देश में एक कॉंस्टेबल किस तरह SP बन सकता है?

देश में एक कॉंस्टेबल किस तरह SP बन सकता है?
पुलिसकर्मी के लिए कॉंसेप्ट इमेज.

कुछ तो व्यक्तिगत प्रतिभा और लगन पर निर्भर करता है और कुछ विशेष स्थितियों और नीतियों पर भी. भारत के उत्तर (North India) और दक्षिण (South India) से दो अलग अलग कहानियां आपको ये बता सकती हैं कि कैसे देश में यह संभव होता है कि कोई शुरूआती पद से Officer के पद तक पहुंच सकता है और इसमें कितना वक्त लगता है.

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एक Police Constable किस प्रक्रिया के तहत पुलिस अधीक्षक (एसपी) के पद तक पहुंच सकता है? और यहां तक पहुंचने के लिए उसे कितना समय लग सकता है? इसका कोई आदर्श जवाब नहीं है क्योंकि एक तो Police Department राज्यों के अधीन है इसलिए हर राज्य में इसके नियम कुछ अलग हो जाते हैं. दूसरी बात ये कि यह प्रतिभा, विशेष स्थितियों और कार्यक्रमों पर भी निर्भर होता है. जैसा वेंकटेश (Venkatesh Hogibandi) के केस में हुआ था और वे 10 साल में सिपाही से डीएसपी बन गए थे.

वेंकटेश के साथ ही हम आपको रोशन लाल की कहानी भी बताएंगे, जो कॉंस्टेबल से ​एसपी के पद तक पहुंचे थे, लेकिन उससे पहले आपको समझना चाहिए कि यह पूरी प्रक्रिया क्या होती है और इसमें कितने पड़ाव होते हैं.

पुलिस विभाग में कैसे होती है क्रमोन्नति?
अगर कोई कॉंंस्टेबल के पद पर पुलिस विभाग में भर्ती होता है, तो नियमित प्रमोशनों के ज़रिये वह सीनियर कॉंस्टेबल, हेड कॉंस्टेबल के पदों के बाद असिस्टेंट सब इंस्पेक्टर होता है. इसके बाद एसआई और फिर इंस्पेक्टर. एसआई और इंस्पेक्टर के बीच महाराष्ट्र में असिस्टेंट इंस्पेक्टर का पद है. साथ ही, कुछ राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में इंस्पेक्टर का पद गज़ेटेड अफसर का है, तो कुछ में नहीं.
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केंद्रीय और राज्य लोक सेवा आयोग के ज़रिये भर्ती में पदस्थापना में अंतर होता है.


इसके बाद, इंस्पेक्टर प्रमोट होकर डिप्टी एसपी के पद तक पहुंच सकता है. केंद्रीय लोक सेवा आयोग की परीक्षा (अंडर ट्रेनिंग IPS) के बाद असिस्टेंट एसपी का पद मिलता है जबकि राज्य लोक सेवा की परीक्षा के बाद डीएसपी का. इसके बाद एडिशनल एसपी और फिर एसपी का पद है. एसपी के बाद प्रमोशन से डीआईजी, आईजी, एडीजी और डीजीपी के पद तक का सफर तय होता है.

सिपाही से डीएसपी 10 साल में कैसे बने थे वेंकटेश?
ये बात 2017 की है, जब वेंकटेश डीएसपी के पद पर पहुंचे थे. इससे दस साल पहले कॉंस्टेबल के पद पर भर्ती हुए वेंकटेश ने कर्नाटक के राज्य लोक सेवा आयोग की परीक्षा पास कर यह मिसाल कायम की थी. राजमिस्त्री के पेशे से जुड़े एक गरीब परिवार से आने वाले वेंकटेश को बीदर ज़िले में जो ट्रेनिंग दी गई थी, उसी की बदौलत वह यहां तक पहुंचे थे. वेंकटेश के अलावा पार्वती रेड्डी, मदिवलप्पा आदि आधा दर्जन लोग ऐसी ट्रेनिंग के बाद छोटे पदों से बड़े पदों तक पहुंचे थे.

कितनी खास थी ये ट्रेनिंग?
एक खास कार्यक्रम के तहत प्रोबेशनरी IAS अफसरों को बीदर ज़िले में चुनिंदा प्रतिभागियों को प्रेरित करने के लिए भेजा गया. एक महीने की ट्रेनिंग के बाद 11 सर्वश्रेष्ठ प्रतिभागी चुने गए, जिन्हें दिल्ली में एक साल के रेज़िडेंशियल कोचिंग कार्यक्रम के लिए भेजा गया और इसका पूरा खर्च राज्य सरकार ने प्रायोजकों की बदौलत उठाया. इस कार्यक्रम में कई अफसरों और संस्थाओं ने ट्रेनिंग देने और प्रतिभागियों का पूरा खर्च उठाने में शिरकत की. इस पूरे प्रयोग के बाद वेंकटेश ने पीएससी परीक्षा पास की.

सिर्फ प्रमोशन के भरोसे रहें, तो?
पीएससी की परीक्षा के ज़रिये वेंकटेश 10 साल में कॉंस्टेबल से डीएसपी के पद तक पहुंचे, लेकिन अगर भर्ती के बाद विभागीय पदोन्नति के भरोसे ही रहा जाए, तो कॉंस्टेबल को एसपी बनने में कितना समय लग सकता है? इस सवाल के जवाब में तय पैमाने नहीं हैं, लेकिन एक कहानी है. चंडीगढ़ के रोशन लाल की कहानी.

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कॉंस्टेबल के पद से शुरूआत कर नियमित प्रमोशनों के ज़रिये भी एसपी रैंक तक पहुंचा जा सकता है.


36 साल में कई पड़ावों के बाद मिला एसपी का पद
रोशन लाल ने केंद्रशासित प्रदेश चंडीगढ़ पुलिस सेवा में 1979 में कॉंस्टेबल के पद से शुरूआत की थी. 1983 में उन्हें वायरलेस कैडर में शिफ्ट किया गया. इसके बाद 1985 में लाल को हेड कॉंस्टेबल और 1989 में एएसआई के रूप में पदोन्नति मिली. 1991 में एसआई और 1996 में वह इंस्पेक्टर बने. 2003 में डीएसपी की रैंक पर उन्हें प्रमोट किया गया था. प्रेसिडेंट पुलिस मेडल से सम्मानित लाल के प्रमोशन का क्रम एक दशक तक रुका रहा.

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डीएसपी की रैंक पर आठ साल रहने के बाद लाल ने प्रमोशन के लिए अर्ज़ी दाखिल की थी. लेकिन इस अज़ी पर सुनवाई होते होते समय लग गया. इस बीच नई प्रमोशन पॉलिसी मंज़ूर हुई और लाल को 2015 में यानी 36 साल बाद एसपी की रैंक प्राप्त हुई. रोशन लाल की कहानी बताती है कि भारत में कैसे एक सिपाही लंबे समय के दौरान एसपी के पद तक पहुंच सकता है.
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