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क्या उम्रदराज़ लोगों के लिए फायदेमंद नहीं होगी को​रोना वायरस वैक्सीन?

क्या उम्रदराज़ लोगों के लिए फायदेमंद नहीं होगी को​रोना वायरस वैक्सीन?

वैक्‍सीन बनने के समय और दवाई ढूंढे जाने को लेकर अब तक पुख्‍ता तौर पर कुछ भी नहीं कहा गया है.

वैक्‍सीन बनने के समय और दवाई ढूंढे जाने को लेकर अब तक पुख्‍ता तौर पर कुछ भी नहीं कहा गया है.

दुनिया भर में कोरोना वायरस के खिलाफ वैक्सीन का काम ज़ोरों पर है, लेकिन इसी बीच जानना चाहिए कि जब वायरस की चपेट में सबसे ज़्यादा उम्रदराज़ आबादी ही आई है, तो इसी आबादी पर टीके के असर को लेकर विशेषज्ञ क्यों चिंतित हैं. जानें कि ज़्यादा उम्र में इम्यूनिटी को लेकर कौन से मसले इससे जुड़े हुए हैं.

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    जिस तरह कोरोना वायरस (Corona Virus) संक्रमण दुनिया में बढ़ा और आंकड़ों का विश्लेषण हुआ, उससे साफ है कि ज़्यादातर हिस्सों में प्रौढ़ एवं वृद्ध आबादी (Older People) वायरस की चपेट में ज़्यादा आई और आ रही है. कारण भी आपको बताया जा चुका है कि बढ़ती उम्र के साथ प्रतिरोधी क्षमता (Resistance Power) यानी इम्यूनिटी (Immunity) कम हो जाती है, जिससे रोगों या संक्रमण की आशंका बढ़ जाती है.

    लेकिन उम्र बढ़ने से इम्यूनिटी कम कैसे होती है? यह जानना आपके लिए उपयोगी होगा क्योंकि इसी इम्यूनिटी पर निर्भर करता है कि सिर्फ कोविड 19 (Covid 19) से लड़ने वाला टीका (Vaccine) ही नहीं, कोई भी वैक्सीन या कोई इलाज आपके लिए उपयोगी है या नहीं.

    उम्र के साथ इम्यूनिटी कम होने के कारण
    उम्रदराज़ वयस्कों में एंटिबॉडीज़ पैदा करने वाली बी कोशिकाएं कम व्यवस्थित होती हैं. रिसर्च बेस्ड लेखों को प्रकाशित करने वाली नोएबल पत्रिका ने इस विषय पर एक लेख में बताया है कि जब एक बी कोशिका सक्रिय होकर विभाजित होती है तो उसके हर हिस्से में एक सिकुड़न होती है, जिससे एंटीबॉडी निर्मित जीन्स परिवर्तित हो जाते हैं.

    एंटिबॉडीज़ के कुछ वर्जन रोगाणुओं का बेहतर प्रतिरोध करते हैं. बी कोशिकाएं विभाजन जारी रखने के लिए अपनी पड़ोसी टी कोशिकाओं से संकेत पाते हुए अधिकाधिक क्षमता का उत्पादन करती हैं. लेकिन, उम्र के साथ होता यह है कि एंटीबॉडीज़ से बनने वाले जीन्स में जो परिवर्तन और नियंत्रण होते हैं, वो कम सक्रिय हो जाते हैं.

    नये रोगाणुओं के सामने कमज़ोर
    ज़्यादा उम्र के व्यक्ति किसी भी नये रोगाणु के प्रति कम सक्रियता के साथ प्रतिरोध कर पाते हैं. विशेषज्ञ इसे कोशिकाओं की याददाश्त कमज़ोर होना कहते हैं. यानी पहले किसी रोगाणु से लड़ने के लिए कोई वैक्सीन आपको दी जा चुकी है, जिसने एंटीबॉडीज़ उस वक्त विकसित की थीं, लेकिन उम्र बढ़ने के साथ कोशिकाएं इन एंटीबॉडीज़ को किसी नये किस्म के रोगाणु के खिलाफ प्रतिरक्षा के लिए इस्तेमाल करने में बेहतर प्रदर्शन नहीं कर पातीं.​ लेख में विशेषज्ञ के हवाले से लिखा है कि ऐसा क्यों होता है, अभी तक समझा नहीं गया है.

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    उम्र के आधार पर कोई वैक्सीन कितना असर करती है, इस बारे में इस ग्राफिक के ज़रिये नोएबल पत्रिका ने समझाया.


    जो पहले हो चुका है, क्या फिर होगा?
    कोशिकाओं की याददाश्त के कम होने को एक उदाहरण से समझा जा सकता है. सब सहारा अफ्रीका और लैटिन अमेरिका में महामारी माने गए पीले बुखार के समय देखा गया था कि ज़्यादा उम्र के लोग जो पहले कभी इस वायरस के शिकार नहीं हुए थे, उनके शरीर में वैक्सीन दिए जाने के बाद भी एंटीबॉडीज़ बनने में काफी ज़्यादा वक्त लगा और ज़्यादातर मामलों में जो एंटीबॉडीज़ बनीं, वो वायरस से लड़ने में सक्षम साबित नहीं हुईं.

    स्टैनफोर्ड के इम्यूनोलॉजिस्ट जॉर्ग गॉरॉंज़ी के मुताबिक कुछ ऐसा ही कोविड 19 वायरस के खिलाफ बनने वाली वैक्सीन के साथ भी हो सकता है कि उम्रदराज़ लोगों का प्रतिरक्षा तंत्र पूरी शिद्दत से रिएक्ट न करे.

    20 की उम्र के बाद नहीं बनतीं टी कोशिकाएं
    एक और महत्वपूर्ण पहलू यह है कि 20 साल की उम्र के बाद सामान्य रूप से हमारे शरीर में टी कोशिकाएं नहीं बनतीं इसलिए जितनी होती हैं, जीवन भर उतनी ही काम आती हैं. टी कोशिकाओं पर अध्ययन करने वाले गॉरॉंज़ी के मुताबिक उम्रदराज़ उस शहर की तरह है, जहां कुशल कारीगर नहीं होते. जबकि युवाओं में इसकी उलट स्थिति होती है और टी कोशिकाएं पूरी क्षमता के साथ रिएक्ट करती हैं.

    कैसे काम करते हैं टीके?
    कामयाब या कारगर टीके इम्यून कोशिकाओं की दो श्रेणियों को एक्टिवेट करते हैं यानी बी और टी कोशिकाएं. बी कोशिकाएं क्या करती हैं? रोगाणुओं को पहचान कर उन्हें निष्क्रिय कर देती हैं और उन पर वाय आकार की एंटीबॉडीज़ की एक परत चढ़ा देती हैं. फिर टी कोशिकाएं अपना काम करती हैं और संक्रमित कोशिकाओं को मार डालती हैं और प्रतिरक्षा तंत्र की गतिविधियों को आगे बढ़ाती हैं.

    वैक्सीन या टीके इस तरह के फॉर्मूले पर काम करते हैं इसलिए पैनसिल्वेनिया के इम्यूनोलॉजिस्ट माइकल कैंसरो के हवाले से लिखा गया है कि कोरोना वायरस के खिलाफ बनने वाली कोई भी वैक्सीन संभवत: उम्रदराज़ लोगों पर बेअसर साबित हो सकती है.

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    Tags: Corona, Corona Knowledge, Corona Virus, Coronavirus, Coronavirus vaccine, COVID 19, Covid-19 vaccine, Health News, Science

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