पहली बार शहरी इलाकों में कैसे पहुंच गए टिड्डी दल? जानें टिड्डियों का पूरा रूटमैप

पहली बार शहरी इलाकों में कैसे पहुंच गए टिड्डी दल? जानें टिड्डियों का पूरा रूटमैप
प्रशासन ने टिड्डी दल के संभावित खतरे से बचाव के लिए खेतों में डीजे बजाने का भी इंतजाम किया है. फाइल फोटो.

खेतों और फसलों को तो टिड्डियों के दल (Locusts Swarms) तबाह करते रहे हैं लेकिन पहले कभी शहरों में नहीं देखे गए, जैसे इस बार जयपुर (Jaipur) व अन्य शहरी इलाकों में ये टिड्डी दल ​हैरानी की वजह बन गए. क्या वजह है कि ये शहरी इलाकों में दिखे? कहां से आए और क्यों? ये भी जानिए कि भारत (India) में इनसे खतरे की आशंकाएं क्या और कितनी हैं.

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एक दिन में डेढ़ सौ किलोमीटर तक उड़ने वाले टिड्डी दलों (Locust Swarm) को अगर रोका न जाए तो ये देश के लिए खाद्य सुरक्षा (Food Security) का खतरा पैदा कर सकते हैं. लेकिन यह पहली बार है कि टिड्डियों के दल शहरी इलाकों (Urban Areas) में देखे गए. हाल ही जयपुर शहर में इन दलों ने घरों में घुसकर लोगों को हैरान परेशान कर दिया. मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र (Maharashtra) में भी शहरी क्षेत्रों में झुंड के झुंड दिखे. ऐसा क्यों हो रहा है? साथ ही, ये भी जानें कि देश में ये दल कैसे आए और अब फसलों के नुकसान (Crops Damage) को लेकर क्या चिंताएं हैं.

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भारत में कब दिखते हैं टिड्डी दल?
सामान्य रूप से भारत में रेगिस्तानी टिड्डियों के दल तबाही के कारण होते हैं, जो अपने रास्ते की सारी हरियाली चट कर जाने के लिए जाने जाते हैं. वर्तमान में इथोपिया और सोमालिया जैसे देशों यानी हॉर्न ऑफ अफ्रीका में पिछले 25 सालों में टिड्डी दलों का सबसे भयानक हमला जारी है. भारत में, साधारणतया ये टिड्डी दल जुलाई से अक्टूबर के बीच दिखते हैं लेकिन इस बार की कहानी अलग है.



पिछले करीब डेढ़ साल से रह रहकर भारत में टिड्डी दलों ने हमला किया है. इस साल कृषि मंत्रालय के वैज्ञानिकों और राजस्थान के ज़िलों के टिड्डी चेतावनी संस्थान ने बताया था कि बीते 11 अप्रैल को टिड्डियों के छोटे दल देखे गए थे. इससे पहले उत्तर गुजरात और पश्चिमी राजस्थान के इलाकों में पिछले साल रबी की फसल को टिड्डियां नुकसान पहुंचा चुकी थीं.



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जयपुर में टिड्डियों के दल ने घरों में घुसकर तबाही मचाई तो सोशल मीडिया पर ये खबर सनसनी की तरह फैली.


शहरों में क्यों दिख रहे हैं टिड्डी दल?
पहले कभी ऐसा नहीं हुआ कि शहरी इलाकों में टि​ड्डी दल दिखाई दिए हों. लेकिन इस बार राजस्थान के जयपुर, मध्य प्रदेश के मुरैना और श्योपुर समेत महाराष्ट्र के नागपुर, अमरावती और वर्धा के शहरी इलाकों में टिड्डियों के दल दिखाई दिए. जयपुर में तो आसमान काला हो गया और ये टिड्डी दल बड़ी संख्या में घरों में भी घुस गए. विशेषज्ञों के हवाले से खबरें हैं कि दिल्ली के शहरी क्षेत्र में भी टिड्डी दल पहुंच सकते हैं.

इस बारे में टिड्डी चेतावनी संस्थान के अधिकारी के एल गुर्जर के हवाले से इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट कहती है चूंकि इस समय खेतों में फसल नहीं खड़ी है और टिड्डी दल हवाओं के साथ सफर करते हैं, इसलिए जयपुर या अन्य शहरों में दिखाई दिए. गुर्जर के मुताबिक फिलहाल राजस्थान में टिड्डियों के तीन या चार दल और मप्र में दो या तीन अलग दल सक्रिय हैं, जिनमें से एक छोटा दल महाराष्ट्र की तरफ मुड़ गया है.

भोजन व प्रजनन की ज़रूरत है वजह
संयुक्त राष्ट्र की खाद्य एवं कृषि संस्था यानी एफएओ के टिड्डी विशेषज्ञ कीथ क्रेसमैन के हवाले से रिपोर्ट कहती है कि टिड्डी दल इस महीने की शुरूआत में पाकिस्तान से राजस्थान पहुंचे थे. चूंकि अब बरसात के पहले का समय है और काफी गर्म है इसलिए भोजन की तलाश में ये पूर्वी दिशा की तरफ बढ़े. ये दल नमी वाली जगह ढूंढ़ रहे हैं, जहां इन्हें भोजन के साथ ही अगले कुछ हफ्तों में प्रजनन के लिए वातावरण मिल सके और ये अंडे दे सकें.

जल्दी क्यों आ गए टिड्डी दल?
साल 2018 में ओमान और यमन में मेकुनू और लूबान जैस चक्रवाती तूफानों के कारण रेगिस्तानों में झीलें तक बन गई थीं. इस तरह के वातावरण में वहां टिड्डी दलों को पनपने का खूब मौका मिला. साल 2019 के आखिरी महीनों तक इन दलों ने पूर्वी अफ्रीका में भारी तबाही मचाई. फिर ये ईरान और वहां से पाकिस्तान की तरफ पहुंचे. इस साल की शुरूआत से ही पाकिस्तान से ये टिड्डियां भारत पहुंचीं. वहीं, पूर्वी अफ्रीका में मार्च-अप्रैल में भारी बारिश के कारण वहां फिर टिड्डियां पनप गई हैं.

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महाराष्ट्र में संतरे की फसल खड़ी है इसलिए टिड्डी दल के आशंकित हमले को लेकर किसान चिंतित हैं. (फाइल फोटो)


फसलों का कितना नुकसान होगा?
इस बारे में राष्ट्रीय स्तर पर फिलहाल कोई पुख्ता अनुमान नहीं है. लेकिन, चूंकि अभी खेतों में फसल नहीं खड़ी है और रबी की फसल काटी जा चुकी है इसलिए पश्चिमी राज्यों में फसलों को ज़्यादा नुकसान का खतरा नहीं है. दूसरी तरफ, महाराष्ट्र में संतरे की फसल खड़ी है और वहां इसे लेकर चिंता है. लेकिन विशेषज्ञ मान रहे हैं कि महाराष्ट्र पहुंचा टिड्डी दल बहुत छोटा है इसलिए काबू पाना ज़्यादा मुश्किल नहीं होगा.

भविष्य के लिए चिंता की बात है
असल में बड़ी चिंता यह है कि जब ये मौजूदा टिड्डियां आने वाली बरसात के समय में प्रजनन करेंगी तो क्या होगा. अगर इनके लिए अभी से रणनीति नहीं बनाई गई तो विशेषज्ञों के मुताबिक एक ​वर्ग किलोमीटर में 8 करोड़ टिड्डियों के हिसाब से ये बढ़ सकती हैं. मानसून शुरू होते ही अगले दो महीनों तक टिड्डियां अंडे देंगी और गुणात्मक ढंग से बढ़ेंगी तो खरीफ की फसल के लिए खतरा पैदा होगा.

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First published: May 27, 2020, 2:33 PM IST
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