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तारीख दर तारीख : 1 रुपये जुर्माने तक इस तरह पहुंचा प्रशांत भूषण का केस

तारीख दर तारीख : 1 रुपये जुर्माने तक इस तरह पहुंचा प्रशांत भूषण का केस

न्यूज़ 18 क्रिएटिव

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कंटेम्प्ट ऑफ कोर्ट के मामले में सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) की बेंच ने वरिष्ठ वकील और एक्टिविस्ट प्रशांत भूषण को दोषी करार देते हुए 1 रुपये जुर्माना अदा करने का फैसला सुनाया. ये भी खबर है कि करीब सवा सौ लॉ छात्रों (Law Students) ने शीर्ष कोर्ट को पत्र लिखकर फैसले पर पुनर्विचार की मांग की है. जानिए कि सुर्खियों में रहा ये केस यहां तक कैसे पहुंचा.

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    सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर तुरंत कोई प्रतिक्रिया सीनियर वकील प्रशांत भूषण या उनके वकील ने नहीं दी है. खबरों में कहा जा रहा है कि भूषण इस फैसले को लेकर सोमवार शाम तक प्रेस कॉन्फ्रेंस (Prashant Bhushan Press Conference) कर सकते हैं. अब इस मामले में आगे क्या मोड़ आ सकता है? यह तो भूषण की प्रतिक्रिया के बाद तय होगा, लेकिन करीब दो महीने में नाटकीय ढंग से यह केस (Contempt of Court Case Against Prashant Bhushan) इस दिलचस्प मोड़ तक पहुंचा.

    तारीखवार इस तरह चला केस
    बीती 9 जुलाई को प्रशांत भूषण के खिलाफ कोर्ट की अवमानना का केस दर्ज हुआ था, लेकिन उससे पहले से लेकर आज 31 अगस्त को भूषण को सज़ा सुनाए जाने तक इस केस के अहम मोड़ इस तरह रहे.

    27-29 जून : भूषण के ट्वीट्स
    केस की वजह बने थे प्रशांत भूषण के ट्वीट्स. 27 जून को भूषण ने ट्वीट्स में पिछले छह महीनों में सुप्रीम कोर्ट की कार्यप्रणाली की आलोचना की थी. खबरों के मुताबिक भूषण ने इन ट्वीट्स में कहा था कि इतिहास में दर्ज होगा कि किस तरह सुप्रीम कोर्ट ने लोकतंत्र की हत्या में साथ दिया. 29 जून को भूषण ने अपने ट्वीट में भारत के मुख्य न्यायाधीश के 'बगैर हेलमेट और मास्क पहने एक भाजपा नेता की 50 लाख रुपये की मोटरसाइकिल चलाने' की आलोचना की थी.

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    प्रशांत भूषण केस टाइमलाइन


    9 जुलाई : भूषण के खिलाफ याचिका
    इन ट्वीट्स पर ऐतराज़ जताते हुए एडवोकेट महक माहेश्वरी ने सुप्रीम कोर्ट में कंटेम्प्ट के लिए आपराधिक मामले चलाए जाने संबंधी याचिका दाखिल की. एचटी की रिपोर्ट के मुताबिक कंटेम्प्ट ऑफ कोर्ट एक्ट की सेक्शन 15 के मुताबिक ऐसे मामले में अटॉर्नी जनरल या सॉलिसिटर जनरल की सहमति के बाद ही सुनवाई हो सकती है, लेकिन माहेश्वरी की याचिका पर बगैर इसके ही कोर्ट ने सुनवाई की यानी 'सुओ मोटो' के आधार पर.

    22 जुलाई : पहली सुनवाई और भूषण को नोटिस
    सुप्रीम कोर्ट ने माहेश्वरी की याचिका पर केस सूचीबद्ध करते हुए भूषण से जवाब तलब करने के लिए नोटिस जारी किया. इसके साथ ही, कोर्ट ने अटॉर्नी जनरल केके वेणुगोपाल को भी नोटिस भेजा.

    2 अगस्त : भूषण ने नहीं मांगी माफी
    सुप्रीम कोर्ट के नोटिस का जवाब देते हुए केस में पहली बार भूषण ने माफी मांगने से इनकार किया और अपने ट्वीट्स को अभिव्यक्ति की आज़ादी करार दिया. भूषण ने अपने जवाब में सुप्रीम कोर्ट के चार जजों द्वारा न्यायिक आचार संहिता के खिलाफ जाकर प्रेस कॉन्फ्रेंस करने का हवाला देकर अपनी अभिव्यक्ति की आज़ादी को ठीक ठहराया.

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    14 अगस्त : भूषण दोषी, लेकिन फैसला बाद में
    जस्टिस अरुण मिश्रा की अगुवाई वाली तीन जजों की बेंच 5 अगस्त को सुनवाई कर चुकी थी. इसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने सख्त अंदाज़ में कहा कि 30 साल वकालत के अनुभव वाले वरिष्ठ वकील से ऐसी उम्मीद नहीं थी कि वो ऐसा बर्ताव करेंगे जिससे सुप्रीम कोर्ट की छवि को धक्का पहुंचता है. बेंच ने माना कि भूषण के ट्वीट्स भ्रामक तथ्यों पर आधारित थे और भारतीय न्याय व्यवस्था को ठेस पहुंचाते थे. भूषण को दोषी करार दिया गया.

    20 अगस्त : एजी ने कहा भूषण को न मिले सज़ा
    शीर्ष कोर्ट के फैसला सुनाने से पहले एटॉर्नी जनरल वेणुगोपाल ने भ्रष्टाचार के खिलाफ और गरीबों के हित में भूषण के योगदान को याद दिलाते हुए कोर्ट से गुज़ारिश की कि भूषण को सज़ा न दी जाए. दूसरी तरफ, भूषण ने माफी मांगने से फिर इनकार किया और महात्मा गांधी के उस वाक्य का हवाला दिया, जिसमें गांधी ने कहा था कि 'जो कोर्ट की नज़रों में अपराध है, मेरी नज़र में एक नागरिक का धर्म है'.

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    24 अगस्त : अपने कहे पर कायम रहे भूषण
    कोर्ट ने भूषण को एक बार और विचार करने का समय दिया था, लेकिन भूषण ने माफी मांगने से फिर इनकार किया और इस बार कहा कि 'माफी मांगना अपने ज़मीर की अवमानना' होगी.

    25 अगस्त : फैसला सुरक्षित
    भूषण के आखिरी जवाब पर कोर्ट ने सुनवाई की और कोर्ट के सामने यह भी आया कि एटॉर्नी जनरल ने अपील की थी कि भूषण को सिर्फ चेतावनी देकर छोड़ा जाए. लेकिन भूषण की तरफ से मांगी न मांगे जाने पर कोर्ट ने भूषण के खिलाफ सज़ा के फैसले को सुरक्षित रख लिया.

    31 अगस्त : 1 रुपया जुर्माना, नहीं दिया तो..
    कोर्ट ने माना कि सुप्रीम कोर्ट के जजों का प्रेस कॉन्फ्रेंस करने का कदम गलत था. वहीं, कोर्ट ने भूषण को दोषी ठहराते हुए प्रतीकात्मक सज़ा के तौर पर एक रुपये का जुर्माना अदा करने को कहा. कोर्ट ने यह भी कहा कि जुर्माना अदा न करने की सूरत में भूषण को 3 ​महीने तक की कैद होगी और भूषण बतौर वकील प्रैक्टिस भी नहीं कर पाएंगे.

    Tags: Apex court, Prashant bhushan, Prashant Bhushan contempt of Court, Prashant Bhushan Tweet Case, Supreme Court, Supreme court of india

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