भारत लड़ रहा है डॉक्टरों को बचाने की जंग, लेकिन क्या देर हो चुकी?

आसान नहीं है PPE सूट पहन कर काम करना
आसान नहीं है PPE सूट पहन कर काम करना

खबरों की मानें तो विशेषज्ञ साफ कह रहे हैं कि कोरोना वायरस के संकट की इस घड़ी में मेडिकल अमले से हीरो की तरह बर्ताव की उम्मीद तो ठीक है लेकिन पर्याप्त सुरक्षा के बग़ैर उनसे यह अपेक्षा कितनी उचित है? जानिए देश के अधिकतर राज्यों में कैसे डॉक्टर पीपीई के अभाव में जान जोखिम में डालकर ​फ़र्ज़ निभाने पर मजबूर हैं.

  • News18India
  • Last Updated: April 13, 2020, 3:29 PM IST
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भारत (India) में कोरोना वायरस संक्रमण (Corona Virus) के 9 हज़ार से ज़्यादा मामले सामने आ चुके हैं और 300 से ज़्यादा मौतें हो चुकी हैं. पहले 100 मामले भारत के बड़े शहरों में पाए गए थे, लेकिन इसके बाद छोटे शहरों और कस्बों तक संक्रमण पहुंच चुका है. इन हालात में कोरोना के खिलाफ लड़ रहे डॉक्टरों (Doctors) और मेडिकल टीम (Medical Force) की सुरक्षा का सवाल खड़ा हो गया है क्योंकि पर्याप्त उपकरण नहीं हैं.

दुनिया के कई देशों की तरह भारत भी अब उस लड़ाई में शामिल हो गया है, जिसमें उसे पर्सनल प्रोटेक्टिव एक्विपमेंट्स (Personal Protective Equipments) यानी पीपीई (PPE) की ज़रूरत है और वह भी समय रहते. पूरे देश में कई राज्य इन उपकरणों की समस्या से जूझ रहे हैं. कुछ मामलों में तो बेहद गंभीर स्थिति बन गई है. कैसे लड़ रहा है मेडिकल अमला और यह भी जानें कि कोविड 19 (Covid 19) के खिलाफ भारत की जंग किस स्तर पर पहुंच गई है.

रेनकोट पहनने पर मजबूर डॉक्टर
देश में कई जगह आवश्यक उपकरणों के अभाव में हालात बेहद खराब हो गए हैं. बीबीसी की रिपोर्ट की मानें तो कुछ जगहों पर डॉक्टर रेनकोट और हेलमेट पहनकर सेवाएं देने पर मजबूर हैं. उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ के एक डॉक्टर के हवाले से रिपोर्ट में कहा गया है कि 'हमें पीपीई किट्स जितनी जल्द मिलनी चाहिए, नहीं मिल रहीं. यह एक युद्ध है, जिसमें हम सैनिकों की भूमिका में हैं और आप सैनिकों को युद्ध में बग़ैर हथियारों के नहीं भेज सकते'.
इसलिए हो रहे हैं अस्पताल बंद


दिल्ली और मुंबई में कई डॉक्टरों और नर्सों को जांच में कोविड 19 संक्रमण से ग्रसित पाया गया तो जिन अस्पतालों में वो काम कर रहे थे, उन्हें बंद करने की नौबत आ गई. ऐसी घटनाओं के बाद मुख्यधारा के मेडिकल स्टाफ की सुरक्षा को लेकर गंभीर चिंता खड़ी हो गई.

डॉक्टरों के मददगारों को भी चाहिए किट्स
सिर्फ डॉक्टरों ही नहीं, बल्कि कानूनी एजेंसियों की भी एक भारी टीम को पीपीई किट्स की ज़रूरत है क्योंकि ये टीमें भी स्वास्थ्यकर्मियों की मदद से लेकर क्वारैण्टीन नियमों के पालन करवाने जैसे प्रबंधों में जुटी हुई हैं. उप्र के एक आला अधिकारी के हवाले से रिपोर्ट कहती है कि 'पुलिसकर्मी भी संक्रमण के सीधे खतरे में हैं इसलिए हमें भी सुरक्षा की ज़रूरत है'.

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दिल्ली के सीएम केजरीवाल ने केंद्र को पीपीई की तत्काल ज़रूरत के बारे में हाल में लिखा था. फाइल फोटो.


कई राज्यों ने बताई पीपीई की ज़रूरत
दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने हाल में कहा था 'हमें फ़ौरन और पीपीई किट्स की ज़रूरत है, जिसके लिए हमने केंद्र को लिखा है'. इसी तरह कई राज्यों के मुख्यमंत्री ने और पीपीई किट्स की आवश्यकता ज़ाहिर की है.

कितनी किट्स चाहिए देश को?
पीपीई के लिए जिसे ज़िम्मेदारी सौंपी गई है, उस शासनाधीन इकाई एचएलएल लाइफकेयर लिमिटेड के हवाले से रिपोर्ट कहती है कि भारत को कम से कम 10 लाख पीपीई किट्स की तत्काल ज़रूरत है. साथ ही 4 करोड़ एन95 मास्क, 2 करोड़ सर्जिकल मास्क और कम से कम 10 लाख लीटर हैंड सैनेटाइज़र की तत्काल आवश्यकता की स्थिति बनी हुई है. वहीं, स्वास्थ्य मंत्रालय ने कहा है कि पीपीई के लिए 20 घरेलू उत्पादकों को स्वीकृति दे दी गई है और 17 लाख किट्स के आदेश दिए गए हैं.

लेकिन ये जंग समय के साथ है!
मंत्रालय के दावे ठीक, उत्पादन की प्रक्रिया और दुनिया के कई हिस्सों में लॉकडाउन के चलते आयात की विषम स्थि​तियों के मद्देनज़र यह ज़रूरत समय रहते की है. मंत्रालय ने एक प्रेस रिलीज़ में यह भी कहा कि उत्पादक प्रतिदिन 15 हज़ार किट तक उत्पादन कर पा रहे हैं.

क्या यहां भी देर हो गई?
लोक स्वास्थ्य विशेषज्ञ अनंत भान ने बीबीसी को बताया कि सरकार को यह फैसला जल्दी लेना चाहिए था. उन्होंने कहा कि हमें जनवरी में ही वैश्विक महामारी के बारे में पता था, तभी तैयारियों का यह सिलसिला शुरू हो जाना चाहिए था. लेकिन, सरकार ने पीपीई के लिए उत्पादन के निर्देश 23 मार्च को जाकर जारी किए. भान ने यह भी कहा कि दूसरी बड़ी चुनौती पीपीई किट्स को देश के उन सुदूर इलाकों तक समय से पहुंचाने की है, जहां इनकी सख़्त ज़रूरत है.

सूट बनाने का ज़िम्मा कपड़ा मंत्रालय ने लिया
कोरोना वायरस संक्रमण से ग्रस्त मरीज़ों का इलाज करने वाले डॉक्टरों की सुरक्षा के लिए 1 लाख 30 हज़ार कवरऑल सूट मुहैया करवाने का ज़िम्मा कपड़ा मंत्रालय ने लेकर भारतीय निर्माताओं को इस अभाव की आपूर्ति के लिए कहा है. इस मामले से जुड़े अधिकारियों के हवाले से हिंदुस्तान टाइम्स की रिपोर्ट में उल्लेख है कि ये निर्माता 22 हज़ार सूट प्रतिदिन उत्पादन की क्षमता तक पहुंच चुके हैं.

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