कैसे दुनिया की सबसे बड़ी नौसेना बना चीन? क्या है समुद्र में अब उसकी ताकत?

कैसे दुनिया की सबसे बड़ी नौसेना बना चीन? क्या है समुद्र में अब उसकी ताकत?
चीन अब दुनिया में समुद्र की सबसे बड़ी ताकत बना

अमेरिकी नेवी (US Navy) सौ साल पहले से समुद्री इलाकों में सक्रिय रही है, कैरियर फ्लाइट ऑपरेशन हों या मर्चेंट शिपिंग या पानी और ज़मीन पर साझा ऑपरेशन, अमेरिका का अनुभव काफी है. जबकि चीन समुद्र (China's Power in Sea) में अनुभवहीन है. फिर भी, अमेरिकी नौसेना की ताकत से आगे निकल चुका है. अब अमेरिका की परेशानी का सबब क्या है?

  • News18India
  • Last Updated: September 3, 2020, 1:36 PM IST
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चीन दुनिया की सबसे बड़ी नौसेना (Biggest Navy of the World) बन चुका है. यही नहीं बल्कि लगातार और विकसित हो रहा है. अत्याधुनिक और स्थिति के मुताबिक उसकी नौसेना (China Naval Force) लगातार अपडेट हो रही है. 2019 से, पीपुल्स लिबरेशन आर्मी की नौसेना (PLAN) में एंटी शिप, एंटी एयर और एंटी सबमरीन हथियार और सेंसरों जैसे अत्याधुनिक (Modern Navy) और मल्टी रोल प्लेटफॉर्म हैं. अमेरिका के लिए यह चिंता की बात हो गई है कि समुद्र में चीन सबसे बड़ी शक्ति बन चुका है.

अमेरिका के रक्षा विभाग (US DoD) ने एक विस्तृत रिपोर्ट जारी करते हुए कहा कि PLAN लगातार नये जहाज़ों के निर्माण के साथ ही तमाम युद्ध उपकरणों के नवीनीकरण की तरफ आक्रामक ढंग से काम कर रहा है. अब दो सवाल प्रमुख हैं कि समुद्र में अमेरिका की तुलना में चीन की ताकत कितनी है और अमेरिका की चिंता के मुख्य पहलू क्या हैं.

तुलना : अमेरिकी और चीनी नौसेना
अमेरिकी रक्षा विभाग की 2020 की सालाना रिपोर्ट के मुताबिक दुनिया की सबसे बड़ी नौसेना PLAN के पास 130 अहम लड़ाकों सहित करीब 350 जहाज़ और सबमरीन की फोर्स है. दूसरी तरफ, अमेरिकी नौसेना की जंगी फोर्स में करीब 293 जहाज़ शामिल हैं. लेकिन, तुलना में ये ध्यान रखने की बात है कि अमेरिका के पास जो जहाज़ हैं, वो काफी बड़े हैं, जिनमें 11 तो एयरक्राफ्ट कैरियर हैं.
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दूसरी तरफ, चीन के एयरक्राफ्ट कैरियर का बेड़ा चर्चा में आया है. PLAN के पास एक पुराना और जीर्ण शीर्ण सोवियत कैरियर था, लेकिन अब मेड इन चाइना कैरियर निर्माणाधीन है और चार से ज़्यादा ऐसे जहाज़ बनवाए जा रहे हैं, जिनसे वायुसेना के विमान उड़ान भर सकें. इनमें अत्याधुनिक इलेक्ट्रोमैगनेट लॉंच सिस्टम की व्यवस्था किए जाने की भी खबरें हैं.

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वहीं, अन्य नौसैन्य हथियारों के मामले में अमेरिका के पास माक 5 से भी तेज़ रफ्तार के घातक नये हाइपरसोनिक हथियार हैं, तो चीन सिक्स्थ टाइप क्रूज़र लॉंच कर चुका है. सबमरीन भी चीनी ताकत हैं. PLAN परमाणु शक्ति और डीज़ल शक्ति वाले सबमरीनों के लिए भी काम कर रहा है. चीन उन कुछ ही देशों में शुमार हो चुका है,​ जिनके पास परमाणु क्षमता वाली बैलेस्टिक मिसाइल दागने वाली सबमरीन भी है.

क्या है चीन का इरादा?
साफ तौर पर पश्चिमी प्रशांत क्षेत्र में चीन दबदबे और वर्चस्व की लड़ाई में आगे निकलने का मकसद रखता है. अमेरिका के पास भले ही एयरक्राफ्ट कैरियर्स की संख्या ज़्यादा हो लेकिन एडवांस्ड फीचरों के साथ चीन अपनी ताकत मज़बूत कर रहा है, जिसका इस्तेमाल वह ताईवान पर कब्ज़े के लिए कर सकता है. यही नहीं, दूसरे विश्वयुद्ध के बाद अब चीन कैरियरों की लड़ाई में अमेरिका का सामना करने के लिए भी तैयार है.

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प्रशांत महासागर में गुआम और उसके परे के बेसों तक चीनी जहाज़ों और सबमरीनों की पहुंच बन चुकी है. पेंटागन की रिपोर्ट कह रही है कि आने वाले सालों में PLAN की समुद्री ताकत अत्याधुनिक हो जाएगी और न्यूक्लियर अटैक सबमरीन भी होंगी. PLAN के जंगी बेड़े इंडो पैसिफिक क्षेत्र में ज़मीनी बेसों को भी निशाना बना सकेंगे. वहीं, चीन 2019 में पहली यूशेन क्लास महत्वाकांक्षी असॉल्ट शिप भी लॉंच कर चुका है, जो ताईवान के लिए खतरनाक साबित हो सकती है.

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समुद्र में चीन की ताकत कितनी है?
चीन की समुद्री ताकत को समझने के लिए हमें तीन समुद्री क्षेत्रों में PLAN के जंगी बेड़े पर नज़र डालना चाहिए.

उत्तरी थिएटर नेवी : चीन के समुद्री इलाके के उत्तर में PLAN के पास 1 एयरक्राफ्ट कैरियर, 4 न्यूक्लियर पावर अटैक सबमरीन, 14 डीज़ल पावर अटैक सबमरीन, 1 क्रूज़र, 9 विनाशक, 12 युद्धपोत, 10 लड़ाकू पोत, 2 टैंक लैंडिंग जहाज़, 5 मध्यम लैंडिंग जहाज़ और 18 मिसाइल पैट्रोल क्राफ्ट हैं.

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अमेरिकी रक्षा विभाग की 2020 की सालाना रिपोर्ट में चीन की समुद्री शक्ति का आकलन.


पूर्वी थिएटर नेवी : यहां PLAN के पास 18 डीज़र पावर अटैक सबमरीन, 12 विनाशक, 23 युद्धपोत, 19 लड़ाकू पोत, 2 उभरचर ट्रांसपोर्ट डॉक, 16 टैंक लैंडिंग ​जहाज़, 7 मध्यम लैंडिंग जहाज़ और 46 मिसाइल पैट्रेाल क्राफ्ट हैं.

दक्षिणी थिएटर नेवी : यहां चीन के पास 1 एयरक्राफ्ट कैरियर, 2 न्यूक्लियर और 14 डीज़ल पावर अटैक सबमरीन, 4 न्यूक्लियर पावर बैलेस्टिक मिसाइल सबमरीन, 11 विनाशक,18 युद्धपोत, 20 लड़ाकू पोत, 4 उभरचर ट्रांसपोर्ट डॉक, 13 टैंक लैंडिंग व 9 मध्यम लैंडिंग जहाज़ और 22 मिसाइल पैट्रोल क्राफ्ट हैं.

मतलब यह है कि दक्षिण चीन समुद्र में भारत और अमेरिका, पूर्व में ताईवान और उत्तर समुद्र में अन्य द्वीपों को चुनौती पेश करने के लिए चीन की पूरी तैयारी है. लेकिन बात है अनुभव की, तो अमेरिकी नौसेना के पास ज़्यादा है क्योंकि चीनी नौसेना ने अब तक कोई अहम समुद्री युद्ध लड़ा नहीं है इसलिए उसके हथियारों का वास्तविक परीक्षण भी बाकी है. वहीं, यह भी ध्यान रखना चाहिए कि चीन के कोस्टगार्ड का भी लगातार आधुनिकीकरण और विस्तार हो रहा है.
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