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भारत का वो बेमिसाल शहर, जहां से ताल्लुक रखते हैं 4 नोबेल विजेता

Bhavesh Saxena | News18Hindi
Updated: October 15, 2019, 12:33 PM IST
भारत का वो बेमिसाल शहर, जहां से ताल्लुक रखते हैं 4 नोबेल विजेता
न्यूज18 क्रिएटिव

भारत (India) के हिस्से में उंगलियों पर गिने जा सकें, इतने ही नोबेल पुरस्कार (Nobel Prize) आए हैं, लेकिन जानें कि इसके बावजूद क्यों 4 विजेता सिर्फ एक शहर से जुड़े हैं.

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स्वीडन (Sweden) की नोबेल कमेटी (Nobel Prize Committee) ने सोमवार को अर्थशास्त्र (Economics) के क्षेत्र में विजेताओं की घोषणा की. जिसमें भारतीय मूल के अमेरिकी अर्थशास्त्री अभिजीत बनर्जी (Abhijit Banerjee) अपनी पत्नी एस्थर डफलो और माइकल क्रेमर के साथ संयुक्त रूप से शामिल हैं. बनर्जी का शिक्षा के समय ताल्लुक पश्चिम बंगाल (West Bengal) की राजधानी कोलकाता (Kolkata) से रहा. लेकिन, दिलचस्प बात ये है कि इस ऐतिहासिक और सांस्कृतिक महत्व के शहर से सिर्फ बनर्जी ही नहीं बल्कि चार नोबेल विजेताओं (Nobel Winner Indians) का ताल्लुक रहा है. उन चारों विजेताओं के साथ ही समझें कि इस संयोग के पीछे क्या कारण हैं.

ये भी पढ़ें : कौन हैं अभिजीत बनर्जी और उनकी पत्नी, जिन्हें मिला नोबेल प्राइज़

साहित्य का नोबेल विजेता एकमात्र भारतीय
साल 1913 में गुरुदेव रबींद्रनाथ टैगोर (Rabindra Nath Tagore) को साहित्य के क्षेत्र में नोबेल विजेता घोषित किया गया था. भारत के राष्ट्रगान (National Anthem) के रचयिता कवि और प्रसिद्ध कलाकार टैगोर का जन्म 1861 में कलकत्ता (Calcutta) में हुआ था और उसके बाद लगातार कलकत्ता के साथ उनका नाता बना रहा. शिक्षा कलकत्ता यूनिवर्सिटी (Calcutta University) से हुई और उनका देहांत भी इसी शहर में हुआ. यहां तक कि उनका रचा 'भारत भाग्य विधाता' गीत पहली बार 1911 में कांग्रेस के कलकत्ता अधिवेशन में ही गाया गया था.

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कोलकाता का गूगल मैप.


टैगोर के बाद किसी विशुद्ध भारतीय को साहित्य का नोबेल नसीब नहीं हुआ. अलबत्ता वीएस नायपॉल ज़रूर साहित्य के नोबेल विजेता रहे, लेकिन भारत के साथ उनका रिश्ता दो पीढ़ी पीछे से जुड़ता है और वह भारत के साथ कोई निजी लगाव भी नहीं रख सके, यह उन्होंने खुद कबूल किया था. वहीं, रूडयार्ड किपलिंग ब्रिटिशकालीन भारत के बम्बई में जन्मे थे.

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शांति का नोबेल मदर टेरेसा को
मदर टेरेसा जन्म और शिक्षा आदि से विदेशी थीं और ईसाई मिशनरी के तौर पर भारत आई थीं. लेकिन, बंगाल खासकर कलकत्ता के साथ उनका लंबा रिश्ता रहा और इसी शहर में उन्होंने अपनी अहम सेवाएं दीं. कलकत्ते में ही उन्होंने मोतीझील में एक स्कूल खोला था. इसी शहर में उनका निधन हुआ और यहीं उनका समाधि स्मारक मदर हाउस बना है.

पहला नोबेल विनर अर्थशास्त्री
अमर्त्य सेन का जन्म कलकत्ता से करीब डेढ़ सौ किलोमीटर दूर शांतिनिकेतन यूनिवर्सिटी परिसर में हुआ था और उनका परिवार मूल रूप से ढाका से ताल्लुक रखता था. लेकिन शिक्षा के समय में कलकत्ता से सेन का जुड़ाव हुआ, जब वह प्रेसिडेंसी कॉलेज से बीए करने पहुंचे थे. यहां अव्वल रहते हुए डिग्री लेने के साथ ही, कलकत्ता से उनकी एक दुखद याद भी जुड़ी. बीए के दौरान ही उन्हें ओरल कैंसर हुआ था और उनकी कम ज़िंदगी की आशंका भी जताई गई थी लेकिन इलाज कामयाब रहा.

इसके बाद वह कैम्ब्रिज चले गए थे, लेकिन जब कलकत्ता में जादवपुर यूनिवर्सिटी बनी तब सेन ने दो सालों तक अर्थशास्त्र विभाग के प्रमुख के तौर पर कमान संभाली थी. इस यूनिवर्सिटी में अब तक के सबसे कम उम्र के विभाग प्रमुख का रिकॉर्ड सेन के नाम ही है.

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अर्थशास्त्र का नोबेल पुरस्कार 2019 भारत में जन्मे अभिजीत बनर्जी को संयुक्त रूप से हासिल हुआ.


सेन के बाद अभिजीत बनर्जी का नाम
इस साल यानी 2019 का अर्थशास्त्र का नोबेल पुरस्कार अभिजीत बनर्जी के खाते में गया है. हालांकि अभिजीत अमेरिकी नागरिक हैं और वहीं कुछ यूनिवर्सिटियों में पढ़ाते हैं लेकिन 1961 में उनका जन्म भारत में हुआ था. उनके पिता दीपक बनर्जी और मां निर्मला बनर्जी दोनों ही कलकत्ता में प्रोफेसर रहे. दीपक प्रेसिडेंसी कॉलेज में अर्थशास्त्र के ही प्रोफेसर थे और इसी कॉलेज से अभिजीत ने 1981 में अर्थशास्त्र में बीएस की डिग्री हासिल की थी.

इन चारों नोबेल विजेताओं की चर्चा के साथ एक बड़ा बिंदु ये सामने आता है कि पहले भारतीय नोबेल विजेता ने एक प्रसिद्ध यूनि​वर्सिटी का बरसों तक कामयाब संचालन किया तो दो नोबेल विजेताओं अर्थशास्त्रियों को कोलकाता से रिश्ता यूनिवर्सिटी स्तर की शिक्षा के कारण ही बना.

क्या है कोलकाता की उच्च शिक्षा का स्तर?
कलकत्ता यूनिवर्सिटी दुनिया में विख्यात है, जिसे 2019 में एशिया की सर्वश्रेष्ठ यूनिवर्सिटियों की सूची में 134वें नंबर पर और ब्रिक्स देशों में 68वें नंबर पर रखा गया. भारत में इस साल की टॉप सूची में यह यूनिवर्सिटी 5वें नंबर पर है. वहीं, एनआईआरएफ ने देश की टॉप यूनिवर्सिटियों की जो लिस्ट जारी की है, उसमें 6वें नंबर पर कोलकाता की ही जादवपुर यूनिवर्सिटी है. दूसरी ओर, 193 साल का इतिहास रखने वाले प्रेसिडेंसी कॉलेज को 2010 में यूनिवर्सिटी का दर्जा मिला और एनआईआरएफ की 2016 की रैंकिंग में नई यूनिवर्सिटियों की रैंकिंग में टॉप 50 में इसका नाम शुमार था.

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कोलकाता स्थित प्रेसिडेंसी कॉलेज, जो अब प्रेसिडेंसी यूनिवर्सिटी बन चुका है.


इतिहास और संस्कृति के लिए शोहरत
बांग्ला देश की समृद्ध भाषाओं में शुमार रही है, जिसमें इतिहास, संस्कृति और साहित्य का अनमोल खज़ाना है. वहीं, मध्यकालीन से लेकर प्राचीन इतिहास तक के हवाले से कोलकाता कई विरासतों का शहर रहा है. अंतर्राष्ट्रीय व्यापार के इतिहास में समुद्री रास्ते के कारण कई देशों के प्रभाव इस शहर तक पुराने समय से पहुंचते रहे हैं. इस शहर को देश की सांस्कृतिक राजधानी माना जाता रहा है. धर्म-अध्यात्म हो या राजनीति, व्यापार हो या विचारधारा, कई प्रमुख मोर्चों पर बंगाल और कोलकाता अपना अनूठा और अग्रणी स्थान रखता रहा है.

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First published: October 14, 2019, 6:51 PM IST
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