भारत विरोधी कही गई लेबर पार्टी कभी बनी थी आज़ादी की वजह!

ये इत्तेफाक ही है कि 15 अगस्त 1947 को जब भारत (India) आज़ाद हुआ, तो उसके पीछे लेबर पार्टी (Labour Party) की खास भूमिका थी. अब कश्मीर (Kashmir) मामले पर बयान की वजह से भारत विरोधी कही जा रही इस पार्टी से जुड़ा भारतीय इतिहास जानें.

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Updated: August 14, 2019, 8:24 PM IST
भारत विरोधी कही गई लेबर पार्टी कभी बनी थी आज़ादी की वजह!
तत्कालीन ब्रिटिश प्रधानमंत्री क्लेमेंट एटली के साथ जवाहरलाल नेहरू.
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Updated: August 14, 2019, 8:24 PM IST
जम्मू कश्मीर (Jammu & Kashmir) के विशेष राज्य के दर्जे को खत्म दो केंद्रशासित प्रदेशों (UT) में पु​नर्गठित किए जाने के फैसले को 'अवैधानिक' करार देने के बाद ब्रिटेन की लेबर पार्टी पर इल्ज़ाम लगा है कि वो भारत विरोधी है. ब्रिटेन (Britain) की सत्तारूढ़ कंज़र्वेटिव पार्टी के सांसद ने ये आरोप लगाते हुए भारत के कश्मीर राज्य के फैसले को देश का अंदरूनी मामला बताकर पूरी तरह संवैधानिक (Constitutional) करार दिया है. इस पूरे एपिसोड के कारण ब्रिटेन की सियासत में सवा सौ साल से ज़्यादा पुरानी लेबर पार्टी सुर्खियों में आ गई है. ये वही लेबर पार्टी है, जो कभी भारत की आज़ादी के पीछे मुख्य भूमिका में रही थी. आइए, इस पार्टी की कुंडली के प्रमुख ग्रह नक्षत्रों पर नज़र डालें.

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अस्ल में, हुआ ये कि ब्रिटेन में नेता प्रतिपक्ष और लेबर पार्टी के राजनीतिज्ञ जेरेमी कॉर्बेन ने ट्वीट (Tweet) के ज़रिए कहा कि कश्मीर में हालात तनावपूर्ण हैं. आर्टिकल 370 (Article 370) हटाए जाने के फैसले को संयुक्त राष्ट्र के रिज़ॉल्यूशन (UN Resolution) की रोशनी में देखना चाहिए. इसके बाद लेबर पार्टी के एक और सांसद ने भारत के इस कदम को 'अवैधानिक' करार देकर ब्रिटिश प्रधानमंत्री (Prime Minister) से भारत के खिलाफ कदम उठाने की मांग करने वाला एक पत्र पोस्ट कर दिया. इसके बाद कंज़र्वेटिव सांसद बॉब ब्लैकमैन ने कश्मीर पर फैसले के मामले में भारत को क्लीन चिट देते हुए लेबर पार्टी को भारत विरोधी करार दे दिया.

क्या है लेबर पार्टी?

19वीं सदी के अंतिम सालों में ब्रिटेन में ये पार्टी वजूद में आई थी. इस पार्टी की बुनियाद कार्ल मार्क्स के सिद्धांतों के प्रसिद्ध होने के बाद समाजवादी सिद्धांतों पर रखी गई थी. 1870 के आसपास लेबर पार्टी ने लिबरल पार्टी के साथ हाथ मिलाया था, या यों कहिए कि लिबरल पार्टी की ही एक शाखा के तौर पर इसका उदय हुआ था. फिर फैबियन सोसायटी, मार्क्सवादी सोशल डेमोक्रेटिक फेडरेशन और स्कॉटिश लेबर पार्टी के साथ से लेबर पार्टी के आंदोलन को बल मिला. इस पार्टी ने अपनी विचारधारा के बल पर सालों तक संघर्ष कर अपनी पैठ मज़बूत की और पहली बार 1924 में लेबर पार्टी की सरकार बनी.

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ब्रिटिश सांसद बॉब ब्लैकमैन ने कश्मीर पर फैसले के मामले में भारत को क्लीन चिट देते हुए लेबर पार्टी को भारत विरोधी करार दे दिया.

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भारत की आज़ादी की कहानी में लेबर पार्टी
दूसरा विश्वयुद्ध 1939 में शुरू हुआ था, लेकिन 1940 के बाद हालात बुरी तरह बिगड़े और कई देश इस युद्ध की आग में जले. इनमें एक ब्रिटेन भी था. उसी समय भारत में, महात्मा गांधी ने 'अंग्रेज़ों भारत छोड़ो' आंदोलन शुरू किया, जिसे व्यापक समर्थन मिल रहा था. यही वो वक़्त था जब नेताजी सुभाष चंद्र बोस जापान और कई देशों में गुपचुप यात्राएं कर भारतीय राष्ट्रीय सेना यानी इंडियन नेशनल आर्मी को मज़बूत कर रहे थे.

पूरी दुनिया युद्ध की चपेट में आ चुकी थी और दो से ज़्यादा ध्रुवों में बंट चुकी थी. युद्ध के चलते ब्रिटेन का आर्थिक संकट लगातार गहराता जा रहा था. 1945 में युद्ध खत्म होने के आसार नज़र आने लगे थे और तभी ब्रिटेन में चुनावों का वक्त भी था. उस समय अपने चुनावी घोषणा पत्र में लेबर पार्टी ने वादा किया था कि अगर उसकी 'सरकार बनी, तो वह भारत को आज़ाद करने की दिशा में बड़े फैसले करेगी. यही नहीं, ब्रिटेन के गुलाम कुछ और देशों को भी आज़ाद किया जाएगा'.

घोषणा पत्र में इस वादे के कारण?
लेबर पार्टी ने 1945 में 10 सूत्रीय चुनावी घोषणा पत्र प्रस्तुत किया था, जिसमें 'विकास और शांति की दुनिया' के शीर्षक वाले सूत्र में इस बात का उल्लेख था 'ब्रिटिश कॉमनवेल्थ, भारत के स्वराज की दिशा में कदम और औपनिवेशिक निर्भरों की तरक्की के लिए राजनीतिक, सैन्य और आर्थिक, सभी स्तरों पर लेबर पार्टी आपसी समझ और सहयोग को विकसित करेगी'.

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1945 में लेबर पार्टी के चुनावी घोषणा पत्र का अंश आर्काइव से साभार.


अस्ल में, उस वक्त ब्रिटेन की आर्थिक स्थिति डांवाडोल हो चुकी थी और वह औपनिवेशिक साम्राज्य के विस्तार को एक कारण मान रहा था, वहीं भारत जैसे कुछ उपनिवेशों में ज़बरदस्त आंदोलनों को भी लेबर पार्टी ने तवज्जो देकर अपने देश में इसे राजनीतिक मुद्दा बनाया था. इसी मैनिफेस्टो में लेबर पार्टी ने तब कहा था 'ब्रिटेन का आगामी चुनाव लोगों के कॉमन सेंस और जजमेंट की ऐतिहासिक परीक्षा होगा'.

लेबर पार्टी ने क्या वादा निभाया?
1945 के चुनाव में लेबर पार्टी को जीत मिली और क्लेमेंट एटली ने सरकार बनाई. सत्ता में आते ही भारत ने लेबर पार्टी पर दबाव भी बनाया और लेबर पार्टी ने अपने चुनावी वादे को निभाते हुए भारत को आज़ादी देने की प्रक्रिया तेज़ की. वॉवेल और फिर माउंटबैटन को वायसराय के तौर पर भारत में नियुक्त किया गया और भारत को कब, किस तरह और कितनी शक्तियां हस्तांतरित की जाएं, इसका ज़िम्मा सौंपा. भारत के नेताओं के साथ बातचीत के बाद ब्रिटिश राज से 15 अगस्त 1947 को भारत को स्वतंत्रता मिली.

लेबर पार्टी ने चुनावी वादा निभाया और भारत को आज़ादी मिली थी, लेकिन कई इतिहासकार मानते हैं कि ब्रिटिश हुकूमत ने विभाजन की शर्त को अनिवार्य बनाने के हालात पैदा कर भारत को आज़ादी तो दी, लेकिन एक ऐसा छल भी किया जिसके दुष्परिणाम लंबे समय तक बने रहेंगे. भारत की आज़ादी में लेबर पार्टी की भूमिका तो थी लेकिन वह भारत हितैषी ही रही है, ऐसा सौ फीसदी नहीं कहा जा सकता.

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First published: August 14, 2019, 8:24 PM IST
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