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तेज़ी से बेअसर हो रही हैं कोविड एंटीबॉडी, इम्युनिटी आखिर कितनी देर की?

कोविड-19 से स्वस्थ होने की दर 65.44 प्रतिशत हो गई है जबकि मृत्यु दर घटकर 2.13 प्रतिशत रह गई है.

कोविड-19 से स्वस्थ होने की दर 65.44 प्रतिशत हो गई है जबकि मृत्यु दर घटकर 2.13 प्रतिशत रह गई है.

एक तरफ, कोरोना वायरस (Coronavirus) संक्रमितों की रिकवरी सुर्खियों में आ रही है तो दूसरी ओर ताज़ा स्टडीज़ में पता चला है कि जिन मरीज़ों में हल्के लक्षण मिले, वो दोबारा इन्फेक्शन से बचे रहने के लिए ज़्यादा देर तक सुरक्षित नहीं हैं. ये भी ध्यान देने की बात है कि इसी तरह के मरीज़ों की संख्या दुनिया में सबसे ज़्यादा रही है.

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    कोरोना वायरस (Corona Virus) संक्रमण के चलते कुल कन्फर्म केस 12 लाख का आंकड़ा छूने वाले हैं, लेकिन भारत अब तक अपने आंकड़ों में रिकवरी रेट (Recovery Rate) के बेहतर होने को प्रचारित करता रहा है. भारत में साढ़े सात लाख से ज़्यादा लोग मरीज़ रिकवर हुए हैं और एक्टिव केस (Active Case) 4 लाख से कुछ ज़्यादा हैं. लेकिन ये रिकवरी कितने वक्त के लिए होती है? अब ये सवाल खड़े हो रहे हैं क्योंकि एक शोध में कहा गया है कि Covid-19 से रिकवर हो चुके मरीज़ भविष्य में इन्फेक्शन होने से लंबे समय तक बचे रहें, ऐसा मुश्किल है.

    एक रिपोर्ट के मुताबिक जिन मरीज़ों में सिर्फ हल्के लक्षण थे, रिकवर हुए ऐसे मरीज़ों के भविष्य में दोबारा इन्फेक्शन से बचे रहने की संभावनाएं कम दिखीं. इससे हर्ड इम्युनिटी और वैक्सीन के लंबे समय तक कारगर साबित होने पर भी सवाल खड़े हुए हैं. आइए विस्तार से समझें कि यह शोध क्या है और क्यों अहम है.

    क्या है ये रिसर्च?
    न्यू इंग्लैंड जर्नल ऑफ मेडिसिन में एक रिसर्च के हवाले से कहा गया कि कोविड 19 के उन 34 मरीज़ों पर परीक्षण किया गया, जिनमें हल्के लक्षण दिखे थे. इन 34 में से किसी को भी आईसीयू की ज़रूरत नहीं थी, सिर्फ दो को ऑक्सीजन और एचआईवी का इलाज दिया गया था. साथ ही, इन्हें वेंटिलेटर और रेमडेसिविर की ज़रूरत भी नहीं पड़ी थी. इन मरीज़ों के खून के नमूनों की जांच की गई.

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    न्यूज़18 क्रिएटिव


    नमूनों में एंटीबॉडीज़ की स्टडी की गई. लक्षण दिखने के करीब 37 दिन बाद पहले नमूने लिये गए और दूसरे नमूने तीन महीने पूरे होने से पहले यानी 86 दिनों के भीतर लिये गए. शोधकर्ताओं ने इन नमूनों के परीक्षण में देखा कि एंटीबॉडी स्तर तेज़ी से कम हुआ. एंटीबॉडीज़ का यह नुकसान कोरोना वायरस के पिछले वर्जन SARS की तुलना में ज़्यादा तेज़ी से हुआ.

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    इम्युनिटी लंबे समय के लिए नहीं है तो?
    दुनिया भर के वैज्ञानिक इम्युनिटी कितने लंबे समय के लिए है, इससे जुड़े अध्ययनों को देख रहे हैं. हालांकि अभी तक ऐसे कम मामले मिले हैं, जिनमें दोबारा इन्फेक्शन होना सामने आया हो, लेकिन स्वास्थ्य विशेषज्ञ अभी किसी नतीजे पर नहीं पहुंचे हैं. लेकिन यह ताज़ा स्टडी ध्यान और चिंता करने का विषय बन गई है. इस बारे में और विस्तार से बताने वाली और स्टडीज़ की ज़रूरत भी विशेषज्ञों ने जताई है क्योंकि इस स्टडी से यह साबित नहीं हुआ है कि एंटीबॉडी संक्रमण के खिलाफ सुरक्षा देने में कारगर नहीं है.

    तो कितनी देर की है एंटीबॉडी सुरक्षा?
    लंदन के किंग्स कॉलेज के ताज़ा अध्ययन में कहा गया है कि संक्रमण के सिर्फ तीन महीनों बाद ही एंटीबॉडी का स्तर इतना गिर जाता है कि उन्हें ट्रैस कर पाना मुश्किल हो जाता है. हालांकि स्वीडन में शीर्ष स्वास्थ्य अधिकारियों ने कहा कि जो लोग वायरस की चपेट में आए, वो कम से कम अगले छह महीनों के लिए इम्यून हो गए, भले ही एंटीबॉडी विकसित हुई हो या नहीं. स्वीडन के लोक स्वास्थ्य सिस्टम ने माना कि संक्रमित हो चुके लोग हाई रिस्क समूहों के संपर्क में आने के लिए सुरक्षित हो चुके हैं.

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