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ठीक होने के बाद कोविड 19 मरीज़ दोबारा कैसे हो सकता है पॉज़िटिव?

News18India
Updated: March 30, 2020, 4:05 PM IST
ठीक होने के बाद कोविड 19 मरीज़ दोबारा कैसे हो सकता है पॉज़िटिव?
कोविड 19

अगर कोई कोरोना वायरस से संक्रमित पाए जाने के बाद ठीक हो जाता है, तो क्या वह फिर इस संक्रमण की चपेट में पाया जा सकता है? आपको जानना चाहिए कि दोबारा पॉज़िटिव होने के क्या कारण हैं और यह भी जानें कि कोरोना वायरस को लेकर विशेषज्ञ अब तक कितना समझ पाए हैं.

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  • Last Updated: March 30, 2020, 4:05 PM IST
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पिछले कुछ दिनों में ऐसी खबरों ने सनसनी फैलाई कि कोविड 19 (Covid 19) संक्रमण (Infection) से उबर चुके मरीज़ (Covid 19 Patient) दोबारा संक्रमण के पॉज़िटिव (Positive) पाए गए. ऐसे वक्त में, जबकि नोवल कोरोना वायरस (Corona Virus) के बारे में अध्ययन (Study) अब भी जारी है और इस वायरस, संक्रमण और इम्युनिटी (Immunity) को लेकर अभी बहुत कुछ समझा जाना बाकी है, आपको जानना चाहिए कि दूसरी बार कोई कैसे इस संक्रमण का पॉज़िटिव हो सकता है.

पूर्व के वायरस भी रहे हैं असंगत
पहले कहर बरपा चुके कोरोना वायरस के प्रकार भी असंगत रहे हैं यानी अलग अलग तरह से बर्ताव करते रहे हैं. एमईआरएस यानी मर्स (MERS) जिस कोरोना वायरस से फैला था, उसके मरीज़ों के अध्ययन में देखा गया था कि एक बार ठीक होने के बाद किसी को दोबारा संक्रमण कम समय के दौरान नहीं हो रहा था. लेकिन सार्स यानी एसएआरएस (SARS) के समय में ठीक हुए मरीज़ के दोबारा संक्रमित होने के मामले देखे गए.

दूसरी बार ऐसे हो सकता है कोई कोविड 19 पॉज़िटिव



कोविड 19 के शिकार होकर ठीक हो चुके किसी मरीज़ को दोबारा यह संक्रमण होने के कुछ कारण सामने आ चुके हैं. इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार जिस कोरोना वायरस के कारण कोविड 19 होता है, वह ऐसा वायरसों में से एक है, जिनसे किसी और किस्म का फ्लू भी हो सकता है.



जैसा कि इन्फ्लुएंज़ा वायरसों के मामले में होता है, कोविड 19 में भी उत्परिवर्तन यानी म्यूटेशन की आशंका बनी रहती है. सैद्धांतिक रूप से, म्यूटेशन के कारण कोई भी व्यक्ति दोबारा कोविड 19 संक्रमण के लिए अतिसंवेदनशील हो जाता है.

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एंटिबॉडीज़ की थ्योरी
यह भी समझना चाहिए कि जो मरीज़ कोविड 19 पॉज़िटिव होता है, उसके शरीर में सुरक्षात्मक एंटिबॉडीज़ विकसित हो जाती हैं. अब सैद्धांतिक रूप से एंटिबॉडीज़ वाले मरीज़ों के ​रीलैप्स होने की आशंका रहती है. अब तक यह नहीं समझा जा सका है कि इस वायरल संक्रमण के मामले में एंटिबॉडीज़ कितने लंबे समय के लिए बचाव करने में कारगर हैं.

कुछ और भी वजहें समझें
चूंकि कोविड 19 को लेकर अब तक कोई इलाज या टीका नहीं खोजा जा सका है इसलिए अभी यह भी पता नहीं है कि किसी व्यक्ति में विकसित हुई इम्युनिटी कितनी परमानेंट है. अगर कोई व्यक्ति इम्युनोसप्रेशन दवाइयों पर निर्भर करता है, तो उसकी स्थिति भी एक कारण बन सकती है कि वह दोबारा इस संक्रमण की चपेट में आ जाए.

इसके अलावा, कोई व्यक्ति दूसरी बार कोविड 19 का शिकार इसलिए भी पाया जा सकता है कि उसका पिछला टेस्ट सही न हुआ हो और गलती से उसे 'निगेटिव' करार दे दिया गया हो. स्पेन से पिछले दिनों ऐसी खबरें थीं कि आयातित आरएनए टेस्ट किट सही रिपोर्ट नहीं दे रही थीं.

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First published: March 30, 2020, 4:05 PM IST
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