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जानें कैसे दुनिया को हमेशा के लिए बदल देगा कोरोना वायरस

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Updated: March 20, 2020, 2:16 PM IST
जानें कैसे दुनिया को हमेशा के लिए बदल देगा कोरोना वायरस
विशेषज्ञों का मानना है कि कोरोना वायरस पूरी दुनिया में हर स्तर पर बड़े बदलावों का कारण बनेगा. (Photo Credit: Politico.com)

कोरोना वायरस (Coronavirus) के कारण दुनिया भर में लोगों ने मिलने-जुलने के तरीकों में बदलाव कर लिया है. ज्यादातर देशों ने अपनी सीमाएं सील कर दी हैं. लोग दफ्तर जाने के बजाय वर्क फ्राम होम (Work form Home) को तव्वजो दे रहे हैं. विशेषज्ञों का मानना है कि ये वैश्विक महामारी (Pandemic) दुनिया भर में बड़े बदलावों का कारण बनेगी.

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  • Last Updated: March 20, 2020, 2:16 PM IST
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चीन से फैलना शुरू होने के बाद कोरोना वायरस (Coronavirus) अब तक दुनिया भर में 2,45,913 लोगों को संक्रमित कर चुका है. इनमें 10 हजार से ज्यादा लोगों की मौत हो चुकी है. भारत (India) में इस वायरस से अब तक 200 से ज्यादा लोग संक्रमित (Infected) हो चुके हैं. इनमें 5 लोगों की मौत हो चुकी है. संक्रमण के कारण दुनिया भर में लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी (Daily Life) पर भी काफी असर पड़ा है. लोगों ने मिलने-जुलने का तरीका तक बदल लिया है ताकि संक्रमण से बचे रहें जो अच्छा भी है. बड़ी तादाद में पेशेवर लोग दफ्तर जाने के बजाय घर से ही काम (Work from Home) करने को तरजीह दे रहे हैं. अमेरिका (US) में लोग इसे 9/11 हमले और 2008 के आर्थिक संकट (Economic Crisis) से भी बड़ा मान रहे हैं. विशेषज्ञों का मानना है कि ये वायरस खानपान, काम करने के तरीकों, कारोबार के माध्यमों, यात्रा के तौर तरीकों, घरों के डिजाइन, सुरक्षा का स्तर और निगरानी समेत पूरी दुनिया को ज्यादातर मामलों में स्थायी तौर पर बदल कर रख देगा. उनका यहां तक मानना है कि इससे लोगों की भाषा पर भी असर पड़ेगा.

क्या सभी देश अपनी सीमाओं में सिमटकर रह जाएंगे?
कोरोना वायरस हमारे घरों में कई महीनों तक मौजूद रह सकता है. इससे लोगों के सरकार के साथ संबंधों पर असर पड़ेगा. लोग खुद सरकार के प्रति अपने रवैये में बदलाव लाकर सहयोग करेंगे. वहीं, बाहरी दुनिया और आपस के व्यवहार में समय के साथ बड़ा फर्क आएगा. पॉलिटिको मैग्जीन की ओर से दुनिया के कई विशेषज्ञों से बातचीत के आधार पर किए गए सर्वे के मुताबिक, विशेषज्ञों को उम्मीद है कि कुछ बदलाव तो कुछ महीनों के भीतर ही नजर आने लगेंगे. वहीं, कुछ बड़े बदलावों में थोड़ा वक्त लगेगा. लोग देश की सीमाओं को बंद करने और अन्य देशों से सीधे संपर्क के बारे में हर पहलू से सोचने को मजबूर होंगे. आइए सर्वे में विशेषज्ञों की बातों से समझते हैं कि क्या सभी देश अपनी सीमाओं के भीतर सिमट कर रहना पसंद करेंगे? क्या छुआछूत एक बार फिर लोगों के दिमाग में हावी होगा? बाहर खाना खाने से संक्रमण के डर के कारण देश में कारोबार कर रहे लाखों रेस्टोरेंट्स का क्या होगा? हालात ऐसे ही बने रहे तो ग्लोबल इकोनॉमी किस दिशा में जाएगी?

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कुछ विशेषज्ञों का मानना है कि कोरोना वायरस जैसी बड़ी त्रासदियां बड़े अवसर भी लेकर आती हैं.




बड़े अवसर भी लाते हैं कोरोना वायरस से जैसे संकट
विशेषज्ञों का कहना है कि संकट के हालात बहुत से अवसर भी तैयार करता है. तकनीक का बेहतर इस्तेमाल होगा. लोग बहुत जरूरी होने पर ही घर से बाहर निकलेंगे. इससे ध्रुवीकरण की आशंका कम रहेगी. लोगों के एंज्वाय करने के तरीकों में तेजी से बदलाव होगा. लोग ज्यादातर चीजों के लिए तकनीक पर निर्भर होंगे. हालांकि, इस बारे में स्पष्ट तौर पर अभी कुछ भी कहना जल्दबाजी होगा. फिर भी मौजूदा हालात को देखते हुए इतना तो कहा ही जा सकता है कि लोगों के जीवन में बड़े बदलाव देखने को मिल सकते हैं.

समय के साथ लोगों में नजर आएंगे कई डिसऑर्डर
जॉर्जटाउन में भाषाओं के प्रोफेसर और लेखक डेबोर टैनन का कहना है कि हमारे वर्तमान में होने वाली घटनाएं हमारे अतीत से प्रभावित होती हैं. कोरोना वायरस संक्रमण के इस दौर में 1918 में वैश्विक महामारी लाने वाले फ्लू की यादें बार-बार ताजा हो रही हैं. हम अक्सर अपने अतीत से मिले सबक भूल जाते हैं. अब अचानक हमें याद आ रहा है कि चीजों को छूना, समूहों में लोगों के साथ रहना और संक्रमित हवा में सांस लेना भी हमारे जीवन के लिए खतरनाक साबित हो सकता है. ऐसी यादें हमारे मन में हमेशा के लिए घर कर जाती हैं. हालांकि, चीजों को छूने से परहेज करना, लोगों से हाथ मिलाने से कतराना, बार-बार हाथ धोना और सोसाइटी से कटकर रहना आने वाले समय में लोगों में डिसऑर्डर की तरह सामने आ सकता है. लोग किसी की मौजूदगी के बजाय अकेले रहने में ज्यादा सुकून महसूस करने लगेंगे. हम ये पूछने के बजाय कि क्या इसे ऑनलाइन करना जरूरी है पूछने लगेंगे कि क्या मिलना बहुत जरूरी है. ऑनलाइन कम्युनिकेशन बहुत ज्यादा बढ़ जाएगा. इससे लोगों के बीच दूरियां बढ़ती चली जाएंगी. हालांकि, हम एकदूसरे का हालचाल जानने के लिए अब के मुकाबले ज्यादा बातचीत करने लगेंगे.

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कोरोना वायरस के कारण हर धर्म में लोगों के पूजा-पाठ के तरीकों में बड़ा बदलाव आएगा.


दुनिया भर में ध्रुवीकरण की राजनीति होगी खत्म
कोलंबिया यूनिवर्सिटी में मनोविज्ञान के प्रोफेसर पीटर टी. कोलमेन का कहना है कि इससे दुनिया भर में ध्रुवीकरण की राजनीति खत्म हो जाएगी. इसका असर अमेरिकी चुनाव में साफ नजर आ जाएगा. वह कहते हैं कि ये वैश्विक महामारी लोगों में राष्ट्रीय एकता को बढ़ाएगी. ये थोड़ा आदर्श स्थिति लग सकती है, लेकिन ऐसा सोचने के दो अहम कारण हैं. पहला सभी का एक ही दुश्मन होना. लोग एक ही दुश्मन होने पर अपने पुराने बैर को भूलकर उससे निपटने के लिए एकजुट हो जाते हैं. कोरोना वायरस मानव जाति का ऐसा दुश्मन है जो जाति, रंग, क्षेत्र या हैसियत देखा बिना प्रभावित कर रहा है. दूसरा कारण, कोरोना वायरस यहीं खत्म नहीं होगा. जब कोरोना वायरस वेब-2 आएगी तो संबंधों के पैटर्न में बदलाव आएगा और मौजूदा व्यवस्थाओं को तगड़े झटके लगेंगे. ये जरूरी नहीं है कि इस बार ऐसा होगा ही, लेकिन 1816 से 1992 के बीच किए गए शोध के मुताबिक, 850 अंतरराष्ट्रीय विवादों में 75 फीसदी मामले शुरुआती 10 साल के भीतर ही खत्म हो गए. सामाजिक झटके कई स्तर पर बदलाव लाते हैं. इससे चीजें बेहतर के साथ खराब भी होती हैं. कोविड-19 को लेकर तनाव के कारण सांस्कृतिक और राजनीतिक बदलाव होना तय है. साफ नजर आ रहा है कि बदलाव होने की जमीन तैयार हो रही है.

हर धर्म के पूजा-पाठ के तरीकों में आएगा बदलाव
वोट कॉमन गुड की निदेशक एमी सुलिवन का कहना है कि कोरोना वायरस से लोगों के पूजा-पाठ करने के तरीके भी बदल जाएंगे. उन्होंने कहा कि हम ईसाई हैं. ईस्टर समुदाय के ज्यादातर लोग डर को किनारे रखकर जीवन की बात कर रहे हैं. लेकिन, सवाल ये उठता कि वे ईस्टर की सुबह जश्न कैसे मनाएंगे? क्या पहले की तरह इकट्ठे होकर सभी चर्च जाएंगे? यहूदी अपने खास दिनों को कैसे मनाएंगे? क्या मुस्लिम परिवार बिना मस्जिद जाए ही रमजान में रोजा रखेंगे? क्या वे तरावी के बिना और सिर्फ अपने परिवार के साथ ही इफ्तारी करेंगे? क्या हिंदू धर्म को मानने वाले नवरात्रों में मंदिर जाएंगे? उन्होंने कहा कि मौजूदा समय में सभी मान्यताओं पर जिंदा रहने की जंग हावी हो चुकी है. कोरोना वायरस हर धर्म के मानने वालों के पूजा-पाठ के तरीकों को बदलकर रख देगा. मानवता की बेहतरी के लिए फिलहाल इन तौर-तरीकों का बदल जाना ही बेहतर है.

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First published: March 20, 2020, 1:46 PM IST
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