा एक और ग्रह ढूंढ़ लिया है?

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    आवासीय ग्रह की खोज में अब तक क्या मिला?
    पृथ्वी जैसा दूसरा ग्रह खोजने की वैज्ञानिक मुहिम को देर से ही लेकिन गति मिलती दिख रही है. हाल ही हमें प्रॉक्सिमा बी के बारे में पता चला था जो प्रॉक्सिमा सेंटॉरी के आवासीय ज़ोन में दिखा था और अपनी कक्षा में 11 दिनों का समय ले रहा था. इससे पहले, दस लाखों में एक सुपर अर्थ ग्रह की खोज भी की जा चुकी है, जो अपने सूरज से उतनी दूरी पर स्थित है जैसे हमारे सौरमंडल में शुक्र और पृथ्वी के बीच कोई जगह हो.

    कैसा है नया ग्रह और क्यों है दूसरी पृथ्वी?
    हाल में, खगोल वैज्ञानिकों ने एस्ट्रोनॉमी एंड एस्ट्रोफिज़िक्स में एक शोध प्रकाशित कर कहा है कि KOI-456.04 नामक यह ग्रह आकार और कक्षा के लिहाज़ से हमारी पृथ्वी जैसा ही है. केपलर 160 इस ग्रह का सूरज है और इस सौरमंडल में तीन से चार ग्रह होने की उम्मीद है. इस रिसर्च में यह भी कहा गया है कि KOI-456.04 अपने सूरज की परिक्रमा 378 दिनों में पूरी कर रहा है जैसे हमारी पृथ्वी 365 दिनों में करती है.

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    हमारी पृथ्वी हमारे सूरज से जितनी दूरी पर है, KOI-456.04 भी अपने सूरज से करीब उतनी ही दूरी पर है. File Photo


    तो क्या KOI-456.04 पर जीवन संभव है?
    इस रिसर्च पेपर में कहा गया है कि हमारी पृथ्वी हमारे सूरज से जितनी दूरी पर है, KOI-456.04 भी अपने सूरज केपलर 160 से करीब उतनी ही दूरी पर स्थित है और अपनी कक्षा में घूम रहा है. हमारी पृथ्वी से करीब 3000 प्रकाशवर्ष की दूरी पर स्थित KOI-456.04 के गठन के बारे में अब भी वैज्ञानिकों ने कुछ संदेह जताया है लेकिन डेटा के आधार पर उम्मीद जताई जा रही है कि यह दूसरी पृथ्वी जैसा जीवन केंद्र हो सकता है.

    कैसे मिला यह ग्रह और अब कहां टिकी है उम्मीद?
    शोधकर्ताओं ने जब केपलर नामक अंतरक्षीय दूरबीन से मिले डेटा का अध्ययन किया तब उन्हें इस ग्रह के बारे में पता चला. अब आगे की उम्मीदें नासा के जेम्स वेब स्पेस टेलीस्कोप सहित 2026 में लांच होने वाले ईएसए के प्लेटो स्पेस टेलीस्कोप के कंधों पर रहेगी. रिसर्च में कहा गया है कि KOI-456.04 अपने सौरमंडल के उस ज़ोन में स्थित है, जहां जीवन बसने की संभावना है.

    क्या सूरजों में भी कुछ समानता है?
    वैज्ञानिकों को इस ग्रह KOI-456.04 से इसलिए भी जीवन की उम्मीदें ज़्यादा हैं क्योंकि इसके सूरज केपलर 160 की संरचना हमारे ही सूरज से मिलती जुलती मिली है. कुल मिलाकर इस सूरज से इन्फ्रारेड रेडिएशन का खतरा बहुत कम है, जैसा कि लाल छोटे तारों से होता है इसलिए माना जा रहा है कि इस ग्रह पर जीवन संभव होगा.

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