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जानिए सद्दाम के बाद कैसे तबाह हुआ इराक

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Updated: November 5, 2019, 5:43 PM IST
जानिए सद्दाम के बाद कैसे तबाह हुआ इराक
1979 में इराक के राष्ट्रपति अल-बकर के इस्तीफे के बाद सद्दाम हुसैन राष्ट्रपति बने.

राष्ट्रपति अल-बकर के त्यागपत्र के बाद 1979 मे सद्दाम हुसैन (Saddam Hussein) राष्ट्रपति बनने. सद्दाम और राष्ट्रपति अल-बकर दोनों ही इराक की धर्मनिर्पेक्ष पार्टी बॉथ के मेंबर थे.

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  • Last Updated: November 5, 2019, 5:43 PM IST
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सुपरपावर अमेरिका (America) को चुनौती देने वाले तानाशाह सद्दाम हुसैन (Saddam Hussein) का 1970 के दशक में इराक में एक शक्तिशाली नेता के रूप में उदय हुआ था. यह वह दौर था जब सद्दाम तत्कालीन राष्ट्रपति अल-बकर के खास हुआ करते थे. सद्दाम ने उस समय शासन के खिलाफ उठने वाली आवाजों को सख्ती से कुचल दिया. सद्दाम ने अपने वफादारों को देश के शीर्ष पदों पर नियुक्त करके अपनी शक्ति में इजाफा किया. 1977 तक आते-आते सद्दाम इराक के निर्विवाद नेता बन गए थे. इन दौरान उन्होंने देश की आंतरिक सुरक्षा तंत्र को काफी मजबूत किया.

देश की सुरक्षा को चुनौती देने वाले किसी भी शक्ति को बर्दाश्त नहीं किया गया. इसका असर यह हुआ कि जब राष्ट्रपति अल-बकर के त्यागपत्र के बाद सद्दाम हुसैन राष्ट्रपति बनने तो उनको चुनौती देने वाला कोई नहीं था. दरअसल सद्दाम और राष्ट्रपति अल-बकर दोनों ही इराक की धर्मनिर्पेक्ष पार्टी बॉथ के मेंबर थे. जिन्होंने देश में आधुनिकता को प्रमोट किया था.  इजराइल अरब युद्ध के दौरान सद्दाम को अपनी शक्ति को बढ़ाने का सुनहरा अवसर प्राप्त हुआ.

सद्दाम और राष्ट्रपति अल-बकर दोनों ही इराक की धर्मनिर्पेक्ष पार्टी बॉथ के मेंबर थे.


ईरान में इस्लामी क्रांति के बाद तेजी से बदले हालात

1977 में अरब-इजराइल संधि का सद्दाम ने विरोध किया था. हालांकि विरोध के बावजूद मिस्र और इजराल के बीच 1978 में कैंप डेविड की संधि हुई. दूसरी तरफ ईरान में 1979 में इस्लामी क्रांति के बाद एक कट्टर शिया सरकार की स्थापना हुई. जिसको इराकी शासन ने एक अस्पष्ट धार्मिक खतरे के रूप में देखा. तो वहीं सीरिया और ईरान में घनिष्ठता बढ़ी क्यों कि सीरिया के सत्तारूढ़ कुलीन वर्ग में से कई शियावाद की एक शाखा का पालन करते थे  और जिनका संबंध ईरान की क्रांति से था.

16 जुलाई, 1979 में सद्दाम के दबाव में राष्ट्रपति अल-बकर ने इस्तीफा दे दिया. सद्दाम हुसैन राष्ट्रपति बनने के बाद खुद को देश की सेना का कमांडर इन चीफ घोषित कर दिया. सद्दाम के राष्ट्रपति बनने के मात्र दो सप्ताह बाद, उनकी सरकार को उखाड़ बाहर करने के लिए एक साजिश रची गई. यह साजिश सीरियाई सरकार की मदद से इराकी शिया नेता अल-मुसादीन अल- मशहदी ने रची थी.

सद्दाम के राष्ट्रपति बनने के मात्र दो सप्ताह बाद, उनकी सरकार को उखाड़ बाहर करने के लिए एक साजिश रची गई.

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इराक में सद्दाम ने मजबूत की स्थिति
हालांकि बाद में सद्दाम सीरिया के साथ तालमेल बिठाने में कामयाब हो गए. इसी समय सद्दाम ने देश की सभी पार्टियों को स्पष्ट संदेश दिया कि वह राष्ट्रपति के खिलाफ किसी भी विरोध का बर्दाश्त नहीं करेंगे. सद्दाम की एक विशेष अदालत ने 22 वरिष्ठ अधिकारियों को शासन की खिलाफत करने के आरोप में जेल भेजने की सजा सुनाई थी.

इस घटना से सीरिया और इराक के संबंध खराब होने लगे. किसी भी साजिश से सीरिया के इनकार के बावजूद सद्दाम ने उस पर अपनी हत्या की योजना बनाने का आरोप लगाया. साथ ही सीरिया के साजदूत और उनसे कर्मचारियों को देश से निष्कासित कर दिया. इसके जवाब में सीरिया ने भी इराकी राजदूत और कर्मचारियों को निर्वासित कर दिया. इस तरह दोनों देशों के बीच आर्थिक संबंध भी बिगड़ गए.

1982 में ईरान के साथ युद्ध की स्थित में सीरिया ने इराक से लगती अपनी सीमा को बंद कर दिया.


1982 में ईरान के साथ युद्ध की स्थिति में सीरिया ने इराक से लगती अपने सीमा को बंद कर दिया. साथ ही अपनी समुद्री बंदरगाह से इराक के व्यापार के साथ-साथ इराक-सीरियाई तेल पाइपलाइन को भी बंद कर दिया था. इसके कुछ दिनों बाद दमिश्क ने बगदाद के साथ अपने सारे राजनयिक संबंधों को आधिकारिक रूप से खत्म कर दिया.

ईरान-इराक युद्ध
ईरान में 1979 में हुई इस्लामिक क्रांति के बाद ईरान के साथ संबंधों को सद्दाम ने प्रमुखता दी और ईरान की नई सरकार को मान्यता दी. बावजूद इसके ईरान ने सद्दाम की सत्ता को उखाड़ फेंकने और ईरानी क्रांति को वहां प्रतिस्थापित करने का प्रयास किया. साथ ही ईरान-इराक सीमा से जुड़े इलाकों को अपने कब्जे में ले लिया. गौरतलब है कि इन इलाकों को 1975 की संधि में इराक को सौंपा गया था.

इसके बाद दोनों देशों की सेनाओें के बीच सीमा पर अक्सर झड़पें होने लगीं. सितंबर 1980 में सद्दाम ने ईरान के साथ हुए 1975 की संधि को खारिज कर दिया. इसके कुछ ही दिनों के बाद इराकी सेनाओं ने ईरान पर हमला कर दिया. इराक ने ईरानी हवाई ठिकानों और अन्य रणनीतिक ठिकानों पर जमकर बमबारी की.

1980 में सद्दाम ने ईरान के साथ हुए 1975 की संधि को खारिज कर दिया.


हमले के एक सप्ताह बाद संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद ने दोनों पक्षों के बीच संघर्ष विराम का आह्वान किया. यूएन ने दोनों देशों से शांतिपूर्वक अपना विवाद निपटाने की अपील की. लेकिन दोनों पक्षों ने युद्ध जारी रखा. बाद में यह युद्ध खाड़ी के अन्य इलाकों को भी अपने चपेट में ले लिया. जो बाद में अमेरिकी हस्ताक्षेप के बाद 2003 में समाप्त हुआ.

बता दें कि खाड़ी युद्ध 1991 में इराक द्वारा कुवैत पर हमले के बाद शुरू हुआ. अमेरिका की नेतृत्ववाली गठबंधन सेना ने इराक की सेना को हराकर उसके कब्जे से कुवैत को मुक्त कराया. 2003 में सद्दाम हुसैन को फांसी में लटकाए जाने के बाद खाड़ी युद्ध समाप्त हुआ.

सद्दाम के शासन में संविधानिक विकास
इराकी संविधान के अनुसार एक विधान सभा की स्थापना की गई थी. ईरान से युद्ध के दौरान समर्थन हासिल करने के लिए विधान सभा की पहली बैठक 1980 में आयोजित की गई. इराकी विधान सभा का चुनाव 1984 और 1989 में आयोजित किए गए थे.

2003 में सद्दाम हुसैन को फांसी में लटकाए जाने के बाद खाड़ी युद्ध समाप्त हुआ.


इराकी संविधान के अनुसार विधान सभा को बहुत कम अधिकार दिया गए थे. केवल सत्तारूढ़ बॉथ पार्टी के सदस्यों को ही विधान सभा चुनावों में हिस्सा लेने का अधिकार दिया गया था. लेकिन राष्ट्रपति का निर्णय सर्वोच्च होता था. विधान सभा में बॉथ पार्टी के सदस्यों के बीच सार्थक राजनीतिक बहस होती थी.

इराक में पुनर्निर्माण
ईरान के साथ युद्ध समाप्त होने के बाद इराक में पुनर्निर्माण का कार्यक्रम चलाया गया. इस दौरान इराक विदेशी कर्ज में पूरी तरह से डूबा हुआ था. राष्ट्रीय आय की एक बड़ी मात्रा सेना पर खर्च किया जाता था. जिसके चलते मुद्रास्फीति और बेराजगारी में भारी बढ़ोतरी हुई.

सामाजिक दबावों को दूर करने के लिए सरकार ने बहुपक्षीय चुनावों और अधिक से अधिक प्रेस स्वतंत्रता की अनुमति देकर राजनीतिक प्रक्रिया खोलने का वादा किया. साथ ही 1989 के पहले तैयार किए गए संविधान के प्रावधानों को नेशनल असेंबली में पहुंचा दिया गया था. इराक के कुवैत पर आक्रमण करने के बाद पूरी लोकतांत्रिक योजना को समाप्त कर दिया गया.

ईरान के साथ युद्ध समाप्त होने के बाद इराक में पुनर्निर्माण का कार्यक्रम चलाया गया.


इराक में गठबंधन प्रोविजनल अथॉरिटी का गठन
खाड़ी युद्ध समाप्त होने के बाद इराक की बॉथ पार्टी का अंत हो गया. एक अमेरिकी राजनयिक की अध्यक्षता में इराक में गठबंधन प्रोविजनल अथॉरिटी (CPA) की स्थापना की गई, जिसने इराक में शासन की कमान संभाली.

सीपीए का प्राथमिक लक्ष्य सुरक्षा को बनाए रखना था. इसके साथ ही देश की क्षतिग्रस्त और बिगड़ते बुनियादी ढांचे का पुनर्निर्माण भी करना था. हालांकि बाद में विभिन्न समूहों के अपसी टकराव के चलते देश में अल-कायदा को अपना नेटवर्क स्थापित करने में सहायता मिली.

CPA और गवर्निंग काउंसिल भंग
जिसके बाद देश में अनगिनत हत्याओं और तोड़फोड़ का दौर शुरू हुआ. इस बीच इराकियों को सरकार का नियंत्रण सौंपने का प्रयास भी जारी रहा. जून 2004 में CPA और गवर्निंग काउंसिल को भंग कर दिया गया और राजनीतिक अधिकार गाजी अल-यावर के नेतृत्व वाली अंतरिम सरकार को दे दिया गया.

इसके बाद अयाद आलवी को प्रधान मंत्री चुना गया. 30 जनवरी 2005 को जारी हिंसा के बावजूद, इराक के नए 275 सदस्यीय संक्रमणकालीन नेशनल असेंबली के लिए आम चुनाव सफलतापूर्वक संपन्न हुए. अप्रैल 2005 में कुर्दिश नेता जलाल अकबनी को इराक का राष्ट्रपति चुना गया.

इराक में आईएसआईएस
पश्चिमी इराक में कट्टरपंथी सुन्नी आतंकवादियों ने परिस्थियों का लाभ उठाते हुए अप्रैल 2013 में इराक इस्लामिक स्टेट इन इराक एंड सीरिया [ISIS] ने अपनी कार्रवाई शुरू की. 2013 के अंत तक आईएसआईएस ने देश के पश्चिमी और उत्तरी क्षेत्रों में इराकी सरकार के नियंत्रण के लिए एक गंभीर चुनौती शुरू कर दी थी.

जनवरी 2014 में आईएसआईएस ने इराक के कई इलाकों पर कब्जा कर लिया था. हालांकि अमेरिकी और इराकी सेनाओं ने 2015 तक इराक के अधिकांश इलाकों से आईएसआईएस को खदेड़ दिया है. लेकिन अभी भी से संस्था सीरिया के कुछ इलाकों पर काबिज है. हाल ही में अमेरिकी सेना की स्पेशल डेल्टा फोर्स ने आईएसआईएस के प्रमुख अबु बकर अल-बगदादी को सीरिया में मार गिराया है.

2014 में आईएसआईएस ने इराक के कई इलाकों पर कब्जा कर लिया था.


गरीबी और बेरोजगारी के चलते हो रहे हैं विरोध प्रदर्शन
एक लंबे राजनीतिक उथल-पुथल का प्रभाव इराकी समाज में आज देखा जा सकता है. राजनीतिक और शीर्ष अधिकारियों में व्याप्त भ्रष्टाचार के कारण देश भारी आर्थिक समस्यों से घुर चुका है. लोगों में बढ़ती गरीबी और युवाओं में बेलगाम बेरोजगारी के चलते युवाओं का आक्रोश अब सड़कों पर दिखाई पड़ने लगा है. पिछले कुछ महीनों से राजधानी बगदाद में युवाओं की हिंसक विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं. लोग अपने बुनियादी सहूलियतों की मांग लेकर प्रदर्शन कर रहे हैं.

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First published: November 5, 2019, 4:50 PM IST
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