पाकिस्तान में महंगाई पर कुर्बान होगी ईद! कैसे होगी कुर्बानी?

पाकिस्तानी पशु बाज़ार.
पाकिस्तानी पशु बाज़ार.

पाकिस्तान (Pakistan) में जारी आर्थिक संकट (Economic Crisis) के चलते इस बार लोग पूरे चाव और स्वाद के साथ ईद (Eid Ud Adha) नहीं मना पाने की स्थिति में हैं. जानिए पाकिस्तान में फलों, सब्ज़ियों वगैरह के साथ ही पशुओं के बढ़े दामों से कितना हाहाकार मचा है.

  • News18Hindi
  • Last Updated: August 12, 2019, 8:10 AM IST
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'गरीबी में आटा गीला..' कहावत इन दिनों पाकिस्तान (Pakistan) पर एकदम चरितार्थ होती दिख रही है. पाकिस्तान आर्थिक संकट और बेतहाशा महंगाई (Inflation) से जूझ रहा है और ऐसे में उसने कश्मीर (Kashmir) के मुद्दे पर अपना विरोध जताते हुए भारत (India) के साथ कारोबारी रिश्ते (Trade Relations) भी स्थगित कर दिए हैं. नतीजा ये है कि पाकिस्तान में इस बार ईद उज अज़हा यानी बकरीद की रौनक और स्वाद दोनों फीके हो सकते हैं. फलों और सब्ज़ियों के कई उत्पादों के दाम तो पाकिस्तान में आसमान छू ही रहे हैं, लेकिन पाकिस्तान की अवाम के लिए बड़ी मुश्किल ये है कि बकरीद में कुर्बानी कैसे दी जाए! क्योंकि महंगाई है तो बकरों के दाम (Livestock Prices) भी चढ़ गए हैं.

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पहले से ही महंगाई के बोझ से दबे पाकिस्तान ने आर्टिकल 370 (Article 370) के प्रावधान रद्द कर जम्मू कश्मीर को केंद्रशासित प्रदेश (Union Territory) बनाने के भारत के फैसले के विरोध में व्यापारिक संबंध फिलहाल टाल देने का कदम उठाकर एक तरह से अपने ही पैरों पर कुल्हाड़ी मार ली है. वहां के लोगों के सामने बकरीद (Bakrid) पर काफी समस्या हो गई है क्योंकि पाकिस्तानी अखबार डॉन की रिपोर्ट के मुताबिक अदरक और लहुसन क्रमशः 400 रुपये व 320 रुपये किलो बिक रहा है. हरी मिर्च 100 रुपये किलो और कुछ दिन पहले 35 रुपये किलो बिकने वाला प्याज़ अब 50 रुपये किलो बिक रहा है. वहीं टमाटर की कीमतों में भी उछाल है.



अब जानें पाकिस्तान में बकरों के दामों की कहानी. पाकिस्तान में कैसे इस ईद पर कुर्बानी की रस्म अदा की जाएगी क्योंकि पिछले साल की तुलना में वहां बकरों के दाम दोगुने से ज़्यादा हो चुके हैं और वो भी तब, जबकि देश महंगाई की चपेट में है.
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पाकिस्तान में पशुओं की कीमतों में पिछले साल की तुलना में 50 से 80 फीसदी तक इज़ाफ़ा हुआ है.


इस तरह से हो रहा है मोलभाव?
लाहौर की सबसे बड़ी पशु मंडी है शाहपुर कांजरान. डॉन की खबर के हवाले से देखें, कैसे यहां बकरों की खरीदारी के दौरान देश की आर्थिक नीति की चर्चा हो रही है. एक खरीदार कहता हुआ देखा गया 'डॉलर बहुत महंगा हो गया है और हमारा रुपया बहुत गिर गया है भाईजान, ये बकरा 30 हज़ार में दे दो, एकदम सही कीमत है'. उसे जवाब मिला 'हमारे हालात भी आप जैसे हैं सरकार, हम भी इस बकरे को 38 हज़ार में बेचेंगे तो बमुश्किल 2 हज़ार कमाएंगे. छह महीने इस बकरे पर इन्वेस्टमेंट किया है, क्या इतना भी न कमाएं?'

तो क्या है बकरों की कीमतें?
कुर्बानी के लिए पाकिस्तान में पशु मंडियों में लाए जा रहे पशुओं की कीमतों में पिछले साल की तुलना में 50 से 80 फीसदी तक इज़ाफ़ा हुआ है. उर्दूपॉइंट की चार दिन पहले की एक रिपोर्ट के मुताबिक़ इस साल मंडियों में एक बकरे की औसत कीमत 40 से 50 हज़ार रुपये तक है जबकि पिछले साल यही 10 से 20 हज़ार रुपये की थी. वहीं, सेहत, नस्ल और वज़न के हिसाब से कोई कोई बकरा तो लाखों रुपये तक में भी बिक रहा है.

आधे लोग नहीं दे पाएंगे कुर्बानी!
दूसरी ओर, इसी रिपोर्ट की मानें तो बकरीद के मौके पर लाहौर की कांजरान मंडी में करीब सवा लाख पशु बेचे जा रहे हैं. इनमें शमिल गौवंश के एक पशु की कीमत 90 हज़ार से सवा लाख रुपये तक है, जो पिछले साल 40 हज़ार रुपये की आसपास रही थी. उर्दूपॉइंट ने अपनी रिपोर्ट में एक खरीदार के हवाले से लिखा है कि पाकिस्तान में इस साल तकरीबन आधी आबादी ईद पर कुर्बानी नहीं दे सकेगी.

क्यों बढ़ीं इस कदर कीमतें?
एक कारोबारी के हवाले से इस रिपोर्ट में लिखा गया है कि इस साल पशुओं की कीमतें बढ़ने की दो खास वजहें रहीं. पिछले दिनों मौसमी महामारी फैलने के कारण बड़ी संख्या में पशु मारे गए और दूसरी तरफ, महंगाई के कारण पशुओं के टीके, इलाज के साथ ही ट्रांसपोर्ट महंगा हो जाने के कारण पशुओं का पालन और देखरेख काफी महंगा पड़ा इसलिए विक्रेता ज़्यादा दामों पर बिक्री के लिए मजबूर हैं. वहीं, एक ग्राहक के हवाले से लिखा गया है कि विक्रेता मुंहमांगे दाम मांग रहे हैं क्योंकि इस बाज़ार में दाम निर्धारण की व्यवस्था नहीं है.

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पाकिस्तान में सब्ज़ियों, फलों और मसालों के दामों में भी बढ़ोत्तरी हुई है.


तो क्या निकाला गया रास्ता?
पाकिस्तान की एक न्यूज़ एजेंसी ने पशु विक्रेताओं और ग्राहकों से बातचीत के हवाले से कहा है कि भेड़, बकरों और गौवंश की कीमतों में बेतहाशा बढ़ोत्तरी होने के कारण इस साल हो सकता है कि पाकिस्तान के लोग मिल जुलकर कुर्बानी देने का रास्ता निकालें. यानी एक परिवार अलग से कुर्बानी देने के बजाय एक बड़ा समूह मिलकर एक कुर्बानी देने का रास्ता खोज सकता है.

क्या सिर्फ पाकिस्तान में ही है ये हाल?
यूएई में भी इस साल कुर्बानी के पशुओं की कीमतों में भारी इज़ाफ़ा हुआ है. गल्फ़न्यूज़ ने अपनी रिपोर्ट में लिखा है कि पाकिस्तान पशु निर्यात नहीं कर रहा है, ईरान और आस्ट्रेलिया से भी इस साल पशु उपलब्ध नहीं हैं. दूसरी तरफ, ट्रांसपोर्ट का ज़रिया इस बार पानी का जहाज़ न होकर हवाई जहाज़ रहा इसलिए भी कीमतें बहुत बढ़ गई हैं. दुबई सहित यूएई में 2 से साढ़े तीन हज़ार दिरहम तक बकरे बिक रहे हैं. 2 हज़ार दिरहम करीब 39 हज़ार रुपये होता है. वहीं, हल्की क्वालिटी के बकरों की कीमतें इस साल 400 से 500 दिरहम तक हैं यानी करीब साढ़े सात हज़ार से 10 हज़ार रुपये तक.

यानी सोने से कीमती है बकरा?
कुछ ही रोज़ पहले न्यूज़18 ने एक खबर में आपको बताया था कि पाकिस्तान में बकरीद के मद्देनज़र बकरों का बाज़ार कितने मुनाफे का होगा. अमेरिका-चीन ट्रेड वॉर के चलते पाकिस्तान में सोने के दाम रिकॉर्ड 86,250 पाकिस्तानी रुपये तक पहुंचे थे. डॉन ने एक खबर में बताया था कि लोग इस दौर में सोना बेचकर पशु खरीदने लगे थे, ताकि ईद के आसपास बेतहाशा दामों में कुर्बानी के लिए बकरे या अन्य पशु बेचकर भारी मुनाफा कमा सकें.

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