कोरोना वायरस पर सियासत : क्या चीन अपनी गलतियों से पल्ला झाड़ रहा है?

कोरोना वायरस पर सियासत : क्या चीन अपनी गलतियों से पल्ला झाड़ रहा है?
वुहान में फिर लौट संक्रमण, 5 नए केस मिले

एक वायरस चीन के वुहान शहर में हमला करता है. जब शहर पूरी तरह दहल उठता है तब हफ्तों के बाद लॉकडाउन जैसे कदम उठाए जाते हैं. इससे पहले भी चेतावनियों पर गौर नहीं किया जाता. जानिए कैसे चीन को कोविड 19 के लिए ज़िम्मेदार ठहराया जाना चाहिए और कैसे चीन इससे बच रहा है.

  • News18India
  • Last Updated: March 24, 2020, 4:14 PM IST
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दुनिया के सौ से ज़्यादा देश इस वक्त कोरोना वायरस (Coronavirus) की चपेट में आ चुके हैं और दूसरी तरफ, इस बात पर बहस चल रही है कि इस वैश्विक महामारी (Pandemic) के लिए किसे ज़िम्मेदार ठहराया जाए. क्या इसके लिए सीधे तौर पर चीन (China) को ज़िम्मेदार ठहराना ठीक है? क्या चीन दुनिया को कोसकर अपनी ज़िम्मेदारी से पल्ला झाड़ रहा है?

विशेषज्ञों के मुताबिक साल 2019 के आखिरी महीनों में जब चीन में कोरोना वायरस के मामलों (Covid-19) की शुरूआत (Coronavirus Outbreak) हुई, तभी अगर गंभीरता से इस पर काबू पा लिया जाता तो समस्या इतनी विकराल नहीं होती. लेकिन ऐसा हुआ नहीं. अब आलम ये है कि दुनिया में इस वायरस (Virus) के कारण अब तक साढ़े 16 हज़ार से ज़्यादा मौतें हो चुकी हैं. आइए समझें कि इतनी बड़ी त्रासदी (Global Catastrophe) के लिए ज़िम्मेदारी कैसे तय होगी और कैसे इस पर चीन घेरे में है.

अमेरिका और चीन के बीच बहस
अस्ल में, कुछ समय पहले अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कोरोना वायरस को 'चीनी वायरस' कह दिया था और साफ तौर पर घोषित किया था कि चीन से यह वायरस पैदा हुआ. साथ ही, यह इल्जाम भी लगाया था कि चीन ने बेहतर प्रबंधन और नियंत्रण नहीं किया इसलिए दुनिया इतनी समस्या झेल रही है.



दूसरी तरफ, चीन ने वायरस को चीनी कहे जाने पर नस्लवाद का आरोप लगाया और तबसे चीन लगातार यही कह रहा है कि यह वायरस चीन की देन नहीं है बल्कि उसे संदेह है कि यह वायरस चीन में अमेरिकी फौजों के साथ पहुंचा. यहां से विवाद शुरू हो गया कि ज़िम्मेदारी कौन लेगा.



चीनी नेताओं ने किया नज़रअंदाज़?
अब स्थिति यह है कि दुनिया भर में चीन को इसके लिए ज़िम्मेदार ठहराने की कवायद जारी है. द अटलांटिक की एक रिपोर्ट में कहा गया है कि चीन ने 2002 और 2003 में सार्स को लेकर भी ठीक प्रबंधन व नियंत्रण नहीं किया था. इसी तरह वुहान में कोरोना वायरस के मामले आने पर दिसंबर से जनवरी के बीच एक महीने तक चीनी नेताओं ने इसे गंभीरता से नहीं लिया.

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लॉकडाउन किए जाने तक करीब 50 लाख लोग वुहान छोड़ चुके थे.


इस रिपोर्ट में न्यूयॉर्क टाइम्स के हवाले से लिखा गया है कि चीन ने बजाय वायरस के खिलाफ एक्शन लेने के, उन लोगों के खिलाफ एक्शन में ज़्यादा दिलचस्पी ली, जो लोक स्वास्थ्य के खतरों को लेकर चेता रहे थे.

सात हफ्ते बाद लॉकडाउन क्यों?
चीन ने वुहान में 23 जनवरी को लॉकडाउन किया जबकि यहां वायरस इस तारीख से सात हफ्ते पहले पाया जा चुका था. इतनी देर की कोई पुख्ता वजह अब तक चीन नहीं दे सका है. यह भी एक तथ्य है कि इस समय तक वुहान के मेयर के हवाले से कहा गया था कि करीब 50 लाख लोग वुहान छोड़ चुके थे.

चेतावनियों को किया गया दरकिनार
एक से ज़्यादा बार विशेषज्ञों की चेतावनियों पर चीन पर ध्यान न देने के आरोप हैं. द अटलांटिक के लेख के मुताबिक 2019 के एक लेख में विशेषज्ञों ने चमगादड़ों से कोरोना वायरस के शुरू होने का खतरा ज़ाहिर किया था. इससे बहुत पहले 2007 में भी एक लेख में कहा गया था चूंकि दक्षिण चीन में कई स्तनधारियों का मांस खाने का चलन है इसलिए सार्स या मर्स जैसे या उससे भी खतरनाक वायरस किसी प्राणी या प्रयोगशाला से फैल सकते हैं और इनके लिए पूरी तरह तैयार रहने की ज़रूरत है. लेकिन ऐसी तमाम चेतावनियों को दरकिनार कर दिया गया.

कौन लेगा ज़िम्मेदारी?
इन तमाम बातों के इतर चीन मानने को तैयार नहीं है कि यह वायरस उसकी खामियों का नतीजा है बल्कि वह इसे अमेरिकी सेना के कारण चीन में आने की बात लगातार कर रहा है. वहीं अमेरिका और यूरोप के विशेषज्ञ चीन को हर तरह से कठघरे में खड़ा कर रहे हैं. यह भी कहा जा रहा है कि अमेरिका एशियाई देशों को बलि का बकरा बनाता रहा है.

क्या यह वाकई नस्लवाद है?
अमेरिका का चीन को ज़िम्मेदार ठहराना और कोरोना वायरस को 'वुहान वायरस' कहना क्या नस्लवाद समझा जाए? इस पर अटलांटिक का लेख कहता है कि इसे इस नज़रिए से नहीं देखना चाहिए क्योंकि किसी देश की सरकार या सत्ता कोई नस्ल नहीं है और आरोपों के दायरे में कोई कौम नहीं बल्कि सरकार है, जो ठीक प्रबंधन नहीं कर सकी.

इस लेख में यह भी ज़ोर देकर कहा गया है कि इस विपदा से उबरने के बाद दुनिया के संबंध चीन के साथ पूरी तरह नॉर्मल नहीं रह पाएंगे. चीन पूरी दुनिया के गुनाहगार के तौर पर देखा जाएगा और उसे दुनिया कभी माफ नहीं कर पाएगी.

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First published: March 24, 2020, 4:13 PM IST
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