चीनी आर्मी पर नज़र रख रहा है भारत का ये आसमानी जासूस

चीनी आर्मी पर नज़र रख रहा है भारत का ये आसमानी जासूस
EMISAT की लॉंचिंग को 2019 में एक हज़ार लोगों ने लाइव देखा था.

पाकिस्तान के उस नेवल बेस के बारे में सूचनाएं मिली हैं, जो चीनी सबमरीन के लिए पनाहगाह रहा है. इसके साथ लद्दाख (Ladakh) से लेकर अरुणाचल प्रदेश (Arunachal Pradesh) तक चीन से जो बॉर्डर (LAC) साझा होता है, वहां सेनाओं की गतिविधियों से संबंधित सूचनाएं भी अंतरिक्ष में स्थित भारत का जासूसी उपग्रह (Spy Satellite) बराबर भेज रहा है, जो बड़ी उपयोगी हैं.

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पैंगोंग त्सो (Pangong Tso) में चीनी सेना (China Army) के पीछे हटने के बाद भारत और चीन के बीच वार्ता (India-China Talks) का अगला दौर अगले हफ्ते से शुरू हो सकता है. लद्दाख में LAC पर करीब डेढ़ महीने बाद तनाव कुछ कम होता नज़र आ रहा है, लेकिन भारत और चीन दोनों ही जंगी बेड़े सीमा (India-China Border) पर तैनात किए हुए हैं. इस बीच, सीमा पर चीनी सेना की गतिविधियों पर आसमान से भारत नज़र रख रहा है.

जी हां, भारत की जासूसी सैटेलाइट EMISAT चीन की पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (PLA) के बारे में काफी सूचनाएं भेज रही है. ये भी गौर किए जाने की बात है कि EMISAT में कौटिल्य नाम का कैरियर है जिसे डीआरडीओ संचालित करता है.

इलेक्ट्रॉनिक इंटेलिजेंस पैकेज कौटिल्य ने अरुणाचल प्रदेश के पास चीनी कब्ज़े वाले तिब्बत में चीनी सुरक्षा बलों की स्थिति से जुड़ी सूचनाएं भेजी हैं. EMISAT इसरो की मिनी सैटेलाइट-2 के आसपास बनाई गई सैटेलाइट है, जिसे 2019 में PSLV-C45 द्वारा 748 किलोमीटर की ऊंचाई पर पोलर कक्षा में सफलता से स्थापित किया गया था. इस सैटेलाइट का मकसद इलेक्ट्रोमैग्नेटिक स्पेक्ट्रम माप के लिए था.



देश का पहला ई-जासूसी उपग्रह
EMISAT देश की पहली इलेक्ट्रॉनिक निगरानी वाली यानी ELINT सैटेलाइट है और यह काफी क्षमतावान है. इसरो और डीआरडीओ ने मिलकर इसे डेवलप किया था. इसके ज़रिये को भारत को सेनाओं की लोकेशन के साथ ही सीमाओं पर तैनात किए जाने वाले रडारों के बारे में भी सूचनाएं मिलेंगी.

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पिछले साल इसरो ने PSLV से EMISAT समेत 28 विदेशी उपग्रह भी लॉंच किए थे.


कुछ रक्षा विशेषज्ञों के हवाले से खबरों में कहा जा रहा है कि इस सैटेलाइट के ज़रिये भारत को मौजूदा हालात में ज़मीनी और हवाई इंटेलिजेंस में काफी बेहतर स्थिति हासिल होगी. केंद्रीय रक्षा मंत्रालय की 2013-14 की सालाना रिपोर्ट में उल्लेख था कि कैसे स्वदेशी मिनी सैटेलाइट कौटिल्य प्रोजेक्ट से इंटेलिजेंस में मदद मिलेगी.

ELINT में रिकॉर्डिंग और इंटरसेप्ट किए गए सिग्नलों के विश्लेषण के फीचर मौजूद हैं जिससे किसी रडार के आरएफ सिग्नेचर बनाने में मदद मिलती है. साथ ही, इसकी मदद से संघर्ष की स्थिति में यह तेज़ी से रडार की पहचान और लोकेशन भी दे सकता है.

EMISAT क्यों है अंतरिक्ष में जासूस?
1 अप्रैल 2019 को लॉंच किए गए इस मिशन का मकसद यही था कि इसके ज़रिये भारत चीन और भारत पाकिस्तान बॉर्डर पर आतंकी या सैन्य गतिविधियों पर नज़र रखी जा सके. यह सैटेलाइट बॉर्डर पर तैनात रडार और सेंसरों पर निगरानी रखती है. सिर्फ मानवीय नहीं बल्कि संचार से जुड़ी गतिविधियों पर भी यह सैटेलाइट नज़र रखती है.

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अब तक EMISAT से क्या सूचनाएं मिलीं?
सूत्रों के हवाले से खबरें कह रही हैं कि ताज़ा गतिविधियों के मुताबिक चीनी सेना का डेपसांग सेक्टर में मूवमेंट देखा गया है. इससे पहले EMISAT से फिंगर 4 इलाके में एलएसी के पास चीनी संरचनाओं के बारे में सूचना मिल चुकी थी. वहीं सैटेलाइट RISAT-2BR1 के डेटा के मुताबिक चीनी सेना ने हॉर्न ऑफ अफ्रीका में भारी लागत से डिजीबॉती में नेवी बेस तैयार कर लिया है.

बीती 11 जुलाई को EMISAT के इंटेलिजेंस ने पाकिस्तान नेवी के ओरमारा बेस या जिन्ना नेवल बेस के बारे में सूचनाएं भेजी थीं. यहां सबमरीन सुविधाएं हैं और यह बेस पिछले कुछ सालों से चीनी पनडुब्बियों का बेस रहा है.
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