कोविड-19 के बीच लाखों स्टूडेंट्स कैसे दे रहे हैं NEET एग्ज़ाम? 10 पॉइंट्स में जानें

कोविड-19 के बीच लाखों स्टूडेंट्स कैसे दे रहे हैं NEET एग्ज़ाम? 10 पॉइंट्स में जानें
न्यूज़18 क्रिएटिव

NEET 2020 : विपक्ष के साथ ही कई सामाजिक एक्टिविस्टों (Social Activists) के विरोध के बावजदू नीट एंट्रेंस एग्ज़ाम का आयोजन रविवार को संपन्न करवाया जा रहा है. जानिए सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) व केंद्र के क्या निर्देश हैं और कैसे परीक्षा केंद्रों तक पहुंच रहे हैं छात्र...

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  • Last Updated: September 13, 2020, 8:39 AM IST
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देश भर में मेडिकल कोर्सों (Medical Courses) में दाखिले के लिए होने वाले नेशनल एलिजिबिलिटी एंट्रेंस टेस्ट (NEET) में 16 लाख से ज़्यादा छात्र रविवार को शामिल होने जा रहे हैं. Covid-19 के दौर में इन परीक्षाओं को टाले जाने के लिए कई विरोध प्रदर्शनों (Protests) के बावजूद देश भर में इस परीक्षा का आयोजन करवाया जा रहा है. इससे पहले सुप्रीम कोर्ट में भी इन परीक्षाओं को रोकने के लिए याचिका दायर की गई थी, लेकिन कोर्ट ने पुख्ता इंतज़ामों के बीच एग्ज़ाम कराए जाने के निर्देश दिए थे.

हाल में, सुप्रीम कोर्ट ने NEET आयोजित किए जाने के विरोध में और कोई सुनवाई करने से मना कर दिया था. इससे पहले, इंजीनियरिंग के लिए होने वाले JEE इम्तिहान भी करवाए जा चुके हैं. अब 10 पॉइंट्स में जानिए​ कि इतने बड़े स्तर पर परीक्षा कोरोना काल में कैसे संपन्न हो रही है.

1. परीक्षा में शामिल होने आ रहे छात्रों से अपने साथ न केवल हैंड सैनिटाइज़र और पानी की बोतल साथ लाने को कहा गया है बल्कि फेस मास्क और दस्ताने पहनना भी अनिवार्य किया गया है.



2. सुप्रीम कोर्ट और केंद्र सरकार के निर्देशों के मुताबिक देशव्यापी स्तर पर प्रतियोगी परीक्षाएं करवाने वाली संस्था नेशनल टेस्टिंग एजेंसी ने एग्ज़ाम के आयोजन के लिए विस्तृत दिशानिर्देश जारी कर छात्रों के रिपोर्टिंग टाइम और सोशल डिस्टेंसिंग ​के हिसाब से सीट व्यवस्था तय करने को भी कहा.
3. पिछले महीने सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि 'छात्रों के करियर को खतरे में नहीं डाला जा सकता' इसलिए एग्ज़ाम करवाए जाने चाहिए. कोर्ट ने कहा था कि कोविड एक साल से भी ज़्यादा समय तक कहर ढा सकता है, लेकिन जीवन रुक नहीं जाता.

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4. रविवार को होने जा रही NEET परीक्षा से सिर्फ एक दिन पहले तक सोशल मीडिया पर परीक्षाओं के आयोजन के विरोध में #BanNEET और #NEETisSocial_Injustice जैसी हैशटैग मुहिम चल रही थीं.

5. केवल महाराष्ट्र में ही NEET के लिए करीब 2.3 लाख छात्रों ने रजिस्ट्रेशन करवाया. यह इसलिए अहम है क्योंकि देश में कोरोना से सबसे बुरी तरह प्रभावित राज्य महाराष्ट्र ही है. इसके अलावा, उत्तर प्रदेश में 1.67 लाख, कर्नाटक में 1.19, तमिलनाडु में 1.18 और केरल में 1.16 लाख परीक्षार्थी शामिल होने जा रहे हैं.

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6. कोविड 19 के प्रकोप से जूझने वाले उपरोक्त राज्यों में ही परीक्षार्थियों की संख्या साढ़े 8 लाख से ज़्यादा होगी. जबकि खबरों के मुताबिक कहा जा रहा है कि देश भर में 16 लाख से भी ज़्यादा परीक्षार्थी NEET में शामिल हो सकते हैं.

7. परक्षार्थियों के लिए राज्य सरकारें अपने स्तर पर सहयोग मुहैया करा रही हैं, जैसे बंगाल में कोविड लॉकडाउन में ढील देकर स्पेशल मेट्रो छात्रों के​ लिए चलाई जा रही है; पंजाब में वीकेंड कर्फ्यू हटाया गया; ओडिशा में लंबी दूरी तय करने वाले परीक्षार्थियों के लिए ट्रांसपोर्ट और ठहरने की व्यवस्था करवाई गई; मुंबई में स्पेशल ट्रेनें चलाई जा रही हैं तो बिहार, मध्य प्रदेश व छत्तीसगढ़ में भी परीक्षार्थियों को सफर के लिए सहयोग की बात कही गई.

8. इससे पहले JEE की परीक्षा के पहले दिन 1 सितंबर को उत्तर प्रदेश की राजधानी में परीक्षार्थियों की हाज़िरी 60 फीसदी रही थी. इसी तरह, बंगाल में 25 फीसदी उपस्थिति रही थी तो गुजरात में करीब 45 फीसदी छात्र परीक्षा देने से वंचित रहे थे. खबरों की मानें तो इसकी वजह एग्ज़ाम सेंटरों तक पहुंचने के लिए ट्रांसपोर्ट सुविधाएं न होना रहा था.

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9. परीक्षा के समय जिन छात्रों का बॉडी टेंप्रेचर सामान्य से ज़्यादा पाया जाएगा, उनके लिए अलगसे 'आइसोलेशन कमरों' की व्यवस्था करने के निर्देश हैं. इसके साथ ही, एनटीए ने ये भी निर्देश दिए हैं कि छात्र ये घोषणा पत्र भी देंगे कि उनमें कोविड के लक्षण नहीं हैं और वो किसी कोविड पॉज़िटिव के संपर्क में नहीं रहे हैं.

10. ये भी गौरतलब है कि तमिलनाडु में बीते शनिवार को दो NEET परीक्षार्थियों ने आत्महत्या की. इससे पहले, बुधवार को भी एक छात्र के आत्महत्या करने की खबर सामने आई थी.

कुल मिलाकर बात ये है कि सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के मुताबिक तमाम सावधानियां बरतते हुए छात्रों के ​भविष्य को सुरक्षित करने के लिए ये एग्ज़ाम कराए जा रहे हैं. हालांकि कांग्रेस नेता राहुल गांधी, महाराष्ट्र के मंत्री आदित्य ठाकरे, पश्चिम बंगाल मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और डीएमके प्रमुख स्टालिन जैसे कई नेताओं सहित कई वर्गों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने परीक्षाएं आयोजित करवाए जाने का विरोध किया था.
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