लाइव टीवी

coronavirus : जानें कैसे लोगों की जिंदगी, व्‍यवहार और सोच को स्‍थायी तौर पर बदल देगा संक्रमण

News18Hindi
Updated: March 26, 2020, 2:00 PM IST
coronavirus : जानें कैसे लोगों की जिंदगी, व्‍यवहार और सोच को स्‍थायी तौर पर बदल देगा संक्रमण
कोरोना वायरस स्‍थायी तौर पर लोगों के सोचने और व्‍यवहार के तरीकों में बदलाव कर देगा.

दुनिया भर में कोरोना वायरस (Coronavirus) संक्रमण के कारण लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी और व्‍यवहार के साथ ही सोचने के तरीकों में भी बदलाव हो रहा है. विशेषज्ञों का मानना है कि लोग अकेले रहना पसंद करने लगेंगे तो उनके खानपान का तरीका भी बदलेगा. वर्क फ्रॉम होम (Work from Home) स्‍थायी कल्‍चर बन सकता है.

  • News18Hindi
  • Last Updated: March 26, 2020, 2:00 PM IST
  • Share this:
चीन से बाहर निकलने के बाद कोरोना वायरस (Coronavirus) ने पूरी दुनिया में तबाही मचा रखी है. अब तक 190 से ज्‍यादा इस वायरस से संक्रमित (Infected) हो चुके हैं. पिछले दो महीने में 4,71,820 लोग कोरोना वायरस की चपेट में आ चुके हैं. इनमें अब तक 21,297 लोगों की मौत हो चुकी है. भारत (Coronavirus in India) समेत पूरी दुनिया की सरकारें संक्रमण को रोकने के लिए हरसंभव कदम उठा रही हैं. वहीं, संक्रमण के डर से लोगों ने भी अपनी आदतों में बदलाव कर लिया है. लॉकडाउन के कारण लोग घरों में बंद होने को मजबूर हो गए हैं, जो अच्‍छा भी है. स्‍वास्‍थ्‍य विशेषज्ञों और मनोवैज्ञानिकों के साथ ही कारोबारी जगत के लोगों का मानना है कि कोरोना वायरस जाते-जाते लोगों की आवाजाही, खाने-पीने, घूमने-फिरने, सामाजिक मेलजोल, सोचने के तरीकों, कारोबार के माध्‍यमों, घरों के डिजाइन, सुरक्षा का स्तर, निगरानी और कामकाज के तरीकों में स्‍थायी तौर पर बदलाव कर देगा.

भीड़भाड़ वाली जगहों पर जाने से कतराने लगेंगे लोग
COVID-19 के फैलने के साथ ही लोग भीड़भाड़ की जगह पर जाने से कतराने लगे हैं. इस समय भारत में लॉकडाउन (Lockdown) है तो वैसे भी लोग घरों से नहीं निकल रहे हैं. समय के साथ ये लोगों की आदत में तब्‍दील हो जाएगा. वहीं, सार्वजनिक परिवहन के इस्तेमाल के समय भी लोगों में संक्रमण का डर है. दिल्ली, मुंबई, कोलकाता समेत तमाम ऐसे शहरों के लोगों में ये डर ज्‍यादा होगा, जहां बाहर से आकर काम करने वालों की संख्‍या बहुत ज्‍यादा होगा. टेरी स्कूल ऑफ एडवांस्ड स्टडीज के डीन (Research and Relationships) प्रोफेसर शालीन सिंघल के मुताबिक, लोगों ने 2003 में फैले सीवियर एक्यूट रेस्पिरेटरी सिंड्रोम (SARS) और 2012 में मिडल ईस्ट रेस्पिरेटरी सिंड्रोम (MERS) जैसी बड़ी बीमारियों से मिले सबक याद नहीं रखे. ये दोनों कोरोना वायरस संक्रमण के मुकाबले ज्‍यादा बड़ी बीमारियां थीं. हालांकि, ये उतनी तेजी से फैली नहीं थीं, जितनी रफ्तार से कोरोना वायरस ने दुनिया को अपनी चपेट में ले लिया.

सार्वजनिक वाहनों से यात्रा में बना रहेगा बीमारी की डर



सिंघल का कहना है कि भारत की आबादी बहुत ज्यादा है. ऐसे में लोगों को संक्रमण से उबरने के बाद फिर सार्वजनिक वाहनों का इस्तेमाल करना ही होगा. लेकिन, लोगों में लंबे समय तक रेलवे, मेट्रो और बसों में यात्रा के दौरान फिर संक्रमण का डर बना रहेगा. इसलिए इन सार्वजनिक वाहनों का परिचालन कररने वालों को साफ-सफाई पर ज्यादा फोकस करना होगा. वह कहते हैं कि इस समय पूरी दुनिया में यात्रा पाबंदियां लगी हुई हैं. इसके बावजूद हमारा काम चल रहा है. कम ट्रिप्स और कम लंबे ट्रिप्स की हमें आदत डालनी चाहिए. साथ ही वह कहते हैं कि लंबे समय में कम यात्राएं करना या बेवजह की यात्राओं को टालना लोगों की आदत में शामिल हो जाएगा.

कोरोना वायरस के चलते आपसी रिश्‍तों में भी बदलाव आएगा. लोग मिलने जाने के बजाय फोन पर बात करने को तरजीह देंगे.


हर धर्म के पूजा-पाठ के तरीकों में आएगा बदलाव
वोट कॉमन गुड की निदेशक एमी सुलिवन का कहना है कि कोरोना वायरस से लोगों के पूजा-पाठ करने के तरीके भी बदल जाएंगे. ईस्टर समुदाय के ज्यादातर लोग डर को किनारे रखकर जीवन की बात कर रहे हैं. लेकिन, सवाल ये उठता कि क्या वे पहले की तरह इकट्ठे होकर चर्च जाएंगे? यहूदी अपने खास दिनों को कैसे मनाएंगे? क्या मुस्लिम परिवार बिना मस्जिद जाए ही रमजान में रोजा रखेंगे? क्या वे तरावी के बिना और सिर्फ अपने परिवार के साथ ही इफ्तारी करेंगे? क्या हिंदू धर्म को मानने वाले नवरात्रों में मंदिर जाएंगे? उन्होंने कहा कि मौजूदा समय में सभी मान्यताओं पर जिंदा रहने की जंग हावी हो चुकी है. कोरोना वायरस हर धर्म के मानने वालों के पूजा-पाठ के तरीकों को बदलकर रख देगा. मानवता की बेहतरी के लिए फिलहाल इन तौर-तरीकों का बदल जाना ही बेहतर है. उनका मानना है कि ये बदलाव ज्‍यादा समय तक बरकरार रखने पड़े तो स्‍थायी व्‍यवहार में तब्‍दील हो सकते हैं.

रिश्‍तों में आएंगी दूरियां, चीजें छूने में लगेगा डर
जॉर्जटाउन में भाषाओं के प्रोफेसर और लेखक डेबोर टैनन का कहना है कि इस समय लोग चीजों को छूने, समूहों में रहने को खतरनाक मान रहे हैं. उन्‍हें डर है कि इस तरह से संक्रमण फैल सकता है. सरकारें भी सोशल डिस्‍टेंसिंग को प्रोत्‍साहित कर रही हैं. डर के कारण सामने आई ऐसी बातें हमारे मन में हमेशा के लिए घर कर जाती हैं. चीजों को छूने से परहेज करना, लोगों से हाथ मिलाने से कतराना, बार-बार हाथ धोना और सोसाइटी से कटकर रहना आने वाले समय में लोगों में डिस्‍ऑर्डर की तरह सामने आ सकता है. लोग किसी की मौजूदगी के बजाय अकेले रहने में ज्यादा सुकून महसूस करने लगेंगे. हम ये पूछने के बजाय कि क्या इसे ऑनलाइन करना जरूरी है, पूछने लगेंगे कि क्या मिलना बहुत जरूरी है. ऑनलाइन कम्युनिकेशन बहुत ज्यादा बढ़ जाएगा. इससे आपसी रिश्‍तों में दूरियां बढ़ती चली जाएंगी. हालांकि, हम एकदूसरे का हालचाल जानने के लिए अब के मुकाबले ज्यादा बातचीत करने लगेंगे.

पढ़ाई और खरीदारी के तरीकों में होगा बदलाव
कोरोना वायरस के कारण दुनियाभर में स्‍कूल और यूनिवर्सिटीज कोशिश कर रही हैं कि पढ़ाई के तरीके को बदला जाए. ऑनलाइन क्लास के जरिये स्‍टूडेंट्स को पढ़या जा रहा है. प्रोफेसर सिंघल के मुताबिक़, दुनिया भर में कई यूनिवर्सिटीज ने ऑनलाइन पढ़ाई शुरू कर दी है. तमाम स्कूल, कॉलेज भी ऐसी संभावनाओं पर काम रहे हैं. भविष्‍य में स्‍टूडेंट्स को क्लासरूम के बजाय ऑनलाइन क्लासेज से पढ़ाए जाने का कल्‍चर विकसित हो सकता है. इससे बच्‍चों में ऑनलाइन पढ़ाई आदत में तब्‍दील हो सकती है. इसके अलावा लोगों में इंटरटेंमेंट के तरीके भी बदल सकते हैं. लोग थियेटर में जाने के बजाय ऑनलाइन इंटरटेंमेंट को तव्‍वजो देने लगेंगे. मॉल जाने के बजाय ऑनलाइन शॉपिंग को तरजीह दी जाएगी. हालांकि, बाजार के जानकार ऐसी आशंकाओं को खारिज करते हैं. उनके मुताबिक, मॉल्स अगर अपने ग्राहकों को सुरक्षित माहौल देंगे तो लोग आते रहेंगे. मॉल्‍स को संक्रमणमुक्‍त होने की गारंटी डिस्‍प्‍ले करनी होगी.

विशेषज्ञों का मानना है कि इस समय शुरू की गई वर्क फ्रॉम होम की सुविधा स्‍थायी व्‍यवस्‍था बन सकती है.


खाने में हाइजीन को दी जाएगी ज्‍यादा तव्‍वजो
संक्रमण ने लोगों को साफ-सफाई और हाइजीन की अहमियत अच्‍छे से समझा दी है. भारत में हाइजीन के स्टैंडर्ड विकसित देशों जैसे नहीं हैं. अब इनमें काफी बदलाव आता दिख रहा है. ये बदलाव स्‍थायी रूप लेगा, जो हमेशा के लिए अच्‍छा है. लोगों के खानपान में भी बदलाव आना तय है. अब लोग क्वालिटी के साथ ही हाइजीन वाले खाने को तव्‍वजों देने लगेंगे. वहीं, रेस्टोरेंट्स और होटलों को भी हाइजीन स्टैंडर्ड को बेहतर करना ही होगा. इसके अलावा आने वाले समय में ऑनलाइन फूड ऑर्डर में वृद्धि होगी. वहीं, डॉक्‍टर स्‍कंद शुक्‍ला का कहना है कि इस समय लोग अधपके या कच्‍चे भोजन को न खाएं. ये संक्रमण से बचाव का कारगर तरीका है. लंबे समय तक संक्रमण बने रहने पर खानपान का ये तरीका स्‍थायी हो सकता है. भारत में बहुत बडी आबादी गांव या छोट कस्‍बों औरर शहरों से निकलकर बडे शहरों में छोटे-छोटे धंधे करके अपने परिवार पाल रही है. इस समय ऐसे लोग अपने गांवों की ओर लौट गए हैं. इनमें काफी लोग लंबे समय तक लौटकर नहीं आएंगे. ये लोग अपने गांव, कस्‍बों या छोटे शहरों में ही वैकल्पिक धंधों की तलाश कर लेंगे.

वर्क फ्रॉम होम बन सकती है स्‍थायी व्‍यवस्‍था
कोरोना वायरस की वजह से कारोबार ठप्प पड़ गए हैं. कई देशों में अंतरराष्ट्रीय यात्राएं रद्द कर दी गई हैं. होटल-रेस्टोरेंट बंद कर दिए गए हैं. आईटी सेक्टर की कंपनियों समेत कई सेक्‍टर्स में काम करने वालों को वर्क फ्रॉम होम यानी घर से काम करने की सुविधा दे दी गई है. हालांकि, अभी तक आईटी सेक्टर को छोड़कर बाकी सेक्टरों में वर्क फ्रॉम होम की इजाजत मिलना तकरीबन नामुमकिन था. कंपनियां दफ्तरों से ही काम कराने को तव्‍वजो देती आई हैं. अब कोरोना वायरस के फैलने के बाद से कंपनियां और कर्मचारी दोनों ही सतर्क हो गए हैं. हो सकता है कि ये बदलाव बाद में स्थायी रूप ले लें. एचआर फर्म रैंडस्टैड इंडिया के मुताबिक, पारंपरिक रूप से वर्क फ्रॉम होम के दायरे में नहीं आने वाले काम भी अब अब इसमें शामिल किए जा रहे हैं. अब ज्‍यादातर सेक्‍टर्स में वर्क फ्रॉम होम शुरू हो गया है. भविष्‍य में इसको लेकर कंपनियां फ्लेक्सिबल रहेंगी. हालांकि, मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में यह मुश्किल है.

ये भी देखें:

Coronavirus: अगर घर में हैं पालतू जानवर तो संक्रमण से बचने के लिए बरतें ये सावधानियां

Coronavirus: क्‍या यहां-वहां मंडराती मक्खियां भी फैला सकती हैं संक्रमण

जानें महात्‍मा गांधी ने 102 साल पहले ऐसे दी थी दुनिया की सबसे बड़ी महामारी को मात

News18 Hindi पर सबसे पहले Hindi News पढ़ने के लिए हमें यूट्यूब, फेसबुक और ट्विटर पर फॉलो करें. देखिए नॉलेज से जुड़ी लेटेस्ट खबरें.

First published: March 26, 2020, 1:45 PM IST
पूरी ख़बर पढ़ें अगली ख़बर